Зирак гуфт : рама ки ҳофизаш ман будам , рама солорӣ дошт мкср , боҷиносу нқўди амволи мстзҳр аммо гилаи гӯсфандон ӯ баъдад кам аз ҳазор будӣ то агар натоҷ аз ҳазор зиёдати гаштӣ , бФрўхтӣ ва аз ҳазор нгзронидӣ . Рӯзии шубон азу пурсед ки дигарон мақоми чокарӣ ту надоранду бсрўту астзҳори сад як ту набошанд , гӯсфандон беш аз ду ҳазор дар гила доранду турои ҳаргизи бҳзори нмирсд , мӯҷиб чист ? гуфт : бдонки ҳазор ниҳоят ададаст ва ҳар онч бғоит расад , ночори ниҳояти мстъқб он шавад ва азин ҷиҳатаст ки ман ин гилаи зер ҳазор дораму зибри ҳазор гила дидам ки муҳосибони арзоқ бар таҳтаи қисмати адади он гӯсфандон аз мартабаи алўФи бмӣот ва ъушрот овараду боҳоди расониду ҳаргизи қусӯру ксўри боъдоди гӯсфандони мо дар қонӯн ҳазорӣ нарасед . Ин фасона аз баҳр он гуфтам ки томни ҳорс рама бошам , аз офати хасмони мҳрўси тавонам буд , аммо чун шиори подшоҳиро млобст кунам , дар мноқшти эшон брхўд кушода бошаму Имороти Фтнҳои бузург аз он аморат тавлид кунаду бостхроҷи асалӣ ки аз таваҳҳуми ҳаловати подшоҳӣ ҳосил ояд , занбӯри хонаи ҳасади аздод бшўронидаҳ бошаму таҳрику тҳриши дӯстон бар душманӣ хеш карда , он ба ки гӯй дар майдон бе поёни ниФкнм ва аз сари ғифлату густохии пои дарин тӣаи мзлм бесар ва бен нануҳум .
زیرک گفت: رمهٔ که حافظش من بودم، رمه سالاری داشت مکثر، باجناس و نقود اموال مستظهر اما گلّهٔ گوسفندان او بعدد کم از هزار بودی تا اگر نتاج از هزار زیادت گشتی، بفروختی و از هزار نگذرانیدی. روزی شبان ازو پرسید که دیگران مقامِ چاکری تو ندارند و بثروت و استظهار صد یکِ تو نباشند، گوسفندان بیش از دو هزار در گلّه دارند و ترا هرگز بهزار نمیرسد، موجب چیست؟ گفت: بدانک هزار نهایت عددست و هر آنچ بغایت رسد، ناچار نهایت مستعقب آن شود و ازین جهتست که من این گلّه زیرِ هزار دارم و زبر هزار گلّه دیدم که محاسبان ارزاق بر تختهٔ قسمت عدد آن گوسفندان از مرتبهٔ الوف بمئات و عشرات آورد و بآحاد رسانید و هرگز قصور و کسور باعداد گوسفندان ما در قانون هزاری نرسید. این فسانه از بهر آن گفتم که تامن حارس رمه باشم، از آفت خصمان محروس توانم بود، اما چون شعارِ پادشاهی را ملابست کنم، در مناقشتِ ایشان برخود گشاده باشم و اماراتِ فتنهای بزرگ از آن امارت تولید کند و باستخراجِ عسلی که از توهّمِ حلاوت پادشاهی حاصل آید، زنبور خانهٔ حسدِ اضداد بشورانیده باشم و تحریک و تحریشِ دوستان بر دشمنی خویش کرده، آن به که گوی در میدانِ بیپایان نیفکنم و از سرِ غفلت و گستاخی پای درین تیهِ مظلمِ بی سر و بن ننهم.
Ба дрнгр , эй дил , Марви онҷои бихира
به درنگر، ای دل، مرو آنجای بخیره
Кони раҳ на бпоӣ чу тўӣӣ ёфта бошад
کان ره نه بپایِ چو توئی یافته باشد
Бар кӣса таррор манеҳ чашм ки ногоҳ
بر کیسهٔ طرّار منه چشم که ناگاه
То дарнигарӣ ҷайб ту бшикофта бошад
تا در نگری جیبِ تو بشکافته باشد
Зрўӣ гуфт : ростаст ин сухан , лекин рост омад аҳволи ҷузи мусаббиб алосбоб надонад ва ин қоида мтрд несту акси ин қазияро ахўот ва назоир бисёраст , чунонк ҳазор худованди ғоятро дидӣ ки аз болои тараққии бншиб инҳитот омаданд , ҳазор соҳиби бдоитро дидӣ ки аз ҳазизи тсФли бзрўаҳи иртифоъи рафтанд . Табиби хизмат табиат кунад , аммо аз бемории он ба шавад ки дору аз дорухонау азои маразати Фҳў ишФин ёбад ва агар беморро аҷал маҳтум дарёбад , табиби млўм ва мъотб набошад , аъмлўои мошӣтм , Фкли муяссари лмои халқи ?ла . Зиракро аз асғоءи ин фусӯл ки ҳамаи усӯли кордонӣ буд , ҳиммат биҷунбаш амл дар кор омад ва гуфт : зимоми тасарруфи ин муҳим дар кафи кифояти ту ниҳодаму Аннани риёзати ин мураккаби ҷмўҳи бадасти ихтиёр ту додам ва дар тҳрии ҷиҳати савобу татаббуъи қиблаи ҳақи турои эмоми сохтам , чунонк майдонӣу митўонӣ беткосл ва туоне кори пеши гир ки ҳар онч ниҳода тақдираст , ломҳолаҳ дар қолаб тадбир ояд ва бар ихтилофи айём бзҳўр расад .
زروی گفت: راستست این سخن، لیکن راست آمدِ احوال جز مسبّبالاسباب نداند و این قاعده مطّرد نیست و عکسِ این قضیّه را اخوات و نظایرِ بسیارست، چنانک هزار خداوندِ غایت را دیدی که از بالایِ ترقّی بنشیبِ انحطاط آمدند، هزار صاحبِ بدایت را دیدی که از حضیضِ تسفّل بذروهٔ ارتفاع رفتند. طبیب خدمتِ طبیعت کند، اما از بیماری آن به شود که دارو از داروخانهٔ وَ اِذَا مَرِضتُ فَهُوَ یَشفِینِ یابد و اگر بیمار را اجلِ محتوم دریابد، طبیب ملوم و معاتب نباشد، اِعمَلُوا مَاشِئتُم، فَکُلٌّ مُیَسَّرٌ لِمَا خُلِقَ لَهُ . زیرک را از اصغاءِ این فصول که همه اصولِ کاردانی بود، همّت بجنبشِ امل در کار آمد و گفت : زمامِ تصرّفِ این مهمّ در کفِ کفایت تو نهادم و عنانِ ریاضت این مرکبِ جموح بدست اختیار تو دادم و در تحرّیِ جهت صواب و تتبّعِ قبلهٔ حقّ ترا امام ساختم، چنانک میدانی و میتوانی بی تکاسل و توانی کار پیش گیر که هر آنچ نهادهٔ تقدیرست، لامحاله در قالبِ تدبیر آید و بر اختلافِ ایّام بظهور رسد.
Ва лӣси амрؤи фии анноси анати силаҳа
وَ لَیسَ امرُؤٌ فِی النَّاسِ اَنتَ سِلَاحُهُ
Ъшиаҳи илқии алҳодсоти боазл
عَشِیَّهَٔ یَلقَی اَلحَادِثَاتِ بِاَعزَلِ
Зрўӣ гуфт : чун ният бар тисири ин мурод наҳодӣ , бояд ки дар анФози ин азимат мтбрм нашӯйу ърўаҳи сримт мнсрм нигарадонеу тараддуду тблди бахотир роҳ надиҳӣ , қавии дилу собити ройу росихи қадаму нофизи азму бедор ҳзм бошӣ то чеҳраи омол аз ҳуҷби имкони базӯдӣ ҷамол диҳаду саодати ҳусӯли он ани қариби сояи афканду маро бо ту суханӣ чандаст ки имрӯз тавонам гуфт на он рўзкаҳи ҳиأти подшоҳии ту дар либос ҳайбат шаваду қомати давлати қбоءи истиқомати дарушад , чаҳ марои даҳшати ҳазрати чунон фурӯ гирад ки сухани агрч дар масолеҳ малик гӯяму маҳосину мқобҳ он хоҳам ки арзи даҳум ва дар ратқу фатқи умӯри давлату рафъу вазъи мабоонии мамлакати нафаси занаму шароити руҷӯъ дар маҷории корҳо бо ройу рӯяти ту риоят кунам , густох ва бевиқору озарм ҳаргиз натавонаму ҷузи бохтлоси фурсату антҳози вақти гуфтан салоҳ набинам ва муқарараст ки баъзе мардум чун аз пояи нозили бдрҷаҳ рафеъ расанд , хуии эшон бигардаду бондозаҳи гардиши ҳоли тафовутӣ дар муоширату суҳбат бо бегонау ошнои падеди оранд . Фардо ки машшотаи тақдири зулфи туро шона занад ва ту дар ойӣнаи бахти бузургии хеши бинӣу хурдии ман , марои дандони он тамаъ ки ту чун дандонаи шона бо ман дар дараҷаи мтўозӣ ва мутасовӣ бошӣ , бибояд кунад то дар миёнаи тӯҳмати иштирок малик нанишинаду бтхолФу тҷонФи мизоҷи кор фасод напазирад . Зирак гуфт : некӯ гуфтӣ , лекини бмсоъдти замони мбоъдти ихвон ҷустан ва бо ахлоءи худ домани хилоءу тҷбр дар замин кашӣдан нишони хисосати нафасу наҷосати арзи вдноءти ҳиммату рдоӣт сират бошад ва аз он маънии тасғиру тнзири миқдор хеш намӯда . Ҳар ончи бшрти гуфтор ва кирдор машрӯтасту бтмшии корҳо мФзӣ , май бояд гуфтану ниқоби шарм аз рӯй маслиҳат ҳол бардоштану ҳарчи бохаллоқи подшоҳони дархураду фармони диҳиро бакор ояд , бози намӯдан то дар кор бастан он тавфиқу гушоиш аз худои ъзўҷли хоҳем . Зрўӣ гуфт : шарт аввал онаст ки бдгўёнро аз муҷовирати хеши даври гирдоне ва ҳар онч бишинавӣ аз нафйу исбот беастқсоу астқроӣӣ ки дар таҳқиқ он равад , ҳукми броҳди алтрФини равои надорӣу боўлини вҳлт бемуҳлат дар самъи ризои худ ҷой надиҳӣ то бар феълӣ ки аз он надомат бояд хӯрд , мубодират нарафта бошад , ё аиҳо аллазӣнаи омнўои ани ҷоءкми фосиқи бнбأи Фтбинўои ани тсибўои қўмои бҷҳолаҳи Фтсбҳўои алии мо Фълтми нодмин ; ва чун аз ду мтҳокми яке бхдмти рафъ зломаҳ кунад , дафъи он бар ҳузури хасму ҷавоб ӯ мавқуфи дорӣу иқтидои бқдўаҳи асҳоби расӯли аллоҳи воҷиби доне , чунонк қозии баҳақу Халифаи мутлақ , амӣралмуъминӣн , алии бен абии толиб , ризвони аллоҳ алайҳ мефармоед : лотқзи лоҳди алхсмини мо лами тсмъи каломи алохр , ва бояд ки забони ббди гуфтану хушунату фӯҳши тъўди нФрмоӣӣ ки исоро алайҳи ассалом , меояд ки вақте бсгии ъқўри девона боз афтод , гуфт : сҳбтки ассалома . Пурседанд ки дар ҳақи чунин ҳайвонии наҷиси чунин лафзӣ чаро фармудӣ ? гуфт : то забони бникӣ хугар шавад ки ъ , хўпзирсти нафаси инсонӣ ва бояд ки самъат аз бади шунидан або кунад ки мусовии халқи агрч дар ҳол асар нанамояд , брўзгор муассир ояду осори он андаки андак пайдо шавад , чунонк мӯшро бо гурба афтод . Зирак пурсед : чун буд он достон ?
زروی گفت: چون نیت بر تیسیرِ این مراد نهادی، باید که در انفاذِ این عزیمت متبرّم نشوی و عروهٔ صریمت منصرم نگردانی و تردّد و تبلّد بخاطر راه ندهی، قویدل و ثابترای و راسخقدم و نافذ عزم و بیدار حزم باشی تا چهرهٔ آمال از حجبِ امکان بزودی جمال دهد و سعادتِ حصول آن عن قریب سایه افکند و مرا با تو سخنی چندست که امروز توانم گفت نه آن روزکه هیأتِ پادشاهیِ تو در لباسِ هیبت شود و قامتِ دولت قباءِ استقامت درپوشد، چه مرا دهشتِ حضرت چنان فرو گیرد که سخن اگرچ در مصالحِ ملک گویم و محاسن و مقابحِ آن خواهم که عرض دهم و در رتق و فتقِ امورِ دولت و رفع و وضعِ مبانیِ مملکت نفس زنم و شرایطِ رجوع در مجاریِ کارها با رای و رویتِ تو رعایت کنم، گستاخ و بیوقار و آزرم هرگز نتوانم و جز باختلاسِ فرصت و انتهازِ وقت گفتن صلاح نبینم و مقرّرست که بعضی مردم چون از پایهٔ نازل بدرجهٔ رفیع رسند، خویِ ایشان بگردد و باندازهٔ گردشِ حال تفاوتی در معاشرت و صحبت با بیگانه و آشنا پدید آرند. فردا که مشّاطهٔ تقدیر زلفِ ترا شانه زند و تو در آیینهٔ بخت بزرگیِ خویش بینی و خردیِ من، مرا دندانِ آن طمع که تو چون دندانهٔ شانه با من در درجه متوازی و متساوی باشی، بباید کند تا در میانه تهمتِ اشتراکِ ملک ننشیند و بتخالف و تجانف مزاجِ کار فساد نپذیرد. زیرک گفت : نیکو گفتی، لیکن بمساعدتِ زمان مباعدتِ اخوان جستن و با اخلاءِ خود دامنِ خیلاءِ و تجبّر در زمین کشیدن نشانِ خساستِ نفس و نجاستِ عرض ودناءتِ همّت و ردائتِ سیرت باشد و از آن معنی تصغیر و تنزیرِ مقدارِ خویش نموده. هر آنچ بشرطِ گفتار و کردار مشروطست و بتمشیِّ کارها مفضی، میباید گفتن و نقابِ شرم از رویِ مصلحت حال برداشتن و هرچ باخلاقِ پادشاهان درخورد و فرماندهی را بکار آید، باز نمودن تا در کار بستنِ آن توفیق و گشایش از خدای عَزَّوَجَلَّ خواهیم. زروی گفت: شرطِ اوّل آنست که بدگویان را از مجاورتِ خویش دور گردانی و هر آنچ بشنوی از نفی و اثبات بی استقصا و استقرائی که در تحقیق آن رود، حکم براحد الطرفین روا نداری و باولین وهلت بی مهلت در سمعِ رضایِ خود جای ندهی تا بر فعلی که از آن ندامت باید خورد، مبادرت نرفته باشد ، یَا اَیُّهَا الَّذِینَ آمَنُوا اِن جَاءَکُم فَاسِقٌ بِنَبَأٍ فَتَبَیَّنُوا اَن تُصِیبُوا قَوما بِجَهَالَهٍٔ فَتُصبِحوُا عَلَی مَا فَعَلتُم نَادِمِینَ ؛ و چون از دو متحاکم یکی بخدمت رفعِ ظلامه کند، دفعِ آن بر حضورِ خصم و جوابِ او موقوف داری و اقتدا بقدوهٔ اصحابِ رسول الله واجب دانی، چنانک قاضیِ بحقّ و خلیفهٔ مطلق، امیرالمؤمنین ، علیّبنابیطالب، رِضوَانُ اللهِ عَلَیهِ میفرماید : لَاتَقضِ لِاَحَدِ الخَصمَینِ مَا لَم تَسمَع کَلَامَ الاخَرِ،و باید که زبان ببد گفتن و خشونت و فحش تعوّد نفرمائی که عیسی را عَلَیهِ السَّلامُ ، میآید که وقتی بسگی عقور دیوانه باز افتاد، گفت : صَحِبتَکَ السَّلَامَهُٔ . پرسیدند که در حقّ چنین حیوانی نجس چنین لفظی چرا فرمودی؟ گفت : تا زبان بنیکی خوگر شود که ع ، خوپذیرست نفس انسانی و باید که سمعت از بد شنیدن ابا کند که مساویِ خلق اگرچ در حال اثر ننماید، بروزگار مؤثّر آید و آثارِ آن اندک اندک پیدا شود ، چنانک موش را با گربه افتاد. زیرک پرسید: چون بود آن داستان؟