зи ҷафои фалаки сифла мусулмонон дод

ز جفای فلک سفله مسلمانان داد

Ки басии доғи бад-ӣни хаста ӣ дили риши ниҳод

که بسی داغ بدین خستهٔ دل ریش نهاد

Кард бедоди басӣ бо ман мискин ба ғалат

کرد بیداد بسی با من مسکین به غلط

зи сари лутфи марои як нафасӣ дод надод

ز سر لطف مرا یک نفسی داد نداد

Гоҳ шодӣ диҳаду гоҳи ғами оради борӣ

گاه شادی دهد و گاه غم آرد باری

Ман бечора нагаштам ба ҷаҳони як дами шод

من بیچاره نگشتم به جهان یک دم شاد

эй фалаки лутф таваҳҳум нест вазин беш марез

ای فلک لطف تو هم نیست وزین بیش مریز

Бар сару домани худ хӯни дили мардуми род

بر سر و دامن خود خون دل مردم راد

Ки расонади зи ман хастаи паёмии сӯии дӯст

که رساند ز من خسته پیامی سوی دوست

Муҳаррамӣ нест маро дар ду ҷаҳони ғайр аз бод

محرمی نیست مرا در دو جهان غیر از باد

То ба гӯши ту расонад ки чаҳ бар мо гузарад

تا به گوش تو رساند که چه بر ما گذرد

Дар ғамаш , то кунад аз банди фироқами озод

در غمش، تا کند از بند فراقم آزاد

Ман ғами дидаи зи ҳиҷрони ту зорами ёро

من غم دیده ز هجران تو زارم یارا

Бӯ ки аз васли ту гирдами ман мискини дилшод

بو که از وصل تو گردم من مسکین دلشاد