То дори малик зон сӯии олами бсохтм

تا دار ملک زان سوی عالم بساختم

Худро зи коиноти мусаллами бсохтм

خود را ز کاینات مسلم بساختم

Бар чанбари ҷаҳони гузарам буд азин сабаб

بر چنبر جهان گذرم بود ازین سبب

Тан чун расан назору пар аз хами бсохтм

تن چون رسن نزار و پر از خم بساختم

Дидам ки захми ҳодисаи марҳам пазир нест

دیدم که زخم حادثه مرهم پذیر نیست

Бо захм бе ҳимояти марҳами бсохтм

با زخم بی حمایت مرهم بساختم

Дар дили шикастами орзӯии ҷом май чунонк

در دل شکستم آرزوی جام می چنانک

Сад ҷоми ҷам ба табъи бикдми бсохтм

صد جام جم به طبع بیکدم بساختم

Бар ман ҷаҳон чу ҳалқа хотам шудаст аз онк

بر من جهان چو حلقه خاتم شدست از آنک

Мулкии буруни зи мамлакати ҷами бсохтм

ملکی برون ز مملکت جم بساختم

Дидам ки малики фақри ман аз малик ҷам бааст

دیدم که ملک فقر من از ملک جم بهست

Зар вом кардам аз руху хотами бсохтм

زر وام کردم از رخ و خاتم بساختم

Баҳри масофи ҳодиса аз субҳу моҳи нав

بهر مصاف حادثه از صبح و ماه نو

Бо наъли зари ҷнибти адҳами бсохтм

با نعل زر جنیبت ادهم بساختم

Ҳамдам набӯд мардумаки чашмро аз он

همدم نبود مردمک چشم را از آن

Дар дида ҷой кардаму ҳамдами бсохтм

در دیده جای کردم و همدم بساختم

Дар чашм ман бибин ки зи баҳр сарир ӯст

در چشم من ببین که ز بهر سریر اوست

Ин оҷу обнӯс ки дар ҳам бсохтм

این عاج و آبنوس که در هم بساختم

Ман ҳамчуи чанг бо дили саргашта чун рубоб

من همچو چنگ با دل سرگشته چون رباب

Ҳам зер рост кардам ва ҳам Бами бсохтм

هم زیر راست کردم و هم بم بساختم

Аз бас навой ғам ки ману дил баҳам задем

از بس نوای غم که من و دل بهم زدیم

Сад захма беш сӯхт вале ҳам бсохтм

صد زخمه بیش سوخت ولی هم بساختم

Доруии дилхушӣ ба адами бози рафта ба

داروی دلخوشی به عدم باز رفته به

Акнӯн ки ман муфарраҳӣ аз ғами бсохтм

اکنون که من مفرحی از غم بساختم

Зеро ки ҳамчуи гунбади гул бебақо намӯд

زیرا که همچو گنبد گل بی بقا نمود

Корӣ ки зери гунбади аъзами бсохтм

کاری که زیر گنبد اعظم بساختم

Чандон сршги дидаи фишурдам ба дам казу

چندان سرشگ دیده فشردم به دم کزو

Ақдӣ барои гардани олами бсохтм

عقدی برای گردن عالم بساختم

Чун бо се шаш мҷири зи айём беш монад

چون با سه شش مجیر ز ایام بیش ماند

Дар бар ду як ниҳодам ва бо кам бсохтм

در بر دو یک نهادم و با کم بساختم