Аз сайёҳон бӯда ва дар замони акбршоаҳи дрҳндўстон таваққуф намӯда . Шайхи файзии дкнӣ ба устодии вай мӯътариф бӯда ва ба камолоти ақлӣ муттасифаст . Аз ашъор ӯ навишта мешавад :

از سیاحان بوده و در زمان اکبرشاه درهندوستان توقف نموده. شیخ فیضی دکنی به استادی وی معترف بوده و به کمالات عقلی متصف است. از اشعار او نوشته می‌شود:

Гар ҷониби масҷиди гузарами вари тарафи дайр

گر جانب مسجد گذرم ور طرف دیر

Ҳар ҷо ки рӯми майли дилами сӯй ту бошад

هر جا که روم میلِ دلم سویِ تو باشد

Шамъро зи оташи парвона хабар нест ки ҳаст

شمع را ز آتش پروانه خبر نیست که هست

Оташи шамъ дигар , оташи парвона дигар

آتشِ شمع دگر، آتشِ پروانه دگر

Маҷнӯн ба раҳи ишқи з сар карда қадам рафт

مجنون به ره عشق ز سر کرده قدم رفت

Дорам ман девонаи қадам бар қадам ӯ

دارم منِ دیوانه قدم بر قدمِ او

рубоӣ

رباعی

Зоҳиди ту змстии мангар пастии мо

زاهد تو زمستی منگر پستی ما

Сарфи раҳи нестӣ шуда ҳастӣ мо

صرف ره نیستی شده هستیِ ما

Момст муҳаббатем ва ту масти ғурур

مامست محبتیم و تو مستِ غرور

Фарқаст зи мастии ту то мастии мо

فرق است ز مستی تو تا مستیِ ما