Ҳар онкии сахт ба ман лоф ошноӣ зад
هر آنکه سخت به من لافِ آشنایی زد
Ба рӯзи сахтии ман дами з бевафое зад
به روزِ سختیِ من دم ز بیوفایی زد
Ба бенавое худ шуд дилам чу неи сӯрох
به بینوایی خود شد دلم چو نی سوراخ
Дамӣ ки не ба наво дод бенавое зад
دمی که نی به نوا داد بینوایی زد
Дукони писта бемағз баста шуд он рӯз
دُکّانِ پستهٔ بیمغز بسته شد آن روز
Ки бо даҳони ту лабханд худнамое зад
که با دهانِ تو لبخند خودنمایی زد
Даридаи чашмӣ наргис бибин ки чашми туро
دریدهچشمیِ نرگس ببین که چشمِ ترا
Бидиду бози сар аз гули з беҳаёе зад
بدید و باز سر از گل ز بیحیایی زد
Фидои ҳиммати он раҳравам ки бар сари хор
فدای همّتِ آن رهروم که بر سرِ خار
Ҳазор афсари гул бо бараҳна пое зад
هزار افسرِ گل با برهنهپایی زد
зи шӯхи порсии он шайхи порсо чаҳ шунид
ز شوخِ پارسی آن شیخِ پارسا چه شنید
Ки пушти по ба мақомот порсое зад
که پشتِ پا به مقامات پارسایی زد
Мақоми шона ба сар шуд аз онкии сар то пой
مقام شانه به سر شد از آنکه سر تا پای
Ҳамеша даст ба кори гиреҳ гушойӣ зад
همیشه دست به کارِ گرهگشایی زد
Ба рӯзгори ризо ҳар киро ки ман дидам
به روزگارِ رضا هر که را که من دیدم
Ҳазор мартабаи фарёд норизоӣ зад
هزار مرتبه فریاد نارضایی زد
Ба нохудои ин киштии шикастаи мноз
به ناخداییِ این کشتیِ شکسته مناز
Ки нохудои натавонади дам аз худоӣ зад
که ناخدا نتواند دم از خدایی زد
Ба ман ғизол ғазал хон ман аз он шуд ром
به من غزالِ غزلخوان من از آن شد رام
Ки фаррухии раҳ ӯ бо ғазал сарое зад
که فرخی رهِ او با غزلسرایی زد