Моро з ҳад бирафт зи дарди ту иштиёқ

ما را ز حد برفت ز درد تو اشتیاق

То кӣ кашеми заҳри фироқи ту дар мазоқ

تا کی کشیم زهر فراق تو در مذاق

Раҳмӣ ба ҳоли зори ман мустаманд кун

رحمی به حال زار من مستمند کن

Зон рӯ ки нестам пас азин тоқати фироқ

زان رو که نیستم پس ازین طاقت فراق

Он тоқу ҷуфти ман ки бибозед ишқи ту

آن طاق و جفت من که ببازید عشق تو

Бо дарди ишқи ҷуфти шудеми вази сабри тоқ

با درد عشق جفت شدیم وز صبر طاق

Ҷон май диҳем бар сари кӯяш з гуфту гӯй

جان می‌دهیم بر سر کویش ز گفت و گوی

Як шаби висоли дӯст магар уфтад иттифоқ

یک شب وصال دوست مگر افتد اتّفاق

Дар орзӯӣ рӯй туу лаъли дилкашат

در آرزوی روی تو و لعل دلکشت

Дар нори мҳрқсти тану дил дар эҳтироқ

در نار محرقست تن و دل در احتراق

Аз нури шамъи талъати ту меҳр дар кусуф

از نور شمع طلعت تو مهر در کسوف

Вази тоби офтоби рахти моҳ дар муҳоқ

وز تاب آفتاب رخت ماه در محاق

Субҳ аз фурӯғи нури ҷамол ту муштақаст

صبح از فروغ نور جمال تو مشتقست

Шабро зи шоми зулмати зулфи ту иштиқоқ

شب را ز شام ظلمت زلف تو اشتقاق

Гар хокбўси хок дарат мумкинам шавад

گر خاکبوس خاک درت ممکنم شود

Болои ҳафт манзари гардуни занами равоқ

بالای هفت منظر گردون زنم رواق

То кӣ кашеми ҷону ҷаҳон аз миёни ҷон

تا کی کشیم جان و جهان از میان جان

Бори ҷафоу ҷаври туу дарди иштиёқ

بار جفا و جور تو و درد اشتیاق