Додмаҳ гуфт : шунидам ки мардӣ дар мактаби ълмнои мантиқи алтир , забон мурғон омӯхта буду зқаҳи тӯтӣони сарочаи аршӣу тоўсони боғчаи қудсии хӯрда бо ҳудҳудӣ ошноӣ дошт . Рӯзӣ май гузашт , ҳудҳудро бар сар деворӣ нишаста дид . Гуфт : эй ҳудҳуд ! ӣнҷо ки нишастае , гӯш ба худ дор ва мтиқз бош ки ӣнҷои камӣни гоҳ иғмоиён қазост ; тири офатро аз қабзаи ҳаводиси ӣнҷо кушод диҳанд , корвони зъоФи алтири бад-ӣни мақом ба ҳукм ихтиёр оянд ва ба эҳтирози гузаранд . Ҳудҳуд гуфт : дарин ҳаволии кӯдакӣ ба тамаъи сайди ман дом май наад ва ман тамошоӣ ӯ мекунам ки рӯзгор беҳуда мегузаронаду ранҷии номуфид май барад . Нек мард гуфт : « бар ман ҳаминаст ки гуфтам » ва бирафт . Чун бозомад ҳудҳудро дар дасти он Тифл асир ёфт . Гуфт : ту на бар дом ниҳодан он Тифлу тазйиъи рӯзгор ӯ механдидӣ ? ва чун донаи баробар буду доми ошкоро , ба чаҳ мӯҷиби дарафтодӣ ? гуфт : нашунидае ? алҳдҳди азои нқри аларзи иърФи ман алмсоФаҳи мо байнау байни алмоءу лои ибсри шъираҳи алФхи линФзи мо ҳўи фии мшиӣаҳи аллоҳи таъолии ман алқзоءу алқдр . Пӯшида нест ки ҳавои мард , ҷамоли маслиҳатро аз дидаи хирад пӯшида дораду гардуни гардон аз самти мурод ҳрк бигардед , самти нуқсон ба ҳаволии аҳвол ӯ роҳ ёфт . Ман пурҳи қабои муламмаъ чуст карда будаму кулоҳи мурассаъи кажи ниҳода ва ба пари чобукӣ ва дониш мепаридам ва бар ҳушёрӣу тезбинии хеши эътимоди доштам ; худ дона баҳона шуду маро дар дом кашиду бдонк чун дар азали қалами иродат ронда бошанду рақам ҳудус баркашида , мурғони шохсори малакӯтро аз ошиёнаи исмати дрорнду бастаи дом баҳона гардонанду одами сафӣ ки ойӣнаи дили чунон софӣ дошт ки дар олами шаҳодат аз нақши алвоҳи ғайб ҳикоят кардӣ ва бо млأоълӣ ба илми хеш тафозул намӯдӣ , донаи гандуми дида буду доми аФгнӣ чун Иблиси шинохтау васияти лотқрбои ҳзаҳ алшҷраҳ шунида , пои басти хдъту ғурури нафас чаро омад ?

دادمه گفت : شنیدم که مردی در مکتبِ عُلِّمنَا مَنطَقَ الطَّیرِ، زبانِ مرغان آموخته بود و زقّهٔ طوطیانِ سراچهٔ عرشی و طاوسانِ باغچهٔ قدسی خورده با هدهدی آشنایی داشت. روزی می‌گذشت، هدهد را بر سرِ دیواری نشسته دید. گفت: ای هدهد! اینجا که نشسته‌ای ، گوش به خود دار و متیقّظ باش که اینجا کمین‌گاهِ یغماییانِ قضاست؛ تیرِ آفت را از قبضهٔ حوادث اینجا گشاد دهند، کاروانِ ضعاف الطیّر بدین مقام به حکمِ اختیار آیند و به احتراز گذرند. هدهد گفت: درین حوالی کودکی به طمعِ صیدِ من دام می‌نهد و من تماشایِ او می‌کنم که روزگار بیهوده می‌گذراند و رنجی نامفید می‌برد. نیک‌مرد گفت: «بر من همین است که گفتم» و برفت. چون بازآمد هدهد را در دستِ آن طفل اسیر یافت. گفت: تو نه بر دام نهادنِ آن طفل و تضییعِ روزگارِ او می‌خندیدی؟ و چون دانه برابر بود و دام آشکارا ، به چه موجب درافتادی ؟ گفت : نشنیده‌ای؟ اَلهُدهُدُ اِذَا نَقَرَ الاَرضَ یَعرِفُ مِنَ المَسَافَهِ مَا بَینَهُ وَ بَینَ المَاءِ وَ لَا یُبصِرُ شِعیَرهَ الفَخِّ لِیَنفُذَ مَا هُوَ فِی مَشِیئَهِ اللهِ تَعَالَی مَنَ القَضَاءِ وَ القَدَرِ. پوشیده نیست که هوایِ مرد، جمالِ مصلحت را از دیدهٔ خرد پوشیده دارد و گردونِ گردان از سمتِ مرادِ هرک بگردید، سمتِ نقصان به حوالیِ احوال او راه یافت. من پرّهٔ قبای ملمّع چست کرده بودم و کلاهِ مرصّع کژ نهاده و به پرِ چابکی و دانش می‌پریدم و بر هشیاری و تیزبینیِ خویش اعتماد داشتم؛ خود دانه بهانه شد و مرا در دام کشید و بدانک چون در ازل قلمِ ارادت رانده باشند و رقمِ حدوث برکشیده، مرغانِ شاخسارِ ملکوت را از آشیانهٔ عصمت درآرند و بستهٔ دامِ بهانه گردانند و آدمِ صفّی که آیینهٔ دل چنان صافی داشت که در عالمِ شهادت از نقشِ الواحِ غیب حکایت کردی و با ملأاعلی به علمِ خویش تفاضل نمودی، دانهٔ گندم دیده بود و دام‌افگنی چون ابلیس شناخته و وصیّتِ لَاتَقرَبَا هذِهِ الشَّجَرَهَ شنیده ، پای بستِ خدعت و غرورِ نفس چرا آمد؟

Ноком шудам ба коми душман

ناکام شدم به کامِ دشمن

То худ зи туам чаҳ ком рӯзӣаст ?

تا خود ز توام چه کام‌روزیست؟

Мурғии сети дилами баланди парвоз

مرغی‌ست دلم بلند پرواز

Лекини зи қазоаш , доми рӯзии сет

لیکن ز قضاش، دام روزی‌ست

Нек мард донист ки онч мегуяд маҳзи ростӣ ва айн сидқаст ; ду дирам бидон кӯдак дод , ҳудҳудро бози харид ва раҳо кард . Ин фасона аз баҳр он гуфтам то маро дар хлоби ин мхоФту мхлби ин офат нагузорӣ ва беш азин тавбиху сарзаниши равои надорӣу онч аз рӯзгор дар тқриъу тшниъ бар ман сарф мекунӣ , агар бдончи тадбири кор манаст , Аннани андешаи хеши масруфи гирдонеи аввалитар .

نیک‌مرد دانست که آنچ می‌گوید محض راستی و عینِ صدقست؛ دو درم بدان کودک داد، هدهد را باز خرید و رها کرد. این فسانه از بهر آن گفتم تا مرا در خلابِ این مخافت و مخلبِ این آفت نگذاری و بیش ازین توبیخ و سرزنش روا نداری و آنچ از روزگار در تقریع و تشنیع بر من صرف می‌کنی، اگر بدانچ تدبیرِ کار من است، عنانِ اندیشهٔ خویش مصروف گردانی اولی‌تر.

Дъи ънки лу май ?фони аллўми ағроء

دَع عَنکَ لَو مِی فَاِنَّ اللَّومَ اِغرَاءُ

Ва дуоне болатии канти ҳаии алдоء

وَ دَوَانِی بِالَّتِی کَانَت هِیَ الدَّاءُ

Достонро азин сухани дил нарм шуд ва ба дили гармии додмаҳи биФзўд ва гуфт : тўзъу тўҷъ ба хотири роҳи мада ва ин тасаввур макун ки дар ҳеҷ млму муҳим ки пеш ояд ва дар ҳеҷ доҳиаҳ эй аз дўоҳӣ ки рӯй намояд , маро аз пеши баради кори ту иғфол ва азҳол тавонад буд , чаҳ ҳуқуқи ммолҳту мусоҳибат бар якдигар собитасту ъқуди мўолоту мؤохот дар миёнаи мтأкд ва порсиён гуфтаанд : « мол ба рӯзи сахтӣ ба кор ояду дӯст ба ҳангоми меҳнат » ва чаҳор хислат дар шариъати мурувват бар дӯстони айн фарз омад , яке онк чун балое ба дӯст расад , худро дар мқосоти он бо дӯст шарик гирданду дувуми онк чун андешаи корӣ нохуб кунад , Аннани азм ӯ аз роҳ иродат бозгарданд ва нагузорад ки ба феъли анҷомад , сиўми онк дар асбоби манофе аз мъўнт ӯ мтأхр набошад , чаҳоруми онки итмоми муҳимот ӯ бар аворизи ҳоҷоти худ мақдам дорад , ансри ахоки золмо ӯ мзлўмо , лекин аз ишорати дақиқ ки дар зимни ин ҳадисаст мутанаббеҳ бояд буд то қосири назариро ӣнҷои пои фаҳм дар харсанг ғалат наёяд ки шореъи ӣнҷо бар аъонти зулми тҳризи фармӯдаи сет , блаки мурод аз нусрати золим манъ ӯст аз зулм , пас маро аз ҳифзи хӯну моли ту чора Эй нест , чаҳ дӯстро аз дӯсти агрч нуқта нақорӣ бар ҳавошӣ хотир бошад , ҳангоми кори афтодагии ҷумла ба оби вафо фурӯ шавед ва дар фавойиди ҳкмоء ҳинд меояд ки « онро ки кирдор нест , мукофот несту онро ки дӯст нест , ромиш нест » осӯда хотир бош ъ ,гар бо ту насохтам , ҳам аз баҳри ту буд . Ман ба хизмати малики рӯму айёри хотир ӯ бози байнам ва ба тахмири андешау тадбири туро чун мӯӣ аз хамири беруни орм . Додмаҳ гуфт : аўмид медорам ки сирати сафои пурвирди туро бар абқоءи ҳақи вафоӣ ман дорад ва аз фарт некӯ наҳодӣу поки нажодии онч дар вусъ ояд , боқӣ нагузорӣ , лекини мардуми аҳли хирад бо меҳнат задагон кори афтода , зиёдати омехтан ва дар суҳбати эшон ало ба қадари зарурат овихтан писандида надоранд ки меҳнат ба оташ тез монад , онро зӯдтар сӯзанд ки бадв наздиктар бошад . Шояд ки то ин наҳси мустамар аз айёми нокомӣ ман барояд , аз ман мунқатиъи шӯй , чаҳ гуфтаанд ки нодонии нафаси мардумро мрзисту ноМуродии ҳоли мардумро , маразӣ ки аз ъдўои он чораи эҳтироз бибояд карду агрчи дӯстонро дар беморӣ набояд гузошт , низ набояд ки аз иллати беморӣ ӯ ҳам бадишон асар кунад

داستان را ازین سخن دل نرم شد و به دل‌گرمی دادمه بیفزود و گفت: توزّع و توجّع به خاطر راه مده و این تصور مکن که در هیچ ملمّ و مهمّ که پیش آید و در هیچ داهیه‌ای از دواهی که روی نماید، مرا از پیش‌بردِ کار تو اغفال و اذهال تواند بود، چه حقوقِ ممالحت و مصاحبت بر یکدیگر ثابت است و عقودِ موالات و مؤاخات در میانه متأکّد و پارسیان گفته‌اند: «مال به روزِ سختی به کار آید و دوست به هنگامِ محنت» و چهار خصلت در شریعتِ مروّت بر دوستان عینِ فرض آمد، یکی آنک چون بلایی به دوست رسد، خود را در مقاساتِ آن با دوست شریک گرداند و دوم آنک چون اندیشهٔ کاری ناخوب کند، عنانِ عزمِ او از راهِ ارادت بازگرداند و نگذارد که به فعل انجامد ، سیوم آنک در اسبابِ منافع از معونتِ او متأخر نباشد، چهارم آنک اتمامِ مهمّات او بر عوارضِ حاجات خود مقدّم دارد، اُنصُر اَخَاکَ ظَالِماً اَو مَظلُوماً ، لیکن از اشارتِ دقیق که در ضمنِ این حدیث است متنبّه باید بود تا قاصر‌نظری را اینجا پایِ فهم در خرسنگِ غلط نیاید که شارع اینجا بر اعانتِ ظلم تحریض فرموده‌ست ، بلک مراد از نصرتِ ظالم منعِ اوست از ظلم، پس مرا از حفظِ خون و مالِ تو چاره‌ای نیست، چه دوست را از دوست اگرچ نقطهٔ نقاری بر حواشیِ خاطر باشد، هنگامِ کار افتادگی جمله به آبِ وفا فرو شوید و در فوایدِ حکماءِ هند می‌آید که « آنرا که کردار نیست، مکافات نیست و آنرا که دوست نیست، رامش نیست» آسوده‌خاطر باش ع ، گر با تو نساختم ، هم از بهرِ تو بود. من به خدمتِ ملک روم و عیارِ خاطر او باز بینم و به تخمیرِ اندیشه و تدبیر ترا چون موی از خمیر بیرون آرم. دادمه گفت: اومید می‌دارم که سیرتِ صفا پرورد ترا بر ابقاء حقِّ وفایِ من دارد و از فرطِ نیکو نهادی و پاک نژادی آنچ در وسع آید، باقی نگذاری، لیکن مردمِ اهلِ خرد با محنت‌زدگانِ کار‌افتاده، زیادت آمیختن و در صحبتِ ایشان الّا به قدرِ ضرورت آویختن پسندیده ندارند که محنت به آتش تیز ماند، آنرا زودتر سوزاند که بدو نزدیکتر باشد. شاید که تا این نحسِ مستمرّ از ایّامِ ناکامیِ من برآید، از من منقطع شوی، چه گفته‌اند که نادانی نفسِ مردم را مرضیست و نامرادی حالِ مردم را، مرضی که از عدوایِ آن چارهٔ احتراز بباید کرد و اگرچ دوستان را در بیماری نباید گذاشت، نیز نباید که از علّتِ بیماری او هم‌ بدیشان اثر کند

?иламтар ани алмрءи тдўии ямина

اَلَم تَرَ اَنَّ المَرءَ تَدوی یَمِینُهُ

Фиқтъҳои ъмдои лислми соира

فَیَقطَعُهَا عَمداً لِیَسلَمَ سَائِرُه

Акнӯн турои ҳангоми онки ситораи саодати ман рӯй ба истиқомат наад , нигаҳ мебояд дошт то ранҷ бефоида намонад , чунонк он малик доно кард бо хусрав . Достон гуфт : чун буд он достон ?

اکنون ترا هنگام آنک ستارهٔ سعادتِ من روی به استقامت نهد، نگه می‌باید داشت تا رنج بی‌فایده نماند ، چنانک آن ملکِ دانا کرد با خسرو. داستان گفت: چون بود آن داستان؟