Агарчӣ дарди дилам ошкор натавон кард
اگرچه درد دلم آشکار نتوان کرد
Ба қавли муддаӣони тарк ёр натавон кард
به قول مدّعیان ترک یار نتوان کرد
Сабо бирав зи ман хаста бо нигор бигӯ
صبا برو ز من خسته با نگار بگو
Ки беш аз ин ба фироқ интизор натавон кард
که بیش از این به فراق انتظار نتوان کرد
Биёи биё ки барорем як нафаси боҳам
بیا بیا که برآریم یک نفس باهم
Ки эътимоди бад-ӣн рӯзгор натавон кард
که اعتماد بدین روزگار نتوان کرد
зи дарди ишқ ту сиррӣаст дар даруни дилам
ز درد عشق تو سرّیست در درون دلم
Ки назд муддаӣон ошкор натавон кард
که نزد مدّعیان آشکار نتوان کرد
Магӯ ки бо гули рӯяти хуши аўФтодстм
مگو که با گل رویت خوش اوفتادهستم
Яқин бидон ки қаноат ба хор натавон кард
یقین بدان که قناعت به خار نتوان کرد
Бигӯ зи ман ки туро ошиқон рӯй басӣаст
بگو ز من که تو را عاشقان روی بسیست
Ба ғоятӣ ки қиёс ва шумор натавон кард
به غایتی که قیاس و شمار نتوان کرد
Биёу бода лаълат бидиҳ ки ҷуз ба лабат
بیا و باده لعلت بده که جز به لبت
Ба ҷони дӯст ки дафъ хумор натавон кард
به جان دوست که دفع خمار نتوان کرد
Бидон ду чашми хатоеу холи ҳиндӯят
بدان دو چشم خطایی و خال هندویت
Ба ғайри ҷону ҷаҳонӣ шикор натавон кард
به غیر جان و جهانی شکار نتوان کرد