Биё ки мамлакат дидаам хаёл гирифт
بیا که مملکت دیدهام خیال گرفت
зи суҳбати шаби ҳиҷрони маро малол гирифт
ز صحبت شب هجران مرا ملال گرفت
Аз он ду чашми ҷаҳони хираи гашт аз рӯят
از آن دو چشم جهان خیره گشت از رویت
Ки офтоби ҷаҳони нур аз он ҷамол гирифт
که آفتاب جهان نور از آن جمال گرفت
Нигор шӯхи ман андар фироқ ме кӯшад
نگار شوخ من اندر فراق میکوشد
Аз он ҷиҳати шаби васлаши чунин завол рафт
از آن جهت شب وصلش چنین زوال رفت
Маи ду ҳафта чу тоқи ду абрувон ту дид
مه دو هفته چو طاق دو ابروان تو دید
зи ғами бкости чунин шева ӣ ҳилол гирифт
ز غم بکاست چنین شیوهٔ هلال گرفت
Висол чун мутасаввир намешавад чаҳ кунам
وصال چون متصوّر نمیشود چه کنم
Дилам бирафт ва аз он доман хаёл гирифт
دلم برفت و از آن دامن خیال گرفت
Назар бидон рух чун моҳ кард мардуми чашм
نظر بدان رخ چون ماه کرد مردم چشم
Ду дида дар сари ман зон сабаб камол гирифт
دو دیده در سر من زان سبب کمال گرفت
Ҳасуди ҷоҳи ту чун парда ӣ мухолиф зад
حسود جاه تو چون پردهٔ مخالف زد
зи чархи байни ту ки чун авд гӯшмол гирифт
ز چرخ بین تو که چون عود گوشمال گرفت
Гирифт моҳи висолаш ба толеъи миррӣх
گرفت ماه وصالش به طالع مریخ
Нашуд гушӯда ҳамоно ки дар ва бол гирифт
نشد گشوده همانا که در وبال گرفت
Сиришки хӯни зи ду дида ба доманам бадвед
سرشک خون ز دو دیده به دامنم بدوید
зи ҳиҷру дасти умедам ба рӯй ҳол гирифт
ز هجر و دست امیدم به روی حال گرفت
Сипедаи дам чу бидидам ҷамоли ҷони орот
سپیده دم چو بدیدم جمال جان آرات
Сабӯҳи талъати рӯяти ҷаҳон ба фол гирифт
صبوح طلعت رویت جهان به فال گرفت
Парида буд марои мурғи дили зи синау боз
پریده بود مرا مرغ دل ز سینه و باز
Ба дому дона ӣ он ҳар ду зулф ва хол гирифт
به دام و دانهٔ آن هر دو زلف و خال گرفت