Шабӣ чу зулфи сиёҳати дароз ва бе поён

شبی چو زلف سیاهت دراز و بی پایان

Савдои меҳри рухи хуби ту дар он пинҳон

سواد مهر رخ خوب تو در آن پنهان

Дамид субҳи саодати зи матлаъи умед

دمید صبح سعادت ز مطلع امّید

Баёз рӯй чу хуршед ёр дод нишон

بیاض روی چو خورشید یار داد نشان

Ба пеши меҳри Рахши ҳамчуи зарра Эй будам

به پیش مهر رخش همچو ذرّه‌ای بودم

Рабӯдам ва ба фалаки баради меҳр ӯ зи ҷаҳон

ربودم و به فلک برد مهر او ز جهان

Биё ва гарна дили ман зи ғам ба ҷон ояд

بیا وگرنه دل من ز غم به جان آید

Ки сабр аз рахт эй дӯст беш азин натавон

که صبر از رخت ای دوست بیش ازین نتوان

Ба васл худ бинавозам шабӣ ки май доне

به وصل خود بنوازم شبی که می‌دانی

Ба ҷон расед марои дили зи шиддати ҳиҷрон

به جان رسید مرا دل ز شدّت هجران

Баҳри тариқ ки кардам насиҳати дили хеш

به هر طریق که کردم نصیحت دل خویش

Чаҳ чора чун ки дили ман наме баради фармон

چه چاره چون که دل من نمی‌بَرد فرمان

Туе табиби дили ман ба ғӯри дардаши рас

تویی طبیب دل من به غور دردش رس

Ки несташ биҷуз аз рӯзи васли ту дармон

که نیستش بجز از روز وصل تو درمان