Ҳаст умеди қӯтии бахти заъифи ҳол ро
هست امیدِ قوتی بختِ ضعیفحال را
Муждаи як хироми даҳ мунтазири висол ро
مژدهٔ یک خرام ده منتظرِ وصال را
Гӯша ноумедӣ ам дод зи сад балои амон
گوشهٔ ناامیدیام داد ز صد بلا امان
Ҳаст қафаси ҳисори ҷони мурғи шикастаи бол ро
هست قفس حصارِ جان مرغِ شکسته بال را
Ршҳаҳи васли кӯ каз ӯ гирди умед нам кашад
رشحهٔ وصل کو کز او گردِ امید نم کشد
Вази нами он бароварами рахнаи инфисол ро
وز نمِ آن برآورم رخنهٔ انفصال را
Ним шубон нишаста ҷон бар дар хилвати дилам
نیمشبان نشسته جان بر درِ خلوتِ دلم
Мунтазири садои пои мҳдкши хаёл ро
منتظرِ صدای پا مهدکشِ خیال را
Ман ки ба васл ташнаам Хизр чаҳ обам оварад ?
من که به وصل تشنهام خضر چه آبم آورد؟
Рафъ аташ намешавад ташнаи ин зулол ро
رفعِ عطش نمیشود تشنهٔ این زلال را
Дили зи фиреби ҳасан ӯ базми фусӯсу андар ӯ
دل ز فریبِ حسنِ او بزمِ فسوس و اندر او
Анҷуманӣ ба ҳар тарафи орзӯии маҳол ро
انجمنی به هر طرف آرزوی محال را
Ваҳшии маҳви мондаро қӯти шукри васли кӯ
وحشیِ محو مانده را قوّتِ شکرِ وصل کو
Ҳайрати дида гӯ бигӯ узри забони лол ро
حیرتِ دیده گو بگو عذرِ زبانِ لال را