эй дил чаҳ кунам чу ёри баргашт

ای دل چه کنم چو یار برگشت

Вази аҳди худ оннигор баргашт

وز عهد خود آن نگار برگشت

Дар даст намонад нақшу рангӣ

در دست نماند نقش و رنگی

Ков низ чу рӯзгори баргашт

کاو نیز چو روزگار برگشت

Ғам буд марои насиб аз он ёр

غم بود مرا نصیب از آن یار

Зон рӯй ки ғмгсори баргашт

زان روی که غمگسار برگشت

Бар хок раҳаш нишаста будам

بر خاک رهش نشسته بودم

Чун дидаи зи раҳи гузори баргашт

چون دیده ز ره گذار برگشت

Ҳаркас ки кунад ба гули тъшқ

هرکس که کند به گل تعشّق

Дидӣ ки зи нӯки хори баргашт

دیدی که ز نوک خار برگشت

Барбаста ҳазор дил ба фитрок

بربسته هزار دل به فتراک

Он ёр чу аз шикори баргашт

آن یار چو از شکار برگشت

Онҷо ки вафо ва аҳд бошад

آنجا که وفا و عهد باشد

Дидӣ ки касе зи ёри баргашт

دیدی که کسی ز یار برگشت