Оқибати дарди ман хаста ба поён нарасед

عاقبت درد من خسته به پایان نرسید

Сар саргаштаам аз васл ба сомон нарасед

سر سرگشته‌ام از وصل به سامان نرسید

Поймоли шаби ҳиҷрон шуда чун мӯри заъиф

پایمال شب هجران شده چون مور ضعیف

Шамае қисса ӣ дардам ба сулаймон нарасед

شمّه‌ای قصهٔ دردم به سلیمان نرسید

Дардам аз ҳад шуду ҷуз нола надорам ҳамдам

دردم از حد شد و جز ناله ندارم همدم

Ки бигӯям дмкии дард ба дармон нарасед

که بگویم دمکی درد به درمان نرسید

Рӯзи васл ту нашуд рӯзии он хастаи ҷигар

روز وصل تو نشد روزی آن خسته جگر

Шаби ҳиҷрони ту эй дӯст ба поён нарасед

شب هجران تو ای دوست به پایان نرسید

Дар фироқи рухи зебои ту эй ҷони ҷаҳон

در فراق رخ زیبای تو ای جان جهان

Чаҳ кунам дасти дилами ҷуз ба гиребон нарасед

چه کنم دست دلم جز به گریبان نرسید

Ҷон бидодам ба ғам ишқ мапиндор чунин

جان بدادم به غم عشق مپندار چنین

Давлати васли ту эй ҷон ба ман осон нарасед

دولت وصل تو ای جان به من آسان نرسید

Дар вафои ту дил аз даст бидодам ҷоно

در وفای تو دل از دست بدادم جانا

Аҳди бастии ту басӣ лек ба паймон нарасед

عهد بستی تو بسی لیک به پیمان نرسید