Дил рафту боз бо сари зулфаш қарор дод

دل رفت و باز با سر زلفش قرار داد

Ҷони ситами кашам ба сари зулф ёр дод

جان ستم کشم به سر زلف یار داد

Дастам нигор кард ба хӯни ду дидаи боз

دستم نگار کرد به خون دو دیده باز

То ихтиёри хеш ба даст нигор дод

تا اختیار خویش به دست نگار داد

Бехи муҳаббаташ ки нишондам ба боғи ҷон

بیخ محبّتش که نشاندم به باغ جان

Прўрдмш ба хӯни дил онгаҳ чаҳ бор дод

پروردمش به خون دل آنگه چه بار داد

Дар фасли навбаҳори чаман гул баровард

در فصل نوبهار چمن گل برآورد

Моро ба ҷои гули фалаки сифла хор дод

ما را به جای گل فلک سفله خار داد

Чарх ва фалак нагашт ба коми дилами дамӣ

چرخ و فلک نگشت به کام دلم دمی

Гӯйӣ касе ба хӯни маниш зинҳор дод

گویی کسی به خون منش زینهار داد

Додам надоду даст ба бедод баргушод

دادم نداد و دست به بیداد برگشاد

То кӣ занами зи дасти ғам дӯстдор дод

تا کی زنم ز دست غم دوستدار داد

Он дилпазир аз сари меҳру вафои мо

آن دلپذیر از سر مهر و وفای ما

Рафту маро ба дасти ғам рӯзгор дод

رفت و مرا به دست غم روزگار داد

Барадии дилам ба чашму шикастяши ҳамчуи зулф

بردی دلم به چشم و شکستیش همچو زلف

Бо ман вафоу аҳди ту зини сон қарор дод

با من وفا و عهد تو زینسان قرار داد

Рафтам ба пои сарв ки то сари нуҳум ба пош

رفتم به پای سرو که تا سر نهم به پاش

Аз ман ситади равон ва ба даст чанор дод

از من ستد روان و به دست چنار داد

Аз бомдоди боди сабои рангу буии гул

از بامداد باد صبا رنگ و بوی گل

Бастад ба дасти лутф ва бидон глъзор дод

بستد به دست لطف و بدان گلعذار داد