эй садри шоҳи ртбти қутби фалаки ҷалолат
ای صدر شاه رتبت قطب فلک جلالت
Коёми тӯҳфаи ту фатҳ ва зафар фиристад
کایام تحفه تو فتح و ظفر فرستد
Бас муддатӣ намонад кини чори тоқи азрақ
بس مدتی نماند کین چار طاق ازرق
Ҳар дам ба боргоҳати нзлӣ дигар фиристад
هر دم به بارگاهت نزلی دگر فرستد
Гардун ба маҷлиси ту аз баҳри шамъу суфра
گردون به مجلس تو از بهر شمع و سفره
Ҳам ҷурм ма фишонд ҳам қурс хур фиристад
هم جرم مه فشاند هم قرص خور فرستد
Охир расед рӯзӣ каз баҳри бандагонат
آخر رسید روزی کز بهر بندگانت
Ҳўро абир сояд ҷавзо камар фиристад
حورا عبیر ساید جوزا کمر فرستد
Аз баҳри тири эшон як раҳ ишоратӣ кун
از بهر تیر ایشان یک ره اشارتی کن
То сидраи шохи резади симурғ пар фиристад
تا سدره شاخ ریزد سیمرغ پر فرستد
Не шуд мҷири ъмдо то дар саноат чун не
نی شد مجیر عمدا تا در ثنات چون نی
Аз дил наво сарояд вази лаб шукр фиристад
از دل نوا سراید وز لب شکر فرستد
Заҳмати надод агар на май хост то ба хизмат
زحمت نداد اگر نه می خواست تا به خدمت
Ҷонии шикастаи бастаи пешат бадар фиристад
جانی شکسته بسته پیشت بدر فرستد
Ема чаҳ Зуҳра дорад симурғи ъзлтии кӯ
ایمه چه زهره دارد سیمرغ عزلتی کو
Пеши ҳазор исои як сам хар фиристад
پیش هزار عیسی یک سم خر فرستد
Доне ки кист бандаи онкў ба чун ту хоҷа
دانی که کیست بنده آنکو به چون تو خواجه
ё ҷон хушк бахшад ё шеър тар фиристад
یا جان خشک بخشد یا شعر تر فرستد
Дар зар гирифт мадҳати лекин на аз паии онк
در زر گرفت مدحت لیکن نه از پی آنک
ё халқ мадҳ гуяд ё хоҷа зар фиристад
یا خلق مدح گوید یا خواجه زر فرستد
ӯ буд ва ним ҷонӣ бо хотирӣ ки аз вай
او بود و نیم جانی با خاطری که از وی
Ҳар лаҳзае ба базмати ганҷ гуҳар фиристад
هر لحظه ای به بزمت گنج گهر فرستد
Зон тамаъ дар фиристод ин қитъа то бихонӣ
زان طمع در فرستاد این قطعه تا بخوانی
Ҷон монад ва гар бихоҳӣ он низ дар фиристад
جان ماند و گر بخواهی آن نیز در فرستد