зи Албурзи бузург дар шимоли рай
ز البرز بزرگ در شمال ری
Ҳар шаби дами дилкаш шимол ояд
هر شب دم دلکش شمال آید
Аз боди шимоли мшкбў ҳар дам
از باد شمال مشکبو هر دم
Ҷони рақсаду дил ба ваҷд ва ҳол ояд
جان رقصد و دل به وجد و حالآید
Вази атри хуши гулу раёҳинаш
وز عطر خوش گل و ریاحینش
Офоти сумумро завол ояд
آفات سموم را زوال آید
Барфаши бгдозд ва ба шаҳри андар
برفش بگدازد و به شهر اندر
Баси чашмаи дилкаш зулол ояд
بس چشمه دلکش زلال آید
Имшаби зи насим , сахти хушнӯдам
امشب ز نسیم، سخت خشنودم
Каз сӯии шимол бемалол ояд
کز سوی شمال بیملال آید
Ҷунбад ба ҷануб аз шимоли осон
جنبد به جنوب از شمال آسان
Ва озод ба базми аҳл ҳол ояд
و آزاد به بزم اهل حال آید
Дар маҳфили мо ҳавои ҷонбхшш
در محفل ما هوای جانبخشش
Бо рӯҳ ба феъл вонФъол ояд
با روح به فعل وانفعال آید
Ҳамроҳи шимоли ҷонФзои зии мо
همراه شمال جانفزا زی ما
Пайвастаи қўоФл камол ояд
پیوسته قوافل کمال آید
Ман рашк барам бадв чу аз шухӣ
من رشک برم بدو چو از شوخی
Бо турраи ёр дар ҷидол ояд
با طرهٔ یار در جدال آید
Гоҳе сафи чапи азуи брошўбд
گاهی صف چپ ازو برآشوبد
Гуҳи дрсФи рост ихтилол ояд
گه درصف راست اختلال آید
Ошӯб фитад ба зулфи ёр аммо
آشوب فتد به زلف یار اما
Ин фитнаи муаййид ҷамол ояд
این فتنه مؤید جمال آید
Борӣ накунам ниҳон ки сӯии мо
باری نکنم نهان که سوی ما
Ҳар файз ки ояд азшмол ояд
هر فیض که آید ازشمال آید