Гарчи донам раҳи ишқи ту ба сар ме наравад
گرچه دانم ره عشق تو به سر مینرود
Май рӯм зон ки дилами роҳ дигар ме наравад
میروم زان که دلم راه دگر مینرود
Дилам аз субҳи шаби ҳиҷр чунон шуд навмед
دلم از صبح شب هجر چنان شد نومید
Каш ба ғифлат ба забони ном саҳар ме наравад
کِش به غفلت به زبان نام سحر مینرود
Гуфтаам аз лаби ширини ту рӯзии суханӣ
گفتهام از لب شیرین تو روزی سخنی
Ҳамчунон аз даҳанами таъм шукр ме наравад
همچنان از دهنم طعم شکر مینرود
Диҷла дар аҳди сиришками варақ ном бишуст
دجله در عهد سرشکم ورق نام بشُست
Баҳр чун мавҷ занад ном шимур ме наравад
بحر چون موج زند نام شمر مینرود
Гоҳ гоҳе худӣ эй нола ба гӯшаш бирасон
گاهگاهی خودی ای ناله به گوشش برسان
Гарчи ҳаргиз ба ту умед асар ме наравад
گرچه هرگز به تو امّید اثر مینرود
Дидаи пробм аз онаст ки як чашм задан
دیده پُرآبم از آن است که یک چشم زدن
Офтоби Рахш аз пеш назар ме наравад
آفتاب رخش از پیش نظر مینرود
Чашм мегаван турои фитнаи нхсбди ҳаргиз
چشم میگون ترا فتنه نخسبد هرگز
Мастӣ аз хонаи хумор ба дар ме наравад
مستی از خانه خمار به در مینرود
Чаҳ фусун кард Зулайхо ки маи канъонӣ
چه فسون کرد زلیخا که مه کنعانی
Дар замираш ба ғалати ёд падар ме наравад
در ضمیرش به غلط یاد پدر مینرود
Ёрӣ аз сӯй касон хоҳам ва гуяд ёқӯб ,
یاری از سویِ کَسان خواهم و گوید یعقوب،
Ин гумонеаст ки дар ҳақ писар ме наравад
این گمانی است که در حق پسر مینرود
Зоҳид ар пояи яғмоат на аз ҷои Марв
زاهد ار پایه یغمات نه از جای مرو
Ба мақомӣ ки масеҳо шуда хар ме наравад
به مقامی که مسیحا شده خر مینرود