Ва ҳўи Фхролмҳққину қдўаҳи алмтклмини алҳоҷи мирзои ҳодии ҳифзаи аллоҳи таъолии ибни алҳоҷи мломҳдии алсбзўорӣ . Волиди моҷди он ҷаноб аз уламои аҳд ва соҳиб макунат бӯда . Ба Маккаи муаззамаи рафта ( раҳ ) . Дар муроҷиат аз роҳи дарё ба Широз риҳлат ёфта . Ҷаноби мавлоно то ъушраи комила аз умри худ дар сабзивор май зиста . Ба исрори ҷаноби олами обиди млоҳсини сабзиворӣ ки бо волидаш рафиқ бӯда ба Машҳади муқаддаси разавии рафта ба таҳсил кушед . Баъд аз риёзоти шаръӣау такмили фиқҳу усӯлу калому ҳикмат ба шавқи иқтибоси ҳикмати ишроқ ба хизмати ҳукамои Исфаҳони рафта , ҳашт сол дар назд мавлонои Исмоили исфаҳонӣу млоълии алнўрии ҳикмати диданд . Баъд аз муроҷиат ба хуросон ба зиёрати Маккаи рафта ба сабзивори баргаштанд . То ин айём ки ҳазор ва дивист ва ҳафтод ва ҳаштаст бист ва ҳашт соласт ки дар онҷо ба таълӣфу таснифу тадрису таҳқиқи улӯми илоҳӣаи машғӯл ва аз умри шарифаши шаст ва се соли рафта . Шарҳи манзӯма дар ҳикмату нброси маҳфили алтФқиаҳ аз таҳорат то интиҳои ҳаҷ бо матни манзуму шарҳи маълум , ҳамчунин шарҳи ҷавшани кабӣру дуои сабоҳу манзӯма дар мантиқ ба қадари сесад байт мўқўм фармуданд . Ҳавошӣ бисёр хосса бар кутуби садриддини широзӣу ғайраи нигошта . Рисолаи ҳидояти алтолбини вғзлёт низ марқӯм фармуданд . Соҳиби каромоту мақомот олия мебошад . Тимно ба баъзе аз ғазалиёти он ҷаноб май пардозам :
و هُوَ فخرالمحققین و قدوة المتکلمین الحاج میرزا هادی حَفَظَهُ اللّه تعالی ابن الحاج ملامهدی السّبزواری. والد ماجد آن جناب از علمای عهد و صاحب مکنت بوده. به مکّهٔ معظمه رفته(ره). در مراجعت از راه دریا به شیراز رحلت یافته. جناب مولانا تا عشرهٔ کامله از عمر خود در سبزوار میزیسته. به اصرار جناب عالم عابد ملاحسین سبزواری که با والدش رفیق بوده به مشهد مقدس رضوی رفته به تحصیل کوشید. بعد از ریاضات شرعیه و تکمیل فقه و اصول و کلام و حکمت به شوق اقتباس حکمت اشراق به خدمت حکمای اصفهان رفته، هشت سال در نزد مولانا اسماعیل اصفهانی و ملاعلی النوری حکمت دیدند. بعد از مراجعت به خراسان به زیارت مکه رفته به سبزوار برگشتند. تا این ایام که هزار و دویست و هفتاد و هشت است بیست و هشت سال است که در آنجا به تألیف و تصنیف و تدریس و تحقیق علوم الهیه مشغول و از عمر شریفش شصت و سه سال رفته. شرح منظومه در حکمت و نبراس محفل التفقیه از طهارت تا انتهای حج با متن منظوم و شرح معلوم، همچنین شرح جوشن کبیر و دعای صباح و منظومه در منطق به قدر سیصد بیت موقوم فرمودند. حواشی بسیار خاصه بر کتب صدرالدین شیرازی و غیره نگاشته. رسالهٔ هدایت الطالبین وغزلیات نیز مرقوم فرمودند. صاحب کرامات و مقامات عالیه میباشد. تیمّناً به بعضی از غزلیات آن جناب میپردازم:
мнғзлёт
مِنْغزلیّات
Эзади бсршт чун гули мо
ایزد بسرشت چون گل ما
Меҳр ту наҳуфт дар дили мо
مهر تو نهفت در دل ما
Аз дидаи зи бас ки хӯн фишондӣ
از دیده ز بس که خون فشاندی
Дар хӯн диласт манзили мо
در خون دل است منزل ما
Дар хештан бидид аёни шоҳиди аласт
در خویشتن بدید عیان شاهد الست
Ҳар кӯ дарид пардаи пиндори хеш ро
هر کو درید پردهٔ پندار خویش را
То пар фишоне накунад вақти қатли ҳам
تا پر فشانیی نکند وقت قتل هم
Барбаст боли мурғи гирифтори хеш ро
بربست بال مرغ گرفتار خویش را
эй амири корвони кондишаҳ мо набӯдат
ای امیر کاروان کاندیشهٔ ما نبودت
Як нзрҳм мерасад афтода дар дунбол ро
یک نظرهم میرسد افتاده در دنبال را
Ахтарони партави мроти дили анвари мо
اختران پرتو مرآت دل انور ما
Дили мо мазҳари кули кули ҳамагии мазҳари мо
دل ما مظهر کلّ کلّ همگی مظهر ما
Хусрави малики тариқат ба ҳақиқат моием
خسرو ملک طریقت به حقیقت ماییم
Калла аз фақр ба тораки зи фанои афсари мо
کله از فقر به تارک ز فنا افسر ما
Шоҳидон дар парда мастуранд лек
شاهدان در پرده مستورند لیک
Моҳи мо бепарда бошад дар ниқоб
ماه ما بی پرده باشد در نقاب
Дидам андари базм мехорон шудӣ
دیدم اندر بزم میخواران شدی
Ҳам ту соқии ҳам ту соғари ҳам шароб
هم تو ساقی هم تو ساغر هم شراب
Гар дили риндони шикастии зоҳдои осони мгир
گر دل رندان شکستی زاهدا آسان مگیر
Ҷой ҳақ бошад ҳазар фармо шикастан мушкил аст
جای حق باشد حذر فرما شکستن مشکل است
Мўсӣӣ нест ки даъвии аноолҳқи шунӯд
موسئی نیست که دعوی اناالحق شنود
Варна ин доъияи андар шаҷарӣ нест ки нест
ورنه این داعیه اندر شجری نیست که نیست
Оташ он нест ки дар водӣ эмин зада анд
آتش آن نیست که در وادی ایمن زدهاند
Оташ онаст ки андари дил даравишон аст
آتش آنست که اندر دل درویشان است
То кӣ зи ғамати нолау фарёд тавон кард
تا کی ز غمت ناله و فریاد توان کرد
зи афтода ба кунҷи қафасии ёд тавон кард
ز افتاده به کنج قفسی یاد توان کرد
Оғӯшу канор аз ту надорем таваққуъ
آغوش و کنار از تو نداریم توقع
Аз ним нигоҳии дили мо шод тавон кард
از نیم نگاهی دل ما شاد توان کرد
Аз малики азали сӯии абад рахт кашидем
از ملک ازل سوی ابد رخت کشیدیم
Оре чаҳ кунам қисмати мо дар ба дарӣ буд
آری چه کنم قسمت ما در به دری بود
Шаҳрии пар аз ойӣнаи алвони нгридим
شهری پر از آیینهٔ الوان نگریدیم
Асрор ба ҳар оина дар ҷилвагарӣ буд
اسرار به هر آینه در جلوه گری بود
Порсоёни риёеи з ҳаво биншинанд
پارسایان ریایی ز هوا بنشینند
Гар ба хок дар майхона чу мо биншинанд
گر به خاک درِ میخانه چو ما بنشینند
Бути паймони шикани аҳди гусали ёдати бод
بت پیمان شکن عهد گسل یادت باد
Ки ба дили басти сари зулфи тўпимонӣ чанд
که به دل بست سر زلف توپیمانی چند
Онкӣ ҷӯяд ҳарамаши гӯ ба сари кӯии дили ой
آنکه جوید حرمش گو به سر کوی دل آی
Нест ҳоҷат ки кунӣ қатъ биёбоне чанд
نیست حاجت که کنی قطع بیابانی چند
Нестам дар хури лутфати тамаъ аз ҳад набарам
نیستم در خور لطفت طمع از حد نبرم
Ду се дашном ба подоши дуои моро бас
دو سه دشنام به پاداش دعا ما را بس
Ҳар чаҳ он маъбар ҳастӣаст буд маъдани ҳасан
هر چه آن معبر هستی است بود معدن حسن
Ҳарчӣ он мазҳар ҳасанӣаст буд масдари ишқ
هرچه آن مظهر حسنی است بود مصدر عشق
Тоҷи асрори алии қутби мадор ишқ аст
تاج اسرار علی قطب مدار عشق است
ӯ буд доирау марказ ӯ меҳвари ишқ
او بود دایره و مرکز او محور عشق
Нашуд афсурдаи зи оби ҳафт дарё
نشد افسرده ز آب هفت دریا
Чу оташ буд андари миҷмари дил
چو آتش بود اندر مجمر دل
зи асрори хеши огаҳии асрорро даҳум
ز اسرار خویش آگهی اسرار را دهم
Чун бо худ оему сафар аз хештан кунам
چون با خود آیم و سفر از خویشتن کنم
Чанг дар доман дилдор задам дӯш ба хоб
چنگ در دامن دلدار زدم دوش به خواب
Буд дастам ба дили хеш ки бедор шудам
بود دستم به دل خویش که بیدار شدم
Ҳар хами зулф ки бар гӯнаи гулгунӣ буд
هر خم زلف که بر گونهٔ گلگونی بود
Доми сайёди азал буд ва гирифтор шудам
دام صیاد ازل بود و گرفتار شدم
эй ки бо нури хиради нури хдомии ҷӯӣ
ای که با نور خرد نور خدامیجویی
Хеши байн , акс назар кун бкҷо май пўиӣ
خویش بین، عکس نظر کن بکجا میپویی
Подшоҳӣ дар сминӣ дошт
پادشاهی دُرّ ثمینی داشت
Баҳри ангуштарӣ нигинӣ дошт
بهر انگشتری نگینی داشت
Хости нақшӣ ки бошадаш дўсмр
خواست نقشی که باشدش دوثمر
Ҳар нафаси коФкнд ба нақши назар
هر نفس کافکند به نقش نظر
Гоҳ шодӣ нагирадаш ғифлат
گاه شادی نگیردش غفلت
Гоҳ анда набошадаш меҳнат
گاه انده نباشدش محنت
Ҳарчӣ фарзона буд дар айём
هرچه فرزانه بود در ایام
Кард андеша ва вале ҳамаи хом
کرد اندیشه و ولی همه خام
Жандаи пӯшӣ падед шуд он дам
ژنده پوشی پدید شد آن دم
Гуфт бинагор бугзарад ин ҳам
گفت بنگار بگذرد این هم
Шоҳро ин сухан фитод писанд
شاه را این سخن فتاد پسند
Брнгинши ҳамин иборат кунад
برنگینش همین عبارت کند
Зонка шодӣу айшу меҳнату ғам
زانکه شادی و عیش و محنت و غم
Бугзарад ҳар ду бар банӣ одам
بگذرد هر دو بر بنی آدم
Ҷузи нур алӣ нест агар дарак буд
جز نور علی نیست اگر درک بود
Бо ғайри алӣ кӣам сари барг буд
با غیر علی کی ام سر برگ بود
Гӯйанд дами марги алиро байнем
گویند دم مرگ علی را بینیم
эй кош ки ҳар дамами дами марг буд
ای کاش که هر دمم دم مرگ بود
эй зоти ту зи эърози сифоти омадаи пок
ای ذات تو ز اعراض صفات آمده پاک
Кӯтоҳи зи домани ту дасти идрок
کوتاه ز دامن تو دست ادراک
Дар ҳар чаҳ назар кунам тўоиӣ ба назар
در هر چه نظر کنم توآیی به نظر
Лои зоҳири фии алўҷўди валлоҳи сўок
لا ظاهِرَ فی الوجودِ واللّهِ سِواک