Марои зи дидау дил давр кард ёр чаро
مرا ز دیده و دل دور کرد یار چرا
з даст дод марои зуди оннигор чаро
ز دست داد مرا زود آن نگار چرا
Ба ихтиёр набудам ҷудоӣ аз бар дӯст
به اختیار نبودم جدایی از بر دوست
зи мо канора гузид ӯ ба ихтиёр чаро
ز ما کناره گزید او به اختیار چرا
Марои зи чашм аноят фиканда якбора
مرا ز چشم عنایت فکنده یکباره
Нигор маҳваши ман ҳамчуи рӯзгор чаро
نگار مهوش من همچو روزگار چرا
Даруни кунҷи дилами сар ӯ наоне буд
درون کنج دلم سرّ او نهانی بود
Миёни халқ ҷаҳон кард ошкор чаро
میان خلق جهان کرد آشکار چرا
Ғамаш ки бар дили ман ҳамчу кӯҳ алвандаст
غمش که بر دل من همچو کوه الوندست
Надошт ғами зи ман хастаи рӯзгор чаро
نداشت غم ز من خسته روزگار چرا
Назар ба ҳол ҷаҳонӣ накарда киштии боз
نظر به حال جهانی نکرده، کُشتی باز
Маро ба шева ӣ он чашми пари хумор чаро
مرا به شیوهٔ آن چشم پر خمار چرا
Ба рангу буии ту олами гирифтаи ошӯбӣ
به رنگ و بوی تو عالم گرفته آشوبی
Насиби мо з гулистон шудаст хор чаро
نصیب ما ز گلستان شدهست خار چرا