Хуши он шабам ки з рӯй ту моҳтобӣ буд
خوش آن شبم که ز روی تو ماهتابی بود
Умеди субҳи висолам ба офтобӣ буд
امید صبح وصالم به آفتابی بود
Хуши он замон ки ба рӯй ту баргушодам чашм
خوش آن زمان که به روی تو برگشادم چشم
Хуши он дамӣ ки ба васлати марои шитобӣ буд
خوش آن دمی که به وصلت مرا شتابی بود
Ҷамол рӯй туро ман нишон наёрам дод
جمال روی تو را من نشان نیارم داد
Чаҳ ҷои ин магари он худ хаёлу хобӣ буд
چه جای این مگر آن خود خیال و خوابی بود
Ба роҳи бодия ӣ шавқу каъбаи мақсӯд
به راه بادیهٔ شوق و کعبه مقصود
Зулоли васл ту ҷустем ва худ саробӣ буд
زلال وصل تو جستیم و خود سرابی بود
Табиби дард маро диду шарҳ ҳол нагуфт
طبیب درد مرا دید و شرح حال نگفت
Азизи ман чаҳ шуд охири туро ҷавобӣ буд
عزیز من چه شد آخر تو را جوابی بود
Бирехт хӯн дилам гуфтамаш ваболат нест
بریخت خون دلم گفتمش وبالت نیست
Бигуфт хӯни чунин рехтани савобӣ буд
بگفت خون چنین ریختن ثوابی بود
Ба сарзаниши ҳамаи ёрон муҳаррамам гӯйанд
به سرزنش همه یاران محرمم گویند
Ҷаҳон ҳамеша туро равнақӣу обӣ буд
جهان همیشه تو را رونقی و آبی بود
Чаҳ шуд ки дил ба ғам рӯзгор биниҳодӣ
چه شد که دل به غم روزگار بنهادی
Ҷавоб дод ки он мавсими шабобӣ буд
جواب داد که آن موسم شبابی بود