Озодчҳр гуфт : шунидам ки рӯзии хусрави бтмошои саҳро берун рафт , боғбониро дид мардии пери солхурда , агрчи шаҳристони вуҷӯдаш рӯй бхробии ниҳода буд ва омад шуд хабари гирони хабир аз чаҳор дарвозаи бози афтодаи всии ду Асияи ҳама дар паҳлавии якдигар аз кори фурӯи мондаи локини шохи амлш дар хазони умру барги резони айши шукуфаи тоза берун меоварад ва бар лаби чашмаи ҳётши баъд аз рафтани оби троўоти хаттӣ сабз медамид дар ахрёти маротиби перии дарахти анҷӣр май нишонд . Хусрав гуфт : эй пер , ҷунунӣ ки аз шуъбаи шабоб дар мавсими сбии хезад , дар фасли мшиб оғоз наҳодӣ , вақт онаст ки бехи алойиқи азин мунаббати хабиси бркнӣу дарахт дар хуррами ободи биҳишти нишоне , чаҳ ҷои ин ҳавои фосид ва ҳавас ботиласт ? дарахтӣ ки ту имрӯзи нишоне , миваи он куҷо туоне хӯрд ? пер гуфт : дигарон нишонданд , мо хӯрдем ; мо бинишонем дигарон хуранд .
آزادچهر گفت : شنیدم که روزی خسرو بتماشایِ صحرا بیرون رفت، باغبانی را دید مردی پیر سالخورده، اگرچ شهرستانِ وجودش روی بخرابی نهاده بود و آمد شدِ خبر گیرانِ خبیر از چهار دروازه باز افتاده وسیدو آسیا همه در پهلویِ یکدیگر از کار فرو مانده لکن شاخِ املش در خزانِ عمر و برگریزانِ عیش شکوفهٔ تازه بیرون میآورد و بر لب چشمهٔ حیاتش بعد از رفتنِ آبِ طراوات خطّی سبز میدمید در اخریاتِ مراتبِ پیری درختِ انجیر مینشاند. خسرو گفت: ای پیر ، جنونی که از شعبهٔ شباب در موسمِ صبی خیزد، در فصلِ مشیب آغاز نهادی ، وقتِ آنست که بیخِ علایق ازین منبتِ خبیث برکنی و درخت در خرّم آباد بهشت نشانی، چه جایِ این هوایِ فاسد و هوسِ باطلست ؟ درختی که تو امروز نشانی، میوهٔ آن کجا توانی خورد ؟ پیر گفت : دیگران نشاندند ، ما خوردیم ؛ ما بنشانیم دیگران خورند.
Бкоштнд ва бихӯрадем ва коштем ва хуранд
بکاشتند و بخوردیم و کاشتیم و خورند
Чу бенгарӣ ҳамаи брзигрони икдгрим
چو بنگری همه برزیگرانِ یکدگریم
Хусрав аз вуфӯри донишу ҳузури ҷавоб ӯ шигифтӣ тамом намӯд . Гуфт : эй пер , агар турои чандон дарин бустони сарои кун ва фасод бигузоранд ки азин дарахти миваи бмни тӯҳфаи оре , хароҷи ин боғстони турои даҳум . Алқсаҳи аўмид бўФо расед , дарахт мива овараду тӯҳфаи бподшоаҳи бараду ваъдаи бонҷози пайваст . Ин фасона аз баҳр он гуфтам ки то онгаҳ ки меъмории ин мазраъаи бтўи мФўзст , нагузорӣ ки беиморат гузоранду хазонаро ҷузи бмдди риъӣ ки аз зироати хезад , маъмур доранд ва чун подшоҳи барин суннат ва сират раваду антҳоҷи сиблат ӯ барин ва тират бошад , лашкару атбоъро ҷузи атбоъи маросим ӯ кардан ҳеҷ чораи дигари натавонад буд . Пас раияти эмину малики ободону хазона мустағнӣ монаду подшоҳро харҷ аз кӣса мазлӯмон набояд кардану млўму мазмум дар афвоҳи халқи афтодани беди хотӣау бохарии ъотиаҳ ва аммо шаръ ки коргоҳи дигари бадв супурдаанд , ғами кори ин мазраъау харобӣу иморати он камтар хӯрд ва агар дунёу моФиҳо бадв диҳанд ё аз ӯ бустонанд , бгўшаҳи чашм ҳиммат бидон боз нанигарад , чизе наниҳад ки дигарон баранд ва захира нагузорад ки дигарон хуранду Мустафо , салавоти аллоҳу саломаи алайҳ , чунин мефармоед : алўили кули алўили лмни тарки аёлаи бихиру қадами алии рабаи башару ончи пеши ниҳоди андешау ғоят талаб ӯст , ҷузи лиззати боқӣ , аз мутолиаи олами қудсу баҳҷати доим аз қурби ҷавор ҷабарут нест . Зинҳор , эй шоҳи ӣнҷо ки нишаста , гӯши бахуди дор ки агар бар қалъаи мутамаккинӣ ки рбз ӯ бо қулла гардун муқобиласт , қозўраҳи даъватӣ ки саҳаргоҳ андозанд , боз надорад , вотқўои ман мҷониқи алзъФоءи тнзиру тҳзирист ки сокинони аъолии мъолиро мекунанд . Агар вақте шаҳбози салтанатро знгл нишот биҷунбаду шасти чнгл дар қабзаи камони шкорондоз сахт кунаду бтолъи фархундау тоири маймуни бшкоргоаҳи хиромад , бояд ки чоўўшони мавкиби азиматро васияти адхлўои мсокнкм фаромӯш набошад то бачагони хиради парандагонро дар байзаи малики ту ҳануз напарваридаанд вазири аҷнҳаҳи ҳимоят ту наболида , аз мўотии лашкару мухотии ҳашари поймол қаҳр нигараданду агрчи гӯшти он заъифи бечора ки ъсФўрсти модаи шаҳвату мадади қӯти таносул ниҳодаанд , аз барои қзоءи як шаҳвати хӯни эшон дар гардан гирифтану тшниъу тъиири лисони алъсоФир ки дар хабар саҳеҳ омадаст , ман қатли ъсФўрои ъбсои ҷоءи явми алқёмаҳу ?ла срох ъанд алърши иқўл ё раби сили ҳозои лами қтлнии ман ғайри мнФъаҳ дар девони арзи шунидан раво надораду бдонки ғайрати илоҳии худ бъкси ончнонк дар афвоҳ машҳураст , касрат тавонадро насиба заъифон мекунаду аъқоби мтғлбони қавии ҳоли бхнҷри уқубат бурӣда медорад .
خسرو از وفورِ دانش و حضورِ جوابِ او شگفتیِ تمام نمود. گفت : ای پیر، اگر ترا چندان درین بستانسرایِ کون و فساد بگذارند که ازین درخت میوهٔ بمن تحفه آری ، خراجِ این باغستان ترا دهم. القصّهٔ اومید بوفا رسید ، درخت میوه آورد و تحفه بپادشاه برد و وعده بانجاز پیوست. این فسانه از بهرِ آن گفتم که تا آنگه که معماریِ این مزرعه بتو مفوّضست، نگذاری که بی عمارت گذارند و خزانه را جز بمددِ ریعی که از زراعت خیزد، معمور دارند و چون پادشاه برین سنّت و سیرت رود و انتهاجِ سبیلِ او برین و تیرت باشد، لشکر و اتباع را جز اتّباعِ مراسمِ او کردن هیچ چارهٔ دیگر نتواند بود. پس رعیّت ایمن و ملک آبادان و خزانه مستغنی ماند و پادشاه را خرج از کیسهٔ مظلومان نباید کردن و ملوم و مذموم در افواهِ خلق افتادن بِیَدٍ خَاطِیَهٍٔ وَ بِاُخرَی عَاطِیَهٍٔ و امّا شرع که کارگاه دیگر بدو سپردهاند، غمِ کارِ این مزرعه و خرابی و عمارت آن کمتر خورد و اگر دنیا و مافیها بدو دهند یا از او بستانند، بگوشهٔ چشمِ همّت بدان باز ننگرد ، چیزی ننهد که دیگران برند و ذخیرهٔ نگذارد که دیگران خورند و مصطفی ، صَلَواتُ اللهِ وَ سَلَامُهُ عَلَیهِ ، چنین میفرماید : اَلوَیلُ کُلُّ الوَیلِ لِمَن تَرَکَ عِیَالَهُ بِخَیرٍ وَ قَدِمَ عَلَی رَبِّهِ بِشَرٍّ و آنچ پیش نهادِ اندیشه و غایتِ طلبِ اوست ، جز لذّتِ باقی، از مطالعهٔ عالمِ قدس و بهجتِ دایم از قربِ جوارِ جبروت نیست. زنهار، ای شاه اینجا که نشستهٔ ، گوش بخود دار که اگر بر قلعهٔ متمکّنی که ربضِ او با قلّهٔ گردون مقابلست، قازورهٔ دعوتی که سحرگاه اندازند، باز ندارد ، وَاتَّقُوا مِن مَجَانِیقِ الضُّعَفَاء تنذیر و تحذیریست که ساکنان اعالیِ معالی را میکنند . اگر وقتی شهبازِ سلطنت را زنگلِ نشاط بجنبد و شستِ چنگل در قبضهٔ کمانِ شکارانداز سخت کند و بطالعِ فرخنده و طایرِ میمون بشکارگاه خرامد، باید که چاووشانِ موکبِ عزیمت را وصیّتِ اُدخُلُوا مَسَاکِنُکُم فراموش نباشد تا بچگان خرد پرندگان را در بیضهٔ ملک تو هنوز نپروریدهاند وزیرِ اجنحهٔ حمایت تو نبالیده، از مواطیِ لشکر و مخاطیِ حشر پایمالِ قهر نگردند و اگرچ گوشتِ آن ضعیفِ بیچاره که عصفورست مادّهٔ شهوت و مددِ قوّتِ تناسل نهادهاند، از برای قضاءِ یک شهوت خونِ ایشان در گردن گرفتن و تشنیع و تعییرِ لسان العصافیر که در خبر صحیح آمدست، مَن قَتَلَ عُصفُوراً عَبَثا جَاءَ یَومَ القِیَامَهِ وَ لَهُ صُرَاخٌ عِندَ العَرشِ یَقُولُ یَا رَبِّ سَل هَذَا لِمَ قَتَلَنِی مِن غَیرِ مَنفَعَهٍٔ در دیوانِ عرض شنیدن روا ندارد و بدانک غیرتِ الهی خود بعکس آنچنانک در افواه مشهورست، کثرت تواند را نصیبهٔ ضعیفان میکند و اعقابِ متغلّبانِ قویحال بخنجرِ عقوبت بریده میدارد.
Бғоси алтири аксарҳо Фрохо
بُغَاثُ الطَّیرِ اَکثَرُهَا فِرَاخَا
Ваам алсқр мқлот назӯр
وَ اُمَّ الصَّقرِ مِقلاتٌ نَزُورُ
Ва подшоҳро аз ҳёзти панҷ хислат ғофил набояд буд то даҳ хсл боҳрк бозад , аз подшоҳон пеш нишинад , аввали онки ҷӯаду имсок бондозаҳ кунад , чунонк тарозуии адолат аз дасти надиҳад , дувуми онки ризоу хашмро ҳангому мақом нигаҳ дорад ва аз нуқсони вазъи алшиءи фии ғайри мавзеаи арзи худро сиёнат кунад , сиўми онки салоҳи хоси хеш бар салоҳи ом тарҷеҳ наниҳад , чаҳоруми онки лашкарро дасти истеъло бар раият кушода нигараданд , панҷуми онки дониши наздик ӯ аз ҳамаи чизеи матлӯб тар бошад ва ӯ доноро аз ҳама касе толибтар .
و پادشاه را از حیازتِ پنج خصلت غافل نباید بود تا ده خصل باهرک بازد، از پادشاهان پیش نشیند، اوّل آنک جود و امساک باندازه کند، چنانک ترازویِ عدالت از دست ندهد، دوم آنک رضا و خشم را هنگام و مقام نگه دارد و از نقصانِ وَضعِ الشَّیءِ فِی غَیرِ مَوضِعِهِ عرضِ خود را صیانت کند، سیوم آنک صلاحِ خاصِّ خویش بر صلاحِ عامّ ترجیح ننهد ، چهارم آنک لشکر را دستِ استعلا بر رعیّت گشاده نگرداند ، پنجم آنک دانش نزدیکِ او از همه چیزی مطلوبتر باشد و او دانا را از همه کسی طالبتر.
Чу дорад з ҳар донишии огаҳӣ
چو دارد ز هر دانشی آگهی
Бимонад ҷаҳондор бо Фрҳӣ
بماند جهاندار با فرّهی
Бдонгаҳ шавад тоҷи хусрави баланд
بدانگه شود تاجِ خسرو بلند
Ки доно буд назд ӯ арҷманд
که دانا بود نزدِ او ارجمند
зи ҳарчи он бкФ кардӣ аз рӯзгор
ز هرچ آن بکف کردی از روزگار
Сухан монаду бас дар ҷаҳони ёдгор
سخن ماند و بس در جهان یادگار
Чу пайваста гардад саросари сухан
چو پیوسته گردد سراسر سخن
Сухан нав кунад достони куҳан
سخن نو کند داستانِ کهن
Бадви нек бар мо ҳаме бугзарад
بدو نیک بر ما همی بگذرد
Набошад дижам ҳрк дорад хирад
نباشد دژم هرک دارد خرد
Равони ту донанда равшан кунод
روان تو داننده روشن کناد
Хиради пеши ҷони ту ҷавшан кунод
خرد پیشِ جان تو جوشن کناد
Чун сухани бад-ӣни мақтаи расонид , малик мисол дод то озодчҳраҳи зимоми тасарруфу тадаббур дар тадбири девону даргоҳ бо дасти кифоят хеш гирифту кафеи кафоти вараъоти малику давлат , вазиру дастури мамолик ӯро шинохтанд
چون سخن بدین مقطع رسانید، ملک مثال داد تا آزادچهره زمامِ تصرّف و تدبّر در تدبیرِ دیوان و درگاه با دستِ کفایتِ خویش گرفت و کافهٔ کفات ورعاتِ ملک و دولت، وزیر و دستورِ ممالک او را شناختند
Фёи ҳасан алзмон Фқди таҷаллӣ
فَیَا حُسنَ الزَّمَانِ فَقَد تَجَلَّی
Бҳзои алимну алоқболи садра
بِهَذَا الیُمنِ وَ الاِقبالِ صَدرُهُ
Фқли фии алнсли воФқаҳи нассоб
فَقُل فِی النَّصلِ وَافَقَهُ نِصَابٌ
Ва қул фии ?илҷу ашрқ манеҳ бадара
وَ قُل فِی الجَوِّ اَشرَقَ مِنهُ بَدرُهُ
Эзад , таъолӣ , сояи хдоигони олам , подшоҳ банӣ одам , атобаки аъзам , Музаффари алднёи волидайн , Ӯзбеки бен Муҳамади бен аилдгзро аз андешҳои хуб дар кори дайну давлати ммтъи дороад ки сари замираши раби ашрҳи лии садрии хонда буду дуоӣу аҷъли лии взирои ман аҳлии ҳрўн ахӣ карда то аз ҷулуси хоҷаи ҷаҳони рбиби алднёи волидайн , муайяни алисломи валмуслимин , абўоқосми ҳрўни бен алии вандони дарсадри вазорати ин дуои боҷобти пайваст ва он ақди ухувват ки дар азал бастаанд бо тафвизи ин вазорат аз мшимаҳи машйати қудрати ту амон омад , аллоҳами ашдд ба азраҳу ҳти анҳу визрау алҳмдллаҳи ҳмдои ксироу алслўаҳи алии Муҳамаду ?ала .
ایزد، تَعَالی ، سایهٔ خدایگانِ عالم، پادشاه بنیآدم، اتابکِ اعظم، مظفّر الدّنیا والدّین، ازبکبنمحمدبن ایلدگز را از اندیشهایِ خوب در کارِ دین و دولت ممتّع داراد که سرِّ ضمیرش رَبِّ اشرَح لِی صَدرِی خوانده بود و دعایِ وَ اجعَل لِی وَزِیرا مِن اَهلِی هرُونَ اَخِی کرده تا از جلوسِ خواجهٔ جهان ربیبالدّنیا والدّین ، معین الاسلام والمسلمین، ابواقاسم هرون بن علی وندان درصدرِ وزارت این دعا باجابت پیوست و آن عقدِ اخوّت که در ازل بستهاند با تفویضِ این وزارت از مشیمهٔ مشیّتِ قدرت تو امان آمد، اَللّهُمَّ اشدُد بِهِ اَزرَهُ وَ حُطَّ عَنهُ وِزرَهُ وَ الحَمدُللهِ حَمدا کَثِیرا وَ الصَّلوهِ عَلَی مُحَمَّدٍ وَ آلِهِ .