Сабо бо гул бигӯ аз ман дигар боз

صبا با گل بگو از من دگر باز

Ба бустон омадӣ бо барг ва бо соз

به بستان آمدی با برگ و با ساز

Рабӯдии дил ба дастон аз бар мо

ربودی دل به دستان از بر ما

Даромад булбули хуши гӯ ба овоз

درآمد بلبل خوش گو به آواز

Ба ишқ рӯй гули сарв аз чаманҳо

به عشق روی گل سرو از چمنها

Хиромеданд борӣ аз сари ноз

خرامیدند باری از سر ناز

Ки то гул сарв бинад сарв дар гул

که تا گل سرو بیند سرو در گِل

Кунад наргиси санои хеши оғоз

کند نرگس ثنای خویش آغاز

Гули хуши бӯ ба сарв ноз ме гуфт

گل خوش بو به سرو ناز می‌گفت

Чаҳ бошад каз дирами оеи шабии боз

چه باشد کز درم آیی شبی باز

Ҷавобаш дод сарви бӯстонӣ

جوابش داد سرو بوستانی

Ки гуфтам бо сабо бисёр азин роз

که گفتم با صبا بسیار ازین راز

Ки то оварад бӯяти сӯии бустон

که تا آورد بویت سوی بستان

Шудам аз буии ҷони бахшати сарафроз

شدم از بوی جان بخشت سرافراز

зи ишқи рангу бӯят дар чаманҳо

ز عشق رنگ و بویت در چمنها

Даромад булбули ҷонам ба парвоз

درآمد بلبل جانم به پرواز

Гулу сарви чаманро нест равнақ

گل و سرو چمن را نیست رونق

Дарин бустони ҷаҳон бо хор май соз

درین بستان جهان با خار می‌ساز