Намӯд ҳамчуи Абулҳавли рӯ ба миллати рӯс

نمود همچو ابوالهول رو به ملت روس

Балои қаҳту ғло бо қиёфаи манҳус

بلای قحط و غلا با قیافه منحوس

Фитод ҳайкали сангини диўпикри қаҳт

فتاد هیکل سنگین دیوپیکر قحط

Ба рӯй қалби даҳоқини рӯс чун кобӯс

به روی قلب دهاقین روس چون کابوس

Магар ки дев сипедаст ин балои сиёҳ

مگر که دیو سپید است این بلای سیاه

Ки карда Рӯсияро мубтало чу кикоўс

که کرده روسیه را مبتلا چو کیکاوس

Яке ба соҳил Волга бибин ки нолаи зор

یکی به ساحل ولگا ببین که ناله زار

Фишори гуруснагиро чаҳ сон кунад маҳсус

فشار گرسنگی را چه سان کند محسوس

Ба сони ҷӯҷаи зи фиқдони дона бе ҷони байн

به سان جوجه ز فقدان دانه بی‌جان بین

Тзрўи Кебеки хиромӣ ки буд чун тоўс

تذرو کبک خرامی که بود چون طاوس

Куҷо равост шавад , зарди ранг чун хайрӣ

کجا رواست شود، زرد رنگ چون خیری

Изори сурхи накӯёни ҳамчуи тоҷи хурӯс

عذار سرخ نکویان همچو تاج خروس

Яке зи касрати сахтии зи умри худ безор

یکی ز کثرت سختی ز عمر خود بیزار

Яке зи шиддати қаҳтии зи зиндагии маъюс

یکی ز شدت قحطی ز زندگی مأیوس

Дар орзӯии яке донаи шом то ба саҳар

در آرزوی یکی دانه شام تا به سحر

Буд ба сунбулаи чашми гуруснагони мأнўс

بود به سنبله چشم گرسنگان مأنوس

Кунун ки миллат рӯсаст бо мҷоъаҳи дўчор

کنون که ملت روس است با مجاعه دوچار

Гуҳ Таҳамтанӣаст эй сулолаи Сӣрӯс

گه تهمتنی است ای سلاله سیروس

Ба дастгирии қавмии намои сарафрозӣ

به دستگیری قومی نما سرافرازی

Ки мекунанд аҷалро ба ҷону дили побӯс

که می‌کنند اجل را به جان و دل پابوس

Ҷӯии зи гандуми ин сарзамин тавонад дод

جوی ز گندم این سرزمین تواند داد

зи чанги марги раҳои ҷони сад ҳазор нуфус

ز چنگ مرگ رها جان صد هزار نفوس

Навишт хомаи хунин « фаррухӣ » ин байт

نوشت خامه خونین «فرخی» این بیت

Ба рӯй сафҳаи тӯфон ба садҳазори афсӯс

به روی صفحه طوفان به صدهزار افسوس

Ҷануби баҳр хазар шуд зи ашки чашмаи чашм

جنوب بحر خزر شد ز اشک چشمه چشم

Барои соҳил равад наво чу уқёнус

برای ساحل رود نوا چو اقیانوس