Фарёду фиғон дар ғами ҳиҷрони ту фарёд
فریاد و فغان در غم هجران تو فریاد
То чанд кунӣ бар ман длсўхтаҳи бедод
تا چند کنی بر من دلسوخته بیداد
То кӣ ғами ҳиҷрони бунаӣ бар дили ришам
تا کی غم هجران بنهی بر دل ریشم
То кӣ накунӣ як шбк аз васли худами ёд
تا کی نکنی یک شبک از وصل خودم یاد
Як дам назанам бе ту ту доне ки чунин аст
یک دم نزنم بی تو تو دانی که چنین است
Бо онкӣ наёрӣ зи ман хастаи дамии ёд
با آنکه نیاری ز من خسته دمی یاد
Аз оташи ҳиҷрони ту хокистар маҳзем
از آتش هجران تو خاکستر محضیم
Аз мо ки расонад ба ту пайғоми магари бод
از ما که رساند به تو پیغام مگر باد
Ин ашк ки май ронмш аз рух бар мардум
این اشک که میرانمش از رخ بر مردم
Бо онкии ҷигар гӯша бидам аз назар афтод
با آنکه جگر گوشه بُدم از نظر افتاد
Гар рост бипурсӣ сухани меҳру муҳаббат
گر راست بپرسی سخن مهر و محبّت
Бо мот набӯд эй бути бгзидаҳи зи бунёд
با مات نبود ای بت بگزیده ز بنیاد
Аз моҳи рухони ҷумлаи ҷафои гашти мусаллам
از ماه رخان جمله جفا گشت مسلّم
Гӯйӣ ба ҷаҳони одати ин расм ки биниҳод
گویی به جهان عادت این رسم که بنهاد