Шоҳо , ба пойгоҳи ту кайвон наме расад
شاها، به پایگاه تو کیوان نمیرسد
Дар соҳати ту гунбад гардон наме расад
در ساحت تو گنبد گردان نمیرسد
Ҷое расидае ба мъолӣу мартабат
جایی رسیدهای به معالی و مرتبت
Конҷо ба ҷаҳди фикрат инсон наме расад
کآنجا به جَهْدْ فکرت انسان نمیرسد
Он мерасад ба равзаи омол аз кафат
آن میرسد به روضهٔ آمال از کفت
Каз Абҳари навбаҳор ба бустон наме расад
کز ابهر نوبهار به بستان نمیرسد
Ҷузи амри ту ба машриқ ва мағриб наме равад
جز امر تو به مشرق و مغرب نمیرود
Ҷузи ҳукми ту ба тозӣ ва деҳқон наме расад
جز حکم تو به تازی و دهقان نمیرسد
Як хитта нест дар ҳамаи атрофи хоФқин
یک خطه نیست در همه اطراف خافقین
Конҷои зи боргоҳи ту фармон наме расад
کآنجا ز بارگاه تو فرمان نمیرسد
Бо тӯлу арзи малики ту имрӯз дар ҷаҳон
با طول و عرض ملک تو امروز در جهان
Касро ҳадиси малик сулаймон наме расад
کس را حدیث ملک سلیمان نمیرسد
Роҳӣ ки аз рўоиҳ хилқат расад ба халқ
راحی که از روایح خلقت رسد به خلق
Дар боғу роғ аз гул ва райҳон наме расад
در باغ و راغ از گل و ریحان نمیرسد
Як лаҳзаи он гуҳар ки ту бахше ба сол ҳо
یک لحظه آن گهر که تو بخشی به سالها
Андари самими баҳру дил кон наме расад
اندر صمیم بحر و دل کان نمیرسد
Он чист аз масолеҳи аҳволи мард вау зан
آن چیست از مصالح احوال مرد و و زن
Каз ҷоҳи ту ба зумра имон намерасад ?
کز جاه تو به زمرِهٔ ایمان نمیرسد؟
Дар саҳни шарқу ғарби зи борони адли ту
در صحن شرق و غرب ز باران عدل تو
Гирди ситам ба ҳеҷ мусулмон наме расад
گرد ستم به هیچ مسلمان نمیرسد
Ноед ҳамеи падеди зи арқони мураккабот
ناید همی پدید ز ارکان مرکبات
То амри нофизи ту ба арқон наме расад
تا امر نافذ تو به ارکان نمیرسد
Кас рӯй сӯии садри рафеъат наме наад
کس روی سوی صدر رفیعت نمینهد
Каз садри ту ба рифъат имкон наме расад
کز صدر تو به رفعت امکان نمیرسد
Дар ҷони бадсиголи ту аз рашки малики ту
در جان بدسگال تو از رشک ملک تو
Дардии сет беқарор ва ба дармон наме расад
دردیست بیقرار و به درمان نمیرسد
Майдон разм ҷӯяду огоҳи не , аз онк
میدان رزم جوید و آگاه نی، از آنک
Бо давлати ту кор ба майдон наме расад
با دولت تو کار به میدان نمیرسد
Ту ранҷи бардае ва ба роҳати расида Эй
تو رنج بردهای و به راحت رسیدهای
Мардум ба ҳеҷ коми дил осмон наме расад
مردم به هیچ کام دل آسمان نمیرسد
Фарёд аз ин ҷаҳон ! ки хирадмандро азу
فریاد از این جهان! که خردمند را ازو
Баҳра ба ҷузи нўоиб ва аҳзон наме расад
بهره به جز نوایب و احزان نمیرسد
Ҷҳол дар тнъму арбоби фазл ро
جهال در تنعم و ارباب فضل را
Бе садҳазори ғуссаи яке нон наме расад
بیصدهزار غصه یکی نان نمیرسد
Доно бимонад дар ғами тадбири неку бад
دانا بماند در غم تدبیر نیک و بد
Як зарраи ғам ба хотир нодон наме расад
یک ذره غم به خاطر نادان نمیرسد
Ҷоҳил ба маснади андару олами бурун дар
جاهل به مسند اندر و عالم برون در
Ҷӯяд ба ҳилаи роҳ ва ба дарбон наме расад
جوید به حیله راه و به دربان نمیرسد
Озурда шуд ба ҳирси дирами ҷони олимон
آزرده شد به حرص درم جان عالمان
Венаи ҳирси мурдаи рег ба поён наме расад
وین حرص مرده ریگ به پایان نمیرسد
Ин ҳолҳо ба ҳикмат яздон муқаддараст
این حالها به حکمت یزدان مقدرست
Мардум ба сари ҳикмат яздон наме расад
مردم به سر حکمت یزدان نمیرسد
Миннати худоиро , ки маро дар паноҳи ту
منت خدای را ، که مرا در پناه تو
Осеби ҳодиса ба дил ва ҷон наме расад
آسیب حادثه به دل و جان نمیرسد
То домани ҷалол ту бигрифтаам , маро
تا دامن جلال تو بگرفتهام، مرا
Дасти бало ба риш ва гиребон наме расад
دست بلا به ریش و گریبان نمیرسد
Як рӯз нест каз ту ҳазорон ҳазор навъ
یک روز نیست کز تو هزاران هزار نوع
Дар ҳақи ман каромат ва эҳсон наме расад
در حق من کرامت و احسان نمیرسد
Афзӯнӣ ӣӣ гирифт ба ту ҳоли ман чунонк
افزونییی گرفت به تو حال من چنانک
Аз гашти рӯзгор ба нуқсон наме расад
از گشت روزگار به نقصان نمیرسد
Онам , ки чун бар асб фасоҳат шавам савор
آنم، که چون بر اسب فصاحت شوم سوار
Дар гирди ман фасоҳат субҳон наме расад
در گرد من فصاحت سحبان نمیرسد
Аз назми ман ба хоки хуросони хазона ҳост
از نظم من به خاک خراسان خزانههاست
Гар шахси ман ба хок хуросон наме расад
گر شخص من به خاک خراسان نمیرسد
То ҷони одамӣ ба камолӣ ки мумкинаст
تا جان آدمی به کمالی که ممکنست
Дар илми ҷуз ба қӯт бурҳон наме расад
در علم جز به قوت برهان نمیرسد
Бодии ту дар Наими фаровон , ки хасм ро
بادی تو در نعیم فراوان، که خصم را
Аз чархи ҷузи балоӣ фаровон наме расад
از چرخ جز بلای فراوان نمیرسد
Бигзор моҳи рӯза ба тоъат , ки душманат
بگذار ماهِ روزه به طاعت، که دشمنت
Гар бугзарад зи рӯза ба қурбон наме расад
گر بگذرد ز روزه به قربان نمیرسد