Номаши фахриддини иброҳӣм . Гуфтаанд ки ӯу шамси аддӣни табризӣ дар чиллаи хонаи рукни аддӣни сҷосии арбаъӣн ба сар меовараданд вбрхӣ гуфтаанд ба шайхи шаҳоби аддӣни Сӯҳравардии расидау иродати Халифаи он ҷаноби шайхи бҳоءи аддӣни закариёии миллатонеро гузида . Таҳқиқ онаст ки мурӣди баҳоуддӣни закариёи вабаи мсоҳрти он ҷаноб ихтисос ёфтааст . Ғараз , шайхӣаст муҷаррад ва перӣаст муваҳҳид , орифии ошиқ , ошиқии содиқ . Сулӯкаши маҳбӯбонау сайраши маҷзӯбона , ишқаш бар ақлаши ғолибу идроки зуҳӯроти сифотро азмзоҳри толиб . Ҷонаши пуршӯру дилаши пурнур . Синааш махзани асрору дидааш матлаъи анвор . Аз лмъотши лўомъи ҳақиқати ломъ ва аз мтолъи абӣоташи тўолъи асрори тариқати толеъ . ВФотш дар санаи 688 дар димишқи шом ва дар зери пои мҳии аддӣни арабиаш мақом ва ин аз ашъори он ҷанобаст :

نامش فخرالدین ابراهیم. گفته‌اند که او و شمس الدین تبریزی در چلّهٔ خانهٔ رکن الدین سجاسی اربعین به سر می‌آوردند وبرخی گفته‌اند به شیخ شهاب الدین سهروردی رسیده و ارادت خلیفهٔ آن جناب شیخ بهاء الدین زکریای ملتانی را گزیده. تحقیق آن است که مرید بهاءالدین زکریا وبه مصاهرت آن جناب اختصاص یافته است. غرض، شیخی است مجرد و پیری است موحد، عارفی عاشق، عاشقی صادق. سلوکش محبوبانه و سیرش مجذوبانه، عشقش بر عقلش غالب و ادراک ظهورات صفات را ازمظاهر طالب. جانش پرشور و دلش پرنور. سینه‌اش مخزن اسرار و دیده‌اش مطلع انوار. از لمعاتش لوامع حقیقت لامع و از مطالع ابیاتش طوالع اسرار طریقت طالع. وفاتش در سنهٔ ۶۸۸ در دمشق شام و در زیر پای محی الدین عربی‌اش مقام و این از اشعار آن جناب است:

Мнрсолаҳи мавсӯм ба даҳ фасл

مِنْرسالهٔ موسوم به ده فصل

Аз ҷамолат наме шикебади дил

از جمالت نمی‌شکیبد دل

Май баради ақл ва май фиребади дил

می‌برد عقل و می‌فریبد دل

Ишқат эй дӯст мекунад пайваст

عشقت ای دوست می‌کند پیوست

Ҳалқа дар гӯши ошиқони аласт

حلقه در گوش عاشقانِ الست

Ошиқони ту поки бозоннд

عاشقان تو پاک بازانند

Сайди ишқи ту шоҳбозоннд

صیدِ عشق تو شاهبازانند

эй ғами ту муҷовири дили ман

ای غم تو مجاورِ دلِ من

Вази ду олами ғами ту ҳосили ман

وز دو عالم غمِ تو حاصل من

Тодлм ҳаст мубталои ту бод

تادلم هست مبتلای تو باد

Доимои бастаи балои ту бод

دایماً بستهٔ بلای تو باد

Дидаро дидан ту май бояд

دیده را دیدن تو می‌باید

Агарам қасд ҷон кунӣ шояд

اگرم قصد جان کنی شاید

Дили моро фароғат аз ҷон аст

دل ما را فراغت از جان است

Зиндагонии мо ба ҷонон аст

زندگانی ما به جانان است

Оташи ишқ дар дили мо ҷӯ

آتشِ عشق در دل ما جو

Ошиқони заъифро воҷу

عاشقان ضعیف را واجو

Ошиқонро зи ҷони гирифтаи малол

عاشقان را ز جان گرفته ملال

Хӯнашон бар ту ҳамчуи шери ҳалол

خونشان بر تو همچو شیر حلال

Фориғӣ аз даруни соҳиби дард

فارغی از درون صاحب درد

Макун эй дӯст ҳарчӣ битавон кард

مکن ای دوست هرچه بتوان کرد

Рух ба мо май намоу ҷон май бахш

رخ به ما می‌نما و جان می‌بخش

Бар дилу ҷони ошиқон май бахш

بر دل و جان عاشقان می بخش

Ҳаст ишқи оташӣ ки шуълаи он

هست عشق آتشی که شعلهٔ آن

Сӯзад аз дили ҳиҷоби ҳрҳдсон

سوزد از دل حجابِ هرحدثان

Чун бисӯзад ҳавои пичои печ

چون بسوزد هوای پیچا پیچ

ӯ бимонад ҷуз ӯ намонад ҳеҷ

او بماند جز او نماند هیچ

Ишқу авсоф кирдигор якеаст

عشق و اوصاف کردگار یکیست

Ошиқу ишқу ҳасан ёр якеаст

عاشق و عشق و حسن یار یکیست

Ҳикояти ҳаҷаи алисломи эмоми Муҳамади Ғаззолии қудси сира

حکایت حجّة الاسلام امام محمد غزالی قُدِّسَ سِرُّه

Шайхи алисломи эмоми Ғаззолӣ

شیخ الاسلام امام غزالی

Он сФобхши ҳолеу қолӣ

آن صفابخش حالی و قالی

Волаи ҳасани моҳрӯён буд

والهٔ حسن ماهرویان بود

Дар раҳи ишқи дӯсти пӯён буд

در رهِ عشقِ دوست پویان بود

ӯ ҳаме шуд савораи андари рай

او همی شد سواره اندر ری

Аз мурӣдони садаши фузун дар пай

از مریدان صدش فزون در پی

Дилбарӣ дид ҳамчуи моҳи тамом

دلبری دید همچو ماه تمام

Ки бурун омад аз дар ҳаммом

که برون آمد از درِ حمام

Шайхро чашм чун бар он афтод

شیخ را چشم چون بر آن افتاد

Сӯрат дӯст дид бози устод

صورتِ دوست دید باز استاد

Шудаи мардум ба шайх дар , нигарон

شده مردم به شیخ در، نگران

Шайх дар рӯй он парии ҳайрон

شیخ در رویِ آن پری حیران

Суфиёни ҷумлаи мунфаили гаштанд

صوفیان جمله منفعل گشتند

Ҳамаи бгзоштнд ва бигузаштанд

همه بگذاشتند و بگذشتند

Лек мардӣ ки буд ғошияи дор

لیک مردی که بود غاشیه دار

Шайхро гуфт бигузар вбгзор

شیخ را گفت بگذر وبگذار

Дидани сӯрат аз ту лоиқ нест

دیدن صورت از تو لایق نیست

Шармат аз ин ҳама хилоиқ нест

شرمت از این همه خلایق نیست

Шайх гуфташ магӯӣ ҳеҷ сухан

شیخ گفتش مگوی هیچ سَخُن

Рؤиаҳи алҳсни рؤиаҳи алأъин

رُؤیَةُ الْحُسْنِ رُؤیَةُ الأَعْیُن

Ошиқоне ки маст ва мадҳушанд

عاشقانی که مست و مدهوشند

Бода аз ҷом ҳасан ме нӯшанд

باده از جامِ حسن می‌نوشند

зи андарун ғофиласт беруни байн

ز اندرون غافل است بیرون بین

Рӯй Лайлӣ ба чашми маҷнӯни байн

رویِ لیلی به چشم مجنون بین

Агарат ҳаст қӯти мардон

اگرت هست قوت مردان

Инак асбу силаҳ ва ин майдон

اینک اسب و سلاح و این میدان

Мнғзлётаҳи қудси сира

مِنْغزلیّاته قُدِّسَ سِرُّه

Сози тараби ишқ чаҳ донад ки чаҳ соз аст

ساز طرب عشق چه داند که چه ساز است

Каз захма ӯ на фалаки андари так ва тоз аст

کز زخمهٔ او نُه فلک اندر تک و تاز است

Ишқаст ки ҳар дам ба дигар ранг барояд

عشق است که هر دم به دگر رنگ برآید

Нозаст яке ҷой ва дигар ҷой ниёз аст

ناز است یکی جای و دگر جای نیاز است

Дрхрқаҳи ошиқ чу даройади ҳама сӯз аст

درخرقهٔ عاشق چو درآید همه سوز است

Дар кисвати маъшӯқ чу омад ҳама соз аст

در کسوتِ معشوق چو آمد همه ساز است

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Рухи ту бурқаъи чашм манаст лек чаҳ суд

رخ تو برقع چشم من است لیک چه سود

Ки бурқаъ аз рухи ту бар наме тавон андохт

که برقع از رخ تو بر نمی‌توان انداخت

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Ба нури талъат ту ёфтам вуҷӯди туро

به نور طلعت تو یافتم وجودِ ترا

Ба офтоб тавон ёфт коФтоб куҷост

به آفتاب توان یافت کافتاب کجاست

Ишқи шурӣ дар ниҳоди мо ниҳод

عشق شوری در نهاد ما نهاد

Ҷони мо дар бутаи савдои ниҳод

جان ما در بوتهٔ سودا نهاد

Гуфтугӯе дар забон мо фиканд

گفتگویی در زبانِ ما فکند

Ҷустуҷӯе дар даруни мо ниҳод

جستجویی در درون ما نهاد

Дмбдм дар ҳар либосӣ рух намӯд

دمبدم در هر لباسی رخ نمود

Лаҳзаи лаҳзаи ҷои дигари пои ниҳод

لحظه لحظه جای دیگر پا نهاد

Бар мисоли хештан ҳарфӣ навишт

بر مثال خویشتن حرفی نوشت

Номи он ҳарфи одаму ҳаввои ниҳод

نام آن حرف آدم و حوا نهاد

Ҳасани худ бар дидаи худ ҷилва дод

حسن خود بر دیدهٔ خود جلوه داد

Миннатӣ бар ошиқи шайдои ниҳод

منتی بر عاشق شیدا نهاد

Ҳам ба чашми худ ҷамол худ бидид

هم به چشم خود جمال خود بدید

Тӯҳматӣ бар чашми нобӣнои ниҳод

تهمتی بر چشم نابینا نهاد

То камоли илм ӯ зоҳир шавад

تا کمال علم او ظاهر شود

Ин ҳамаи асрор бар саҳрои ниҳод

این همه اسرار بر صحرا نهاد

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Нахустин бода кандар ҷом карданд

نخستین باده کاندر جام کردند

зи чашми масти соқӣ вом карданд

ز چشمِ مستِ ساقی وام کردند

Ба гетӣ ҳар куҷои дарди дилӣ буд

به گیتی هر کجا درد دلی بود

Ба ҳам карданду ишқаш ном карданд

به هم کردند و عشقش نام کردند

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Ғамат ҳар лаҳза ҷонӣ хоҳад азмн

غمت هر لحظه جانی خواهد ازمن

Чаҳ инсофаст чандини ҷон ки дорад

چه انصاف است چندین جان که دارد

Нишони ишқ май хоҳии ироқӣ

نشان عشق می‌خواهی عراقی

Бибин то чашми хӯни афшон ки дорад

ببین تا چشمِ خون افشان که دارد

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Ҳам дида ӯ бояд то ҳасан Рахш бинад

هم دیدهٔ او باید تا حسن رخش بیند

Онҷо ки ҷамол ӯст абсор наме гунҷад

آنجا که جمال اوست ابصار نمی‌گنجد

Ҷонам дар дил мезад дил гуфт бирав кин дам

جانم درِ دل می‌زد دل گفت برو کاین دم

Бо ёр дар ин хилват диёр наме гунҷад

با یار در این خلوت دیار نمی‌گنجد

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Бо ошиқони шайдои султон куҷо барояд

با عاشقانِ شیدا سلطان کجا برآید

Дар пеши ошноёни бегонае чаҳ синҷид

در پیش آشنایان بیگانه‌ای چه سنجد

Аз сад ҳазор хирман икдонаҳаст олам

از صد هزار خرمن یکدانه است عالم

Бо сад ҳазор олами пас донае чаҳ синҷид

با صد هزار عالم پس دانه‌ای چه سنجد

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Марои макаш ки ниёзи миннат ба кор ояд

مرا مکش که نیازِ منت به کار آید

Чу ман набошам ҳасани ту бар ки ноз кунад

چو من نباشم حسن تو بر که ناز کند

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Биравам зи чашми масташи назарӣ ба воми гирам

بروم ز چشم مستش نظری به وام گیرم

Ки ба он назари бубинами рухи хуби лолаи рангаш

که به آن نظر ببینم رخ خوب لاله رنگش

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Пайваста шуд чу шабнами ҷонам ба офтоб

پیوسته شد چو شبنم جانم به آفتاب

Шояд ки он замони зи аноолшмси дами занам

شاید که آن زمان ز اناالشمس دم زنم

Оре чу офтоб биафтад дар оина

آری چو آفتاب بیفتد در آینه

Гуяд ҳар оина ки ҳамаи меҳри равшанам

گوید هر آینه که همه مهرِ روشنم

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Агар ҷаҳони ҳамаи зер ва зибр шавад зи ғамат

اگر جهان همه زیر و زبر شود ز غمت

Туро чаҳ ғам ки ту ху кардае ба танҳоӣ

ترا چه غم که تو خو کرده‌ای به تنهایی

Ҳиҷоб рӯй ту ҳам рӯй тест дар ҳамаи ҳол

حجابِ روی تو هم روی تست در همه حال

Наоне аз ҳамаи олами зи бас ки пайдое

نهانی از همه عالم ز بس که پیدایی

Арӯси ҳасани турои ҳеҷ дар наме ёбад

عروسِ حسن ترا هیچ در نمی‌یابد

Ба гоҳи ҷилваи магари дидаи тамошое

به گاه جلوه مگر دیدهٔ تماشایی

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Аз он хушаст чу не нолаам ба гӯши ҷаҳон

از آن خوشست چو نی ناله‌ام به گوش جهان

Ки ҳеҷ дам назанам то туам на бинавозӣ

که هیچ دم نزنم تا توام نه بنوازی

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Ба қиморхона рафтам ҳама покбоз дидам

به قمارخانه رفتم همه پاکباز دیدم

Чу ба савмиъаи расидами ҳамаи зоҳиди риёе

چو به صومعه رسیدم همه زاهد ریایی

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Ироқии толиб дардаст ва он ҳам

عراقی طالب درد است و آن هم

Ба буии инки дирамонаш ту бошӣ

به بویِ اینکه درمانش تو باشی

рубоӣ

رباعی

Ҳарчанд ки дилро ғами ишқ ойин аст

هرچند که دل را غمِ عشق آیین است

Чашмаст ки офати дил мискин аст

چشم است که آفتِ دلِ مسکین است

Ман мӯътарифам ки шоҳиди дил маънӣ аст

من معترفم که شاهد دل معنی است

Аммо чаҳ кунам ки чашми сӯрат байн аст

اما چه کنم که چشم صورت بین است

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Раҳи гум шудаи раҳнамоӣ май бояд буд

ره گم شده رهنمای می‌باید بود

Дар банду гиреҳи гушой май бояд буд

در بند و گره گشای می‌باید بود

Яксол ва ҳазор сол мебояд зист

یکسال و هزار سال می‌باید زیست

Як ҷой ва ҳазор ҷой май бояд буд

یک جای و هزار جای می‌باید بود