Умед буд ки ёр аз сар вафо наравад

امید بود که یار از سر وفا نرود

Ба ҷони хастаи дилон беш азин ҷафо наравад

به جان خسته دلان بیش ازین جفا نرود

Агарчӣ лаъли лабати хӯни мо ниҳон май рехт

اگرچه لعل لبت خون ما نهان می‌ریخت

зи чашми масти ту бояд ки бар мулло наравад

ز چشم مست تو باید که بر ملا نرود

Дилам бирафт ба яғмои он ду чашм ва ду зулф

دلم برفت به یغمای آن دو چشم و دو زلف

Чу масту кофар ва бедайн буд чаро наравад

چو مست و کافر و بی دین بُوَد چرا نرود

Чунин ки зулфи ту бар рӯй чун ма ошуфтаст

چنین که زلف تو بر روی چون مه آشفته‌ست

Насими машк тторӣ бигӯ куҷо наравад

نسیم مشک تتاری بگو کجا نرود

Гумон набӯд дилами ков вафо кунад бо ман

گمان نبود دلم کاو وفا کند با من

Азизи ман назари дӯстон хато наравад

عزیز من نظر دوستان خطا نرود

Саломи ман ки расонад бидоннигор шабӣ

سلام من که رساند بدان نگار شبی

Чу дар ҳарими висолаши биҷуз сабо наравад

چو در حریم وصالش بجز صبا نرود

Сабои замини адабро бабўс ва хизмат кун

صبا زمین ادب را ببوس و خدمت کن

Биҷуз дуоат бигӯ бар забон мо наравад

بجز دعات بگو بر زبان ما نرود

Марӣзи ишқ ту шуд дар ҷаҳони дилами борӣ

مریض عشق تو شد در جهان دلم باری

Яқини табиби дили ман ки бедаво наравад

یقین طبیب دل من که بی دوا نرود

Агар ба лутфи навозии дили ҳазини маро

اگر به لطف نوازی دل حزین مرا

Гадои зи даргаи лутфи ту подшо наравад

گدا ز درگه لطف تو پادشا نرود