Гарм чаҳ доъия ӣ ишқи он нигор набӯд
گرم چه داعیهٔ عشق آن نگار نبود
Ба гирди кӯии висолаши маро гузор набӯд
به گرد کوی وصالش مرا گذار نبود
Канора кардам аз он остони зи бими рақиб
کناره کردم از آن آستان ز بیم رقیب
Ба ихтиёри худам гарчи бахт ёр набӯд
به اختیار خودم گرچه بخت یار نبود
зи ғайби доман васлаш фитод дар дастам
ز غیب دامن وصلش فتاد در دستم
Вале чаҳ суд дариғо ки пойдор набӯд
ولی چه سود دریغا که پایدار نبود
Ба боғи айши гули орзӯи ҳамеи чидам
به باغ عیش گل آرزو همی چیدم
Ба коми хеши замонӣ ки бим хор набӯд
به کام خویش زمانی که بیم خار نبود
Ба бӯстон висолаш навой мурғи дилам
به بوستان وصالش نوای مرغ دلم
зи шавқи он рух чун гул кам аз ҳазор набӯд
ز شوق آن رخ چون گل کم از هزار نبود
Ба ҳар чаман ки расидами гулӣ талаб кардам
به هر چمن که رسیدم گلی طلب کردم
Ба ранги рӯйиш ва дар ҳеҷ лола зор набӯд
به رنگ رویش و در هیچ لاله زار نبود
Ҳазор саҳар ки бинмуд наргиси раъно
هزار سِحر که بنمود نرگس رعنا
Яке ба шева ӣ он чашми пар хумор набӯд
یکی به شیوهٔ آن چشم پر خمار نبود
Ҳазор нолаи бкрдми зи дард ва як сари мӯе
هزار ناله بکردم ز درد و یک سر مویی
Ба ҳеҷ дар дили сангини он нигор набӯд
به هیچ در دل سنگین آن نگار نبود
Ҳазор шарбати заҳр аз ғам ҷаҳон хӯрдам
هزار شربت زهر از غم جهان خوردم
Вале ба талхии андӯҳи ҳиҷр ёр набӯд
ولی به تلخی اندوه هجر یار نبود