Биё ки бе ту надорад дили ман асбобӣ
بیا که بی تو ندارد دل من اسبابی
Ба ҳар ҷиҳат ки назар мекунам ба ҳар бобӣ
به هر جهت که نظر میکنم به هر بابی
Ба чашми шӯхи ту савганд мехӯрам шабҳо
به چشم شوخ تو سوگند میخورم شبها
Наомадаст ба чашмами зи ишқи ту хобӣ
نیامدهست به چشمم ز عشق تو خوابی
Лаби ту чашма нӯшаст ва ман чунин ташна
لب تو چشمه نوش است و من چنین تشنه
Ба ҷони ташнаи Фрўҳли зи лаъли худ обӣ
به جان تشنه فروهل ز لعل خود آبی
Сари ду зулфи ту тоби дили ман мискин
سر دو زلف تو تاب دل من مسکین
Мада ба зулфи пари ошӯби хештани тобӣ
مده به زلف پر آشوب خویشتن تابی
Ки беш аз ин набарди дили зи мардуми ҳӯшёр
که بیش از این نبرد دل ز مردم هوشیار
Чаро ки баҳри ғамат [ро ] набӯдаи поёбӣ
چرا که بحر غمت [را] نبوده پایابی
Шаби ду зулфи ту торик ва раҳ наме донам
شب دو زلف تو تاریک و ره نمیدانم
Магар бароядам аз рӯй дӯсти маҳтобӣ
مگر برآیدم از روی دوست مهتابی
Марои ту мардумаки дида ӣ ҷаҳони бинӣ
مرا تو مردمک دیدهٔ جهان بینی
Ки дидаи саҷдаи ду касро дўрни миҳробӣ
که دیده سجده دو کس را دورن محرابی
Ба дарди дили зи табибам талаб кардам
به درد دل ز طبیبم طلب کردم
Марои зи лаъл ту фармуд ҷоми ҷлобӣ
مرا ز لعل تو فرمود جام جّلابی
Ҷавоб дод ки дар сабр ком ме ёбанд
جواب داد که در صبر کام مییابند
Ба ҷони ту ки маро нест беш азин тобӣ
به جان تو که مرا نیست بیش ازین تابی