Бигузашт зиндагии ҳама дар интизори марг

بگذشت زندگی همه در انتظار مرگ

Аммо чаҳ зиндагӣ ? ки наомад бакори марг !

اما چه زندگی؟ که نیامد بکار مرگ!

Айнак бидида нест маро , нури чашми ман

عینک بدیده نیست مرا، نور چشم من

Чашмам чаҳор шуд барраи интизори марг !

چشمم چهار شد بره انتظار مرگ!

Бар хост гирд перем аз шоҳроҳи умр

بر خاست گرد پیریم از شاهراه عمر

Маълум шуд ки мерасад инак савори марг !

معلوم شد که میرسد اینک سوار مرگ!

Аз баҳри дўрбоши ҳавосами зи роҳ ӯ

از بهر دورباش حواسم ز راه او

Гардӣда перем зи Асои чӯбдори марг

گردیده پیریم ز عصا چوبدار مرگ

Бо ҳар ду по бдом фитодам , чу қад хамед

با هر دو پا بدام فتادم، چو قد خمید

Пушт ду тост , хами каманди шикори марг

پشت دو تاست، خم کمند شکار مرگ

Барадем мурдаи мурдаи басари бскаҳи зиндагӣ

بردیم مرده مرده بسر بسکه زندگی

Имрӯз нестем ғариби диёри марг

امروز نیستیم غریب دیار مرگ

Зини пеши ҷинси марги чунин ройгон набӯд

زین پیش جنس مرگ چنین رایگان نبود

Бардошти давряти зи миёни эътибори марг

برداشت دوریت ز میان اعتبار مرگ

Осӯдаи зи изтироб маишат наме шавад

آسوده ز اضطراب معیشت نمی شود

Бо хештан касе надиҳад то қарори марг

با خویشتن کسی ندهد تا قرار مرگ

Воъиз , маро на пушти хам аз заъф перӣ аст

واعظ، مرا نه پشت خم از ضعف پیری است

Қад кардаам дўто , ки рӯми зери бори марг

قد کرده ام دوتا، که روم زیر بار مرگ