Он сарв ки меравад чунин рост
آن سرو که میرود چنین راست
Ёрб зи кадом чашма бархест
یارب ز کدام چشمه برخاست
Аз оби ду чашми мо баромад
از آب دو چشم ما برآمد
Зон майли дилаши ҳамаи сӯии мост
زان میل دلش همه سوی ماست
Қиддӣсат ба эътидоли дилкаш
قدّیست به اعتدال دلکش
Кон айн балост он на болост
کان عین بلاست آن نه بالاست
Гӯйанд қадаш ба сарв монад
گویند قدش به سرو ماند
Гӯям ки крои маҷолу ёрост
گویم که کرا مجال و یاراست
Ман сарв надидаам ба рафтор
من سرو ندیدهام به رفتار
Ман моҳ надидаам ки гуёст
من ماه ندیدهام که گویاست
эй дили ҳазар аз ду чашми масташ
ای دل حذر از دو چشم مستش
намекун ки аз ӯ ба шаҳр ғавғост
میکن که از او به شهر غوغاست
Он зулфи сиёҳи анбарин буи
آن زلف سیاه عنبرین بوی
Шӯрида ба рӯй ӯ ва шайдост
شوریده به روی او و شیداست
Дар ҳасрати гавҳари висолаш
در حسرت گوهر وصالش
Дар ҳиҷри ду дидаам чу дарёст
در هجر دو دیدهام چو دریاست
Гуфтам ки дило бсбр , мштоб
گفتم که دلا بصبر، مشتاب
Короам , давоӣ ин таманност
کارام، دوای این تمنّاست
Бар ёди лабаши шабӣ ба рӯзи ор
بر یاد لبش شبی به روز آر
Гуфто чаҳ кунам ки ӯ на пайдост
گفتا چه کنم که او نه پیداست
Дили бози маро ба домии афканд
دل باز مرا به دامی افکند
Аз мост дило бало ки бархест
از ماست دلا بلا که برخاست
эй ҷон ҷаҳон бигӯ ки рое
ای جان جهان بگو که رایی
Бо мо суханӣ чу қоматати рост
با ما سخنی چو قامتت راست