Пуштами зи ғами бори фироқи ту дўтои гашт
پشتم ز غم بار فراق تو دوتا گشت
Умеди шаби васли тавъами ҷумлаи ҳбои гашт
امّید شب وصل تواَم جمله هَبا گشت
Ҳаргиз ба сари кӯй нигорӣ нарасидам
هرگز به سر کوی نگاری نرسیدم
То мурғи дили хаста ӣ мо гирди ҳавои гашт
تا مرغ دل خستهٔ ما گرد هوا گشت
Якто шудам андари ғами ишқи ту нигоро
یکتا شدم اندر غم عشق تو نگارا
Бар рӯй ту то зулфи самани соти ду то гашт
بر روی تو تا زلف سمنسات دو تا گشت
Он қади длороӣ ки сабр аз дили мо барад
آن قد دلارای که صبر از دل ما برد
Болоаш нагӯед ки он айни балои гашт
بالاش نگویید که آن عین بلا گشت
Умеди вафо буд маро аз карами дӯст
امّید وفا بود مرا از کرم دوست
Гӯйӣ ки ҳамаи аҳду вафои ту ҷафои гашт
گویی که همه عهد و وفای تو جفا گشت
Аз ёр наомад сӯии ин хастаи паёмӣ
از یار نیامد سوی این خسته پیامی
То муҳаррами рози дили мо боди сабои гашт
تا محرم راز دل ما باد صبا گشت
Гӯйӣ ки бибаред зи мо он бут бе меҳр
گویی که ببرّید ز ما آن بت بی مهر
Бгзошти вафои як сарви ҳамдасти ҷафои гашт
بگذاشت وفا یکسر و همدست جفا گشت
Ҳар тир ки дар кеши дилам буд бияфканад
هر تیر که در کیش دلم بود بیفکند
Бар тир чаҳ аз дасти дилам чунки хатои гашт
بر تیر چه از دست دلم چونکه خطا گشت
Охир бидиҳ имрӯзи муроди дили тангам
آخر بده امروز مراد دل تنگم
Чун коми дилат аз ду ҷаҳони ҷумлаи равои гашт
چون کام دلت از دو جهان جمله روا گشت