Мабодо ёрб он рӯзӣ ки ман аз чашми ёри уфтам

مبادا یارب آن روزی که من از چشم یار افتم

Кигар аз чашми ёри уфтами зи чашми эътибори уфтам

که گر از چشم یار افتم ز چشم اعتبار افتم

Шароби лутфи пар дар ҷом май резӣ ва май тарсам

شراب لطفْ پُر در جام می‌ریزی و می‌ترسم

Ки зуд охир шавад ин бода ва ман дар хумори уфтам

که زود آخِر شود این باده و من در خُمار افتم

Ба маҷлис май рӯми андишнок эй ишқи оташи дам

به مجلس می‌روم اندیشناک ای عشقِ آتش‌دم

Бидам бар ман фусунӣ то қабули табъи ёри уфтам

بِدَم بر من فُسونی تا قبول طبعِ یار افتم

зи Ямани ишқ бар вазъи ҷаҳони хуши ханда ҳо кардам

ز یُمنِ عشق بر وضعِ جهانْ خوشْ خنده‌ها کردم

Мъозоллаҳ агар рӯзӣ ба дасти рӯзгори уфтам

مَعاذالله اگر روزی به دست روزگار افتم

Тазаллуми он қадар дорам миёни роҳати афтода

تَظَلُّم آن‌قَدَر دارم میانِ راهت افتاده

Ки чандонеи нигаҳи дорӣ ки ман бар як канори уфтам

که چندانی نگه داری که من بر یک کنار افتم

Аҷаб кайфиятӣ дорам баланд аз ишқ ва май тарсам

عَجَب کیفیّتی دارم بلند از عشق و می‌ترسم

Ки чун Мансур ҳарфӣ гӯям ва дар пои дори уфтам

که چون منصور حرفی گویم و در پای دار افتم

Дигар рӯз саворӣ омад ва шуд вақти он , ваҳшӣ !

دگر روز سواری آمد و شد وقت آن، وحشی!

Ки ӯ тозад ба саҳрои ман ба роҳи интизори уфтам

که او تازد به صحرا، من به راه انتظار افتم

Хониш
шморҳ 278 — ъндлӣб