Нигор ман ба сари аҳди хеш муҳкам нест
نگار من به سر عهد خویش محکم نیست
Маро ба ғайри ғами дӯсти ҳеҷ ҳамдам нест
مرا به غیر غم دوست هیچ همدم نیست
Паёми ман ки расонад ба ёри мҳргсл
پیام من که رساند به یار مهرگسل
Ки дар ҷаҳони биҷуз аз боди субҳ муҳаррам нест
که در جهان بجز از باد صبح محرم نیست
Бигӯ ба ёр ки аз ғам ба лаби расидами ҷон
بگو به یار که از غم به لب رسیدم جان
Биё ки ҷузи дили гармӣу оҳ сардам нест
بیا که جز دل گرمی و آه سردم نیست
Маро ки буд яке дил ба дасти афкандам
مرا که بود یکی دل به دست افکندم
Ба дарди ишқи ту моро дилӣ ба ҳрдм нест
به درد عشق تو ما را دلی به هر دم نیست
Ба ғайри дарди фироқат ки бар дилам саъб аст
به غیر درد فراقت که بر دلم صعب است
Ба ҷони ту ки ҷузи ин дарди ҳеҷ дардам нест
به جان تو که جز این درد هیچ دردم نیست
Ки шарҳи он рух чун моҳ метавонад дод
که شرح آن رخ چون ماه میتواند داد
Магар парӣаст ту гӯйии зи насл одам нест
مگر پریست تو گویی ز نسل آدم نیست
зи оташи ғам ӯ хоки мо ба бод бирафт
ز آتش غم او خاک ما به باد برفت
Ба дасти дил чаҳ тавон кард ғайр бодам нест
به دست دل چه توان کرد غیر بادم نیست