Чу нозил шуд ба фарши сабза чун гул
چو نازل شد به فرش سبزه چون گل
Ба гул ифшоанд зулфи ҳамчуи сунбул
به گل افشاند زلف همچو سنبل
Бар худ хонд он овораи дил ро
بر خود خواند آن آواره دل را
Барояш нарм кард он хораи дил ро
برایش نرم کرد آن خاره دل را
Нишондаши рӯ ба рӯйу пардаи бардошт
نشاندش رو به روی و پرده برداشت
Ки дидаш коми хушку чашм тар дошт
که دیدش کام خشک و چشم تر داشت
Ба соқӣ гуфт он миноӣ май кӯ
به ساقی گفت آن مینای می کو
Нишоти маҳфили ҷамшед ва кӣ кӯ
نشاط محفل جمشید و کی کو
Биор ва дар қадаҳи рез ва ба ман даҳ
بیار و در قدح ریز و به من ده
Гулами афсурдаи байни оби чамани даҳ
گلم افسرده بین آب چمن ده
Бути соқии қадаҳ аз бода пар кард
بت ساقی قدح از باده پر کرد
Ҳилоли ҷомро аз май чу хур кард
هلال جام را از می چو خور کرد
Бузади зону ба хизмати пеши ширин
بزد زانو به خدمت پیش شیرین
Ба дасташ дод бадарии пари зи парвин
به دستش داد بدری پر ز پروین
Гирифт аз даст ӯ ширини худ ком
گرفت از دست او شیرین خود کام
Ба шухии бӯса Эй зад бар лаби ҷом
به شوخی بوسهای زد بر لب جام
Пас онгаҳ гуфт бо Фарҳоди мискин
پس آنگه گفت با فرهاد مسکین
Ки бустони ин қадаҳ аз дасти ширин
که بستان این قدح از دست شیرین
Бихӯр аз дастами ин ҷони доруии ҳуш
بخور از دستم این جان داروی هوش
Ки ғамҳои куҳан созад фаромӯш
که غمهای کهن سازد فراموش
Агрхсрў ба шукр карда пайванд
اگرخسرو به شکر کرده پیوند
Ту ҳам аз лаъли ширин нӯш кун қанд
تو هم از لعل شیرین نوش کن قند
Ба кӯрии шукри қанди мукаррар
به کوری شکر قند مکرر
Мукаррари бхшмт аз лаб на шукр
مکرر بخشمت از لب نه شکر
Шукр дар коми хусрав хуш гуворост
شکر در کام خسرو خوش گواراست
Каз ин қанди мукаррар рӯза дорост
کز این قند مکرر روزه داراست
Гирифт аз дасти ширини ҷом ва нӯшед
گرفت از دست شیرین جام و نوشید
Чу хам аз оташи он об ҷӯшед
چو خم از آتش آن آب جوشید
Равон шуд гармӣ май дар димоғаш
روان شد گرمی می در دماغش
Фурӯзон шуд зи барқ май чароғаш
فروزان شد ز برق می چراغش
Хиради якбора берун шуд зи дасташ
خرد یکباره بیرون شد ز دستش
Ҳиҷоби афканди як сӯи чашми масташ
حجاب افکند یک سو چشم مستش
Паии назораи пардаи шарм шқ кард
پی نظاره پرده شرم شق کرد
зи тоб диданаши ширин арақ кард
ز تاب دیدنش شیرین عرق کرد
Ба барги гули нишастани хуй чу шабнам
به برگ گل نشستن خوی چو شبنم
Гулашро тозагии афзуд дар дам
گلش را تازگی افزود در دم
зи лаб чун ғунчаи хандони гашту бушковат
ز لب چون غنچه خندان گشت و بشکفت
Ба дилдории ёр меҳрбон гуфт
به دلداری یار مهربان گفت
Биё чун дил барам биншин замонӣ
بیا چون دل برم بنشین زمانی
Ки бархон висолами миҳмонӣ
که برخوان وصالم میهمانی
Назар бигушо ба рухсорӣ ки хусрав
نظر بگشا به رخساری که خسرو
Буд маҳрӯм аз он зи он дилбари нав
بود محروم از آن ز آن دلبر نو
зи коми қандам аз шукри гузашта
ز کام قندم از شکر گذشته
зи бадари номам аз ахтари гузашта
ز بدر نامم از اختر گذشته
зи армни кони қандамро талабкор
ز ارمن کان قندم را طلبکار
Шуд ва бо шукраш шуд гарми бозор
شد و با شکرش شد گرم بازار
Магаси табъии ёри блҳўси байн
مگس طبعی یار بلهوس بین
Ба ҳар ҷои шукр ӯро чун магаси байн
به هر جا شکر او را چون مگس بین
Чу Фарҳоди ин сухан ҳо кард аз ӯ гӯш
چو فرهاد این سخنها کرد از او گوش
Бирафт аз кор ӯ якбораи сарпӯш
برفت از کار او یکباره سرپوش
з ҷо бурҷаст ва дар паҳлуаш бинишаст
ز جا برجست و در پهلوش بنشست
Сухан бишунид аз ӯ хомӯш бинишаст
سخن بشنید از او خاموش بنشست
Саропо дида шуд то бинадаш рӯй
سراپا دیده شد تا بیندش روی
Шавад ҳамдам ба он лаъли сухангӯӣ
شود همدم به آن لعل سخنگوی
Вале аз шарми сар боло наме кард
ولی از شرم سر بالا نمیکرد
Назар бар он рух зебо наме кард
نظر بر آن رخ زیبا نمی کرد
Муроди хештан бо ӯ наме гуфт
مراد خویشتن با او نمیگفت
Сухан дар он рух некӯ наме гуфт
سخن در آن رخ نیکو نمیگفت
Чу ширин инчунинаш дид , дар дам
چو شیرین اینچنینش دید ، در دم
Ба соқӣ гуфт май дардаи дамодам
به ساقی گفت می درده دمادم
Дамӣ аз бодаи моро озмӯни ор
دمی از باده ما را آزمون آر
зи васвоси хирадмандии буруни ор
ز وسواس خردمندی برون آر
Ҳакямонро барӣн гуфт иттифоқ аст
حکیمان را براین گفت اتفاق است
Ки андари базми ҳушёрон нифоқ аст
که اندر بزم هشیاران نفاق است
зи ақл дурбин даврем азъиш
ز عقل دوربین دوریم ازعیش
зи дониш сахт маҳҷӯрем аз айш
ز دانش سخت مهجوریم از عیش
Хушо мастӣ ва сидқ ме прессатон
خوشا مستی و صدق می پرستان
Ки не солус донанд ва на дастон
که نی سالوس دانند و نه دستان
Шунид аз вай чу соқии ҷом пар кард
شنید از وی چو ساقی جام پر کرد
Қадаҳро пухтаи боз аз хом пар кард
قدح را پخته باز از خام پر کرد
Гирифт ва хӯрд дрдиҳои он ҷом
گرفت و خورد دردیهای آن جام
Насиб кӯҳкан омад саранҷом
نصیب کوهکن آمد سرانجام
Чу сури ёр ширин хӯрд Фарҳод
چو سور یار شیرین خورد فرهاد
зи қайди хуи бакулии гашти озод
ز قید خود بکلی گشت آزاد
На ёди хеш , не бегона монадаш
نه یاد خویش ، نی بیگانه ماندش
На сабри андари дил девона монадаш
نه صبر اندر دل دیوانه ماندش
Ба рӯй ёр ширин шуд ғзлхўон
به روی یار شیرین شد غزلخوان
Китоби ишқро багушӯд унвон
کتاب عشق را بگشود عنوان