Гирам ба нола кардам овораи посбон ро
گیرم به ناله کردم آواره پاسبان را
Кӯи ҷуръатӣ ки бӯсами он хоки остон ро
کو جراتی که بوسم آن خاک آستان را
эй навҷавони мронм аз дар ба ҷурми перӣ
ای نوجوان مرانم از در به جرم پیری
Пеши сгонти афкани ин мушти устихон ро
پیش سگانت افکن این مشت استخوان را
Бар ҳеҷ дил наҷунбад меҳраши зи кӣнаи ҷўӣӣ
بر هیچ دل نجنبد مهرش ز کینه جوئی
Хуй ту карда таълим бе раҳмии осмон ро
خوی تو کرده تعلیم بی رحمی آسمان را
Пайваста дорад имрӯзи зоҳиди назар ба миҳроб
پیوسته دارد امروز زاهد نظر به محراب
Моно ки дида бошад он тоқи абрувон ро
مانا که دیده باشد آن طاق ابروان را
Аз ошёни сӯии доми байнами чунонкии бенанд
از آشیان سوی دام بینم چنانکه بینند
Мурғони нави гирифтор аз доми ошён ро
مرغان نو گرفتار از دام آشیان را
Бо онкӣ хок кардем сар дар раҳ батон нест
با آنکه خاک کردیم سر در ره بتان نیست
Ҳақӣ ба гардани мо ҷузи теғи имтиҳон ро
حقی به گردن ما جز تیغ امتحان را
Аз бими онкӣ дар дил раҳм оядаш зи фарёд
از بیم آنکه در دل رحم آیدش ز فریاد
зи оҳ ва фиғон хамӯшӣ омухтами забон ро
ز آه و فغان خموشی آموختم زبان را
Аз заъф бар ғубории ҳасрат барам ки дорад
از ضعف بر غباری حسرت برم که دارد
Неруӣ рафтан аз пай , гомии ду корвон ро
نیروی رفتن از پی، گامی دو کاروان را
Рӯй ман ва азин пас хок дар харобот
روی من و ازین پس خاک در خرابات
То чанд қиблаи созами миҳроби осмон ро
تا چند قبله سازم محراب آسمان را
Яғмои зи сбҳаҳу ҷоми тарафии нбстм эй кош
یغما ز سبحه و جام طرفی نبستم ای کاش
Ҳам бугсаланд инро , ҳам башикананд он ро
هم بگسلند این را، هم بشکنند آن را