Бадв Фарҳод гуфт ки эй сарви нўхиз
بدو فرهاد گفت که ای سرو نوخیز
Лабати ҷонпарвару зулфати диловез
لبت جان پرور و زلفت دلاویز
Хаёлати барда аз дили сабру тобам
خیالت برده از دل صبر و تابم
Нигоҳат карда сармасту харобам
نگاهت کرده سرمست و خرابم
Каманди зулфи мишкӣни ту домам
کمند زلف مشکین تو دامم
Шароби лаъли нўшинт ба ҷомам
شراب لعل نوشینت به جامم
Ба ҳар хизмат ки фармое баронам
به هر خدمت که فرمایی برآنم
Ба ҷон кӯшам дарин раҳ то тавонам
به جان کوشم درین ره تا توانم
На кӯҳи санг агар бошад зи пӯлод
نه کوه سنگ اگر باشد ز پولاد
Кунам бо неруии ишқаши зи бунёд
کنم با نیروی عشقش ز بنیاد
Чаҳ ҷои кӯҳ агар ҳиммати гуморам
چه جای کوه اگر همت گمارم
Агар дарёст гирд аз вай барорам
اگر دریاست گرد از وی برآرم
ШкФт аз гуфта Фарҳоди он моҳ
شکفت از گفته فرهاد آن ماه
Ба сони ғунча аз боди саҳаргоҳ
به سان غنچه از باد سحرگاه
Пас аз ин гуфтугӯу аҳду пайванд
پس از این گفتگو و عهد و پیوند
Қарор ин дод ширин шукр ханд
قرار این داد شیرین شکر خند
Ки то анҷоми кори он шӯхи танноз
که تا انجام کار آن شوخ طناز
Ба ҳар нзҳтгҳӣ ҷашнӣ кунад соз
به هر نزهتگهی جشنی کند ساز
Ба ҳар даштӣ кунад рӯзии ду манзил
به هر دشتی کند روزی دو منزل
Ба машғӯлии кушояди уқдаи дил
به مشغولی گشاید عقدهٔ دل
Расад чун кори он мшкў ба анҷом
رسد چون کار آن مشکو به انجام
Кашад рахти андари он он моҳи худком
کشد رخت اندر آن آن ماه خودکام
Вази он пас лаъли шукр бор багушӯд
وز آن پس لعل شکر بار بگشود
Ба сади ширинӣ ӯро кард бадрӯд
به سد شیرینی او را کرد بدرود
Ба мураккаби ҷусту гулгунро Аннан дод
به مرکب جست و گلگون را عنان داد
зи Фарҳоди он хабардорад ки ҷон дод
ز فرهاد آن خبردارد که جان داد
Бирафт аз бесутуни он сарви озод
برفت از بیستون آن سرو آزاد
На ӯ монад андари он манзил на Фарҳод
نه او ماند اندر آن منزل نه فرهاد