Зрўӣ гуфт : шунидам ки рӯзии ҳакими пешаи ҳангомаи сухани ҳикматомез гарм карда буд ва аз ҳар навъ фусӯл мегуфт то боътдоли ахлот ва арқон расед ки ҳргаҳ ки сафроу савдоу блғму хӯни бмқдори росту маводи мутасовӣ алоҷзоء бошад , ғолибан мизоҷи куллӣ барқарор аслӣ бимонад ва ҳамчунин офтоб чун бнқтаҳи эътидол рабиъӣ расад , соъоти замонии рӯзу шаби бики миқдор боз ояд , чунонк то тарозуии фалаки бчшмаҳ ?харчад биҷунбад , эътидоли мутлақ дар мизоҷи олам падед ояд . Таббохӣ дар миёни нзори ?гийони истода буд , фаҳм натавонист кард . Пиндошт ки мурод аз он эътидол тсўит миқдораст ; бирафту диягии зера бо бсохту гӯшту заъфарону зерау намаку обу дигари тўоблро сторост дарав кард , чун бипардохт пеш устод биниҳоду бурҳони ҷаҳли хеш зоҳир гардонид .
زروی گفت: شنیدم که روزی حکیم پیشهای هنگامهٔ سخنِ حکمتآمیز گرم کرده بود و از هر نوع فصول میگفت تا به اعتدالِ اخلاط و ارکان رسید که «هرگه که صفرا و سودا و بلغم و خون به مقدارِ راست و موادِّ متساویالاجزاءِ باشد، غالباً مزاجِ کلّی برقرار اصلی بمانَد و همچنین آفتاب چون به نقطهٔ اعتدال ربیعی رسد، ساعاتِ زمانی روز و شب بهیک مقدار باز آید، چنانکه تا ترازویِ فلک به چشمهٔ خرشید بجنبد، اعتدالِ مطلق در مزاجِ عالم پدید آید.» طبّاخی در میان نظّارگیان ایستاده بود، فهم نتوانست کرد. پنداشت که مراد از آن اعتدال، تسویتِ مقدارست؛ برفت و دیگی زیرهبا بساخت و گوشت و زعفران و زیره و نمک و آب و دیگر توابل راستاراست در او کرد، چون بپرداخت پیش استاد بنهاد و برهانِ جهل خویش ظاهر گردانید.
Вкми ман ъоӣби қўлои сҳиҳо
وَکَم مِن عَائِبٍ قَولاً صَحِیحا
Ва офатаи ман алФҳми алсқим
وَ آفَتُهُ مِنَ اَلفَهمِ السَّقِیمِ
Ин фасона аз баҳр он гуфтам то доне ки адолати нигоҳи доштан роҳӣ борӣкаст ки ҷузи болти ақли сулӯки он роҳ натавон кард . Ақласт ки андозаи умӯри урфӣу шаръӣ дар фавойиди дайну дунё мръӣ дораду ишорати набавӣ ки мо дахли алрФқи фии шийъи қти алои зотаҳ ва мо дахли алхрқи фии шийъи қти алои шонаи бакори бандад . Оҳӯи ин фасл ёд гирифту нақши калимотӣ ки аз зирак ва зрўӣ шунида буд , бар саводу баёзи дидау дили бнгошту дъоӣии лоиқи ҳолу сноӣии бостҳқоқ вақт бигуфту бҳкми фармон бо кабӯтар рӯй бмқсди ниҳоди бўҷаҳи сбиҳу амли Фсиҳу ҳусӯли муроди дилу хсб муродамоне , мқзии алўтр , маразии алосри волнзр ; ва чун бмқомгоаҳи расиданд , вуҳуш ҳозир омаданду бқдўми эшон якдигарро таҳният доданд . Пас оҳӯи забони бзкри маҳосини авсофу мҳомди ахлоқу сайри Марзия зирак багушӯд ва гуфт :
این فسانه از بهر آن گفتم تا دانی که عدالت نگاه داشتنِ راهی باریکست که جز بهآلتِ عقل سلوکِ آن راه نتوان کرد. عقلست که اندازهٔ امورِ عرفی و شرعی در فواید دین و دنیا مرعی دارد و اشارت نبوی که مَا دَخَلَ الرِّفقِ فِی شَیءٍ قَطُّ اِلَّا زَاتَهُ وَ مَا دَخَلَ الخُرقُ فِی شَیءٍ قَطُّ اِلَّا شَانَهُ بکار بندد. آهو این فصل یاد گرفت و نقشِ کلماتی که از زیرک و زروی شنیده بود، بر سواد و بیاضِ دیده و دل بنگاشت و دعایی لایق حال و ثنایی بهاستحقاق وقت بگفت و بهحکمِ فرمان با کبوتر روی بهمقصد نهاد بهوجهِ صبیح و املِ فسیح و حصولِ مرادِ دل و خصبِ مرادّ امانی، مقضیّالوطر، مرضیّالاثر والنّظر؛ و چون به مقامگاه رسیدند، وحوش حاضر آمدند و به قدومِ ایشان یکدیگر را تهنیت دادند. پس آهو زبان بهذکرِ محاسنِ اوصاف و محامدِ اخلاق و سیَر مرضیّهٔ زیرک بگشود و گفت:
?лаи халқи колрўзи ғозлаҳи алсбо
لَهُ خُلُقٌ کَالرَّوضِ غَازَلَهُ الصَّبَا
Фзўъи фии акнофаи арҷи алзҳр
فَضَوَّعَ فِی اَکنَافِهِ اَرَجَ الزَّهرِ
Язиди алии мар алзмон сҷоҳаҳ
یَزِیدُ عَلَی مَرِّ الزَّمَانِ سَجَاحَهًٔ
Кмозоди тӯли алдҳри фии ъбқи алхмр
کَمَازَادَ طُولُ الدَّهرِ فِی عَبَقِ الخَمرِ
Ва бтмшити корҳои вақту тмнити роҳатҳо ки дар мстқбли ҳоли мутаваққиъ буд , хрмиҳо карданд . Пас дар таблиғи пайғому ашорот зирак истоданду ҷамали васоё ки дар қазоёии умӯри подшоҳӣу раиятии рафта буду усӯлу фусӯлӣ ки дар он боби пардохта буд , бози расониданд ва дилҳо бар қабули тоъати мустақар ва мутмаин шуд . Пас оҳӯи гирди атрофи он ҳудӯди баромад , ҷамоҳири вуҳушро ҷамъ карду боҳтшодии ҳарчи тамомтар рӯй бадаргоҳ зирак ниҳоданд . Кабӯтар барисам ҳиҷобат дар пеш афтод бхдмт расед ва аз расӣдан эшон хабари расонид . Зирак гуфт : ҳар чанд ин соъати ақоиди эшон аз ?мукуаед қасди мо холӣ бошаду змоир аз тасаввури ҷроиру зроири осебу озори мо софӣ , аммо ҳиأти савлату мҳобти мо дар ниҳоди эшон босл фитрат мутамаккинаст , давр набошад ки чун наздик шаванд , бшкўҳнд . Агар якеро дар миёнаи заъфи дил ғолиб бошад ва донишӣ надорад ки Аннани табиат ӯ фурӯ гирад ё аз кайфияти ҳол бехабар бошад , ногоҳ брҷҳд ва рӯй бигурез наад , мабодо ки он ҳаракати бтҳришу ташвиш адо кунаду мӯҷиби тараддуд «у дому тбдди ин низом гардад ва корҳо носохта ва табоҳ бимонад , чунонк рӯбоҳро афтод бо хурӯс . Кабӯтар пурсед : чун буд он ҳикоят ?
و به تمشیتِ کارهایِ وقت و تمنیتِ راحتها که در مستقبلِ حالّ متوقّع بود ، خرّمیها کردند. پس در تبلیغِ پیغام و اشاراتِ زیرک ایستادند و جمل وصایا که در قضایایِ امور پادشاهی و رعیّتی رفته بود و اصول و فصولی که در آن باب پرداخته بود، باز رسانیدند و دلها بر قبولِ طاعت مستقرّ و مطمئن شد. پس آهو گردِ اطراف آن حدود برآمد، جماهیرِ وحوش را جمع کرد و به احتشادی هرچه تمامتر روی به درگاهِ زیرک نهادند. کبوتر بهرسمِ حجابت در پیش افتاد بهخدمت رسید و از رسیدنِ ایشان خبر رسانید. زیرک گفت : هر چند این ساعت عقایدِ ایشان از مکایدِ قصدِ ما خالی باشد و ضمایر از تصورِ جرایر و ضرایر آسیب و آزارِ ما صافی، اما هیأتِ صولت و مهابتِ ما در نهادِ ایشان بهاصلِ فطرت متمکّنست، دور نباشد که چون نزدیک شوند، بشکوهند. اگر یکی را در میانه ضعف دل غالب باشد و دانشی ندارد که عنانِ طبیعت او فرو گیرد یا از کیفیّتِ حال بیخبر باشد، ناگاه برجهد و روی بگریز نهد، مبادا که آن حرکت به تحریش و تشویش ادا کند و موجب تردّد دد و دام و تبدّدِ این نظام گردد و کارها ناساخته و تباه بماند، چنانکه روباه را افتاد با خروس. کبوتر پرسید: چون بود آن حکایت؟