Намози мо ба чаҳ арзад агар ниёз набошад
نماز ما به چه ارزد اگر نیاز نباشد
Ман он ниёз наёрам ки дар намоз набошад
من آن نیاز نیارم که در نماز نباشد
Кадоми дил ки ба ёди ту дар шаби ғами ҳиҷрон
کدام دل که به یاد تو در شب غم هجران
Ба бута ӣ ғами ишқи ту дар гудоз набошад
به بوتهٔ غم عشق تو در گداز نباشد
магӯӣ сари дили худ ба ҳаркасии зирок
مگوی سرّ دل خود به هر کسی زیراک
Даруни хотири ҳаркаси маҳал роз набошад
درون خاطر هر کس محلّ راز نباشد
На дил буд ки зи ёди ту як замон холӣаст
نه دل بود که ز یاد تو یک زمان خالیست
На дидае ки ба рух чун маи ту боз набошад
نه دیدهای که به رخ چون مه تو باز نباشد
Дилами кабӯтари ваҳшӣ ҳаво гирифт ва бирафт
دلم کبوتر وحشی هوا گرفت و برفت
Чаҳ чораи сайри кабӯтар ба сон боз набошад
چه چاره سیر کبوتر بهسان باز نباشد
Агарчӣ каъбаи мақсӯдро тариқ махуфаст
اگرچه کعبه مقصود را طریق مخوفست
Ба пои толиби мақсӯди раҳ дароз набошад
به پای طالب مقصود ره دراز نباشد
Ҳазор сарви сеӣ дар миёни боғи даройад
هزار سرو سهی در میان باغ درآید
Яке ба қомати раъноӣ сарфароз набошад
یکی به قامت رعنای سرفراز نباشد
Чу хастае зи раҳ давр мерасад зинҳор
چو خستهای ز ره دور میرسد زنهار
Макун ту ноз ки он лаҳзаи вақт ноз бошад
مکن تو ناز که آن لحظه وقت ناز باشد
Агарчӣ нест туро майли хотирӣ ба ҷаҳонӣ
اگرچه نیست تو را میل خاطری به جهانی
Ҳақиқатаст марои ишқи ту муҷоз набошад
حقیقتست مرا عشق تو مجاز نباشد