Ақл бо ишқ бар наме ояд

عقل با عشق برنمی‌آید

Шаби ҳиҷрон ба сар наме ояд

شب هجران به سر نمی‌آید

Гиряи чашми моу оҳи саҳар

گریه چشم ما و آه سحر

Чаҳ кунам коргар наме ояд

چه کنم کارگر نمی‌آید

Бо вуҷӯди рухнигор маро

با وجود رخ نگار مرا

Дар назари моҳ ва хур наме ояд

در نظر ماه و خَور نمی‌آید

Қомати ёр сарв озодаст

قامت یار سرو آزادست

Ҳечгуна ба бар наме ояд

هیچگونه به بر نمی‌آید

Дасти умеди мо ба сарви қадат

دست امّید ما به سرو قدت

Аз чаҳ рӯ дар камар наме ояд

از چه رو در کمر نمی‌آید

Чаҳ сабаби сарви қоматаш ёрб

چه سبب سرو قامتش یارب

Сӯии мо дар гузар наме ояд

سوی ما در گذر نمی‌آید

Дар фироқи рахти марои ҷузи ашк

در فراق رخت مرا جز اشک

Ҳеҷ дар дар назар наме ояд

هیچ دُر در نظر نمی‌آید

Дилбар аз ман канора май талабад

دلبر از من کناره می‌طلبد

Ба миёни нек дар наме ояд

به میان نیک درنمی‌آید

Ба хаёлами биҷузи ҷамоли рахт

به خیالم بجز جمال رخت

Ҳеҷ сӯрат дигар наме ояд

هیچ صورت دگر نمی‌آید

Ҷуз сабо нест пайки мо ба ҷаҳон

جز صبا نیست پیک ما به جهان

Дайр шуд то хабар наме ояд

دیر شد تا خبر نمی‌آید

Аз дили хастаи баси салому паём

از دل خسته بس سلام و پیام

намефиристам магар наме ояд

می‌فرستم مگر نمی‌آید

Ҷузи ҷамол ҷаҳон фурӯз тавъам

جز جمال جهان فروز تواَم

Дар хаёл башар наме ояд

در خیال بشر نمی‌آید

Чаҳ тавон кард коннигор шабӣ

چه توان کرد کان نگار شبی

Аз дар васл дар наме ояд

از در وصل درنمی‌آید

Дар ҷаҳони байн ки насли одам ро

در جهان بین که نسل آدم را

Чаҳ қазоҳо ба сар наме ояд

چه قضاها به سر نمی‌آید