Қисм ба воҳби ақлӣ ки пеши илми қадим

قسم به واهب عقلی که پیش علم قدیم

Якеаст чашмаи хуршеду сояи анқоаш

یکی است چشمه خورشید و سایه عنقاش

Замин шавад зи яке амр ӯ чу сояи чоҳ

زمین شود ز یکی امر او چو سایه چاه

Дар обгуни қафаси ин офтоби оташи пош

در آبگون قفس این آفتاب آتش پاش

Ки ҳаст тамаъи ҷамоли офтоби таъсирӣ

که هست طمع جمال آفتاب تأثیری

Ки пас рӯйаст кам аз сояи гунбади хзрош

که پس روی است کم از سایه گنبد خضراش

Маро чу сояи сияҳ рӯй кард ва хона нишин

مرا چو سایه سیه روی کرد و خانه نشین

Ба назми насри сифати табъи офтоби осоаш

به نظم نثر صفت طبع آفتاب آساش

Фузуни зи зарраи зи лафзи офтоб май пошад

فزون ز ذره ز لفظ آفتاب می‌پاشد

Магар чу соя дар афтод файзи ҳақ ба қафоаш

مگر چو سایه درافتاد فیض حق به قفاش

Ҷаҳон ба дасти забони офтоби вори кушод

جهان به دست زبان آفتاب‌وار گشاد

Аз он чу сояи фалак бӯса медиҳад бар пош

از آن چو سایه فلک بوسه می‌دهد بر پاش

Ба зери бори ғами ҳамчуи сояи зери қадам

به زیر بار غم همچو سایه زیر قدم

Зршги онкии гузашти офтоб бар болоаш

ز رشگ آنکه گذشت آفتاب بر بالاش

Ҷаҳони давои зи дамаши барад агар на бгрФтмӣ

جهان دوا ز دمش برد اگر نه بگرفتمی

Басони сояу хуршеди диқу истисқоаш

بسان سایه و خورشید دق و استسقاش

Шикасти гавҳари дарёу боди оби нишонд

شکست گوهر دریا و باد آب نشاند

Ба шеър чун гуҳару оби табъ чун дарёаш

به شعر چون گهر و آب طبع چون دریاش

Ба лутфгар яди Байзои бадви намояди субҳ

به لطف گر ید بیضا بدو نماید صبح

Ба шакл шом гирифтаст бе гумони савдоаш

به شکل شام گرفته‌ست بی گمان سوداش

Бенонашро гуҳари шбчроғ чун хонам ?

بنانش را گهر شبچراغ چون خوانم؟

Ки ҳаст машъалаи рӯзи лофи зани зи зёш

که هست مشعله روز لاف‌زن ز ضیاش

Сипеди муҳраи ситш чунон дамид ҷаҳон

سپید مهره صیتش چنان دمید جهان

Ки рахна хост шуд ин сабзи ҳуққа аз овоаш

که رخنه خواست شد این سبز حقه از آواش

Ба чашми мардум аз он гашти ҳамчуи мардуми чашм

به چشم مردم از آن گشت همچو مردم چشم

Ки дар савод тавон ёфтан яди Байзоаш

که در سواد توان یافتن ید بیضاش

Дилами зи уқдаи ғам чун миёни байти кушод

دلم ز عقده غم چون میان بیت گشاد

Чу бастам аз зибри дили қасидаи ғрош

چو بستم از زبر دل قصیده غراش

Сабки бизоъатам ва кам баҳо ба шакли нисор

سبک بضاعتم و کم بها به شکل نثار

Агар нисор насозам зи умр беш баҳоаш

اگر نثار نسازم ز عمر بیش بهاش

Хаташ чу зулфи савоб нигин шудаст ба ҳасан

خطش چو زلف صواب نگین شده‌ست به حسن

Бихонад нақши хато ҳар ки хонд нақши хатоаш

بخواند نقش خطا هرکه خواند نقش خطاش

Басо ки тайра ҳўро диҳад рақиби биҳишт

بسا که طیره حورا دهد رقیب بهشت

Ба калак сар зада монанди турраи ҳўрош

به کلک سر زده مانند طره حوراش

Агар на бӯс ҳалоласту ршги айни ҳалол

اگر نه بوس حلالست و رشگ عین حلال

Чаро чу дид дилами гашт дар замони шайдоаш ?

چرا چو دید دلم گشت در زمان شیداش؟

На лоиқаст ба ман мадҳ ӯ ки дар хур нест

نه لایق است به من مدح او که درخور نیست

Кулоҳи гӯшаи наргис ба чашми нобӣноаш

کلاه گوشه نرگس به چشم نابیناش

Нисор ӯ чу маро шуд алоҷи ҷони пайванд

نثار او چو مرا شد علاج جان پیوند

Дуоаш гӯям ва донам ки воҷибаст дуоаш

دعاش گویم و دانم که واجب است دعاش

Сияҳи сипедии даврони қасидааш бодо

سیه سپیدی دوران قصیده اش بادا

Ки ӯ буд ба ҳамаи ҳоли мақтау мабдааш

که او بود به همه حال مقطع و مبداش