Зрўӣ гуфт : шунидам ки зоғиро духтарӣ буд покизаи хилқат ки дар ҷилваи гоҳи ҷамоли хеши тоўсро хира кардӣ ва дар пардаи тъззу ошиёнаи таазури меҳри нигини ъзртши ин нақш доштӣ :

زروی گفت: شنیدم که زاغی را دختری بود پاکیزه خلقت که در جلوه‌گاهِ جمالِ خویش طاوس را خیره کردی و در پردهٔ تعزّز و آشیانهٔ تعذّر مهر نگینِ عذرتش این نقش داشتی :

Рухам махоҳ ки ?харчади рост дар ҳуққа

رخم مخواه که خرشید راست در حقّه

Лабами маҳвӣ ки симурғи рост дар минқор

لبم محوی که سیمرغ راست در منقار

Мурғон дар ҳар чамании булбул сифат навой ӯ задандӣу булбулаи вор дар чамонаи бшодии ҷамол ӯ хўрдндӣ . Бӯмиро магари савдоӣ он бархест ки он тоқи хубонро ҷуфт хеш гирданд , даллола бмодрш фиристод ӯро хосторӣ кард . Зоғи духтарро пеш хонд ва гуфт : эй фарзанд , ашроф аз атрофи бморўӣ ниҳодаанду бхтбту рағбати ту танозӯъ ва тазоҳум меравад , лекин мехоҳам ки турои бшўҳрии даҳум , чунонк фармонпазиру зердасти ту буду пой аз андозаи гилӣми хеш зиёдат накушуд . Имрӯзи бӯмии бостдъо кас фиристодаст , агар брзои ту мақрун меуфтад , аз ҳама ӯ лоиқтар , чаҳ баҳри нокомӣ ки аз ту бинад , тани дрдҳд , ҳам бхдмту мурооти ту млҷأ тавонад буд ва ҳам бҳкму фармони ту мулҷам чун фохтаи бтўқи мънбри ннозд ва чун ҳудҳуди бтоҷи мурассаъи сари нФрозд ва чун кабӯтари даъвӣ улувва насаб накунад ва чун эй оламёнро бФрсоиаҳи хеш муҳтоҷ надонад , ирзии бзиқи ъшаҳу иқнъи бзнки айша ; агар бо ӯ бозӣ шукр гуяд ва агараш бисӯзӣ , барг шикоят надорад .

مرغان در هر چمنی بلبل‌صفت نوایِ او زدندی و بلبله‌وار در چمانه بشادیِ جمال او خوردندی. بومی را مگر سودایِ آن برخاست که آن طاقِ خوبان را جفتِ خویش گرداند، دلّالهٔ بمادرش فرستاد او را خواستاری کرد. زاغ دختر را پیش خواند و گفت : ای فرزند، اشراف از اطراف بماروی نهاده‌اند و بخطبت و رغبتِ تو تنازع و تزاحم میرود، لیکن میخواهم که ترا بشوهری دهم، چنانک فرمان پذیر و زیردست تو بود و پای از اندازهٔ گلیمِ خویش زیادت نکشد. امروز بومی باستدعا کس فرستادست، اگر برضایِ تو مقرون می‌افتد، از همه او لایق‌تر، چه بهر ناکامی که از تو بیند، تن دردهد، هم بخدمت و مراعاتِ تو ملجأ تواند بود و هم بحکم و فرمانِ تو ملجم چون فاخته بطوقِ معنبر ننازد و چون هدهد بتاجِ مرصّع سر نفرازد و چون کبوتر دعویِ علوِّ نسب نکند و چون همای عالمیان را بفرِّسایهٔ خویش محتاج نداند ، یَرضَی بِضِیقِ عُشِّهِ وَ یَقنَعُ بِضَنکِ عَیشِهِ ؛ اگر با او بازی شکر گوید و اگرش بسوزی، برگِ شکایت ندارد .

Лкли ман алоёми ъндии ода

لِکُلٍّ مِنَ الاَیَّامِ عِندِیَ عَادَهٌٔ

?фони соءнии сабру ани сари неи шукр

فَاِن سَاءَنِی صَبرٌ وَ اِن سَرَّ نِی شُکرُ

Зоғ бача гуфт : эй модар , некӯ гуфтӣ ва дарин сухани осӯдагӣу фироқи хотири ман май талабӣ , лекини шавҳарӣ ки ман ӯро задан ва рондан тавонам , дар миёни мурғон чаҳ миқдор дорад ва чун шавҳар чунин бошад , маро дар миёни тавоифи мардумону ақрон чаҳ сарбаландӣ бошад ? ман аз баҳри рғодти айши хеши вғодти шавҳар чигуна раво дорам ки худ дар ҳукм ӯ бошам ?

زاغ بچّه گفت: ای مادر، نیکو گفتی و درین سخن آسودگی و فراغِ خاطر من می‌طلبی، لیکن شوهری که من او را زدن و راندن توانم، در میانِ مرغان چه مقدار دارد و چون شوهر چنین باشد، مرا در میانِ طوایفِ مردمان و اقران چه سربلندی باشد؟ من از بهر رغادتِ عیشِ خویش وغادتِ شوهر چگونه روا دارم که خود در حکمِ او باشم ؟

Алорби зли соқи ллнФси ъзаҳ

اَلَارَبَّ ذُلٍّ سَاقَ لِلنَّفسِ عِزَّهًٔ

Алорби зли соқи ллнФси ъзаҳ

اَلَارَبَّ ذُلٍّ سَاقَ لِلنَّفسِ عِزَّهًٔ

Ин фасона аз баҳр он гуфтам ки чун бар сипоҳи ту сояи ман гарон бияёду пеши ту пояи ман баланд набенанд , ҳам малики ту бешиква бошад ва ҳам душмани ман беҳарос . Зирак гуфт : ин сухан ҳам бигӯаш ҷон асғо рафту андеша бар танфизи аҳком он гумошта шуд . Агар аз завобиту равобити ин кор чизе боқӣаст бигӯӣ ва ногуфта магузор ки ҳар ончи гўӣӣ аз қабули он чора нест .

این فسانه از بهر آن گفتم که چون بر سپاه تو سایهٔ من گران بیاید و پیشِ تو پایهٔ من بلند نبینند، هم ملکِ تو بی‌شکوه باشد و هم دشمنِ من بی‌هراس. زیرک گفت: این سخن هم بگوشِ جان اصغا رفت و اندیشه بر تنفیذ احکامِ آن گماشته شد. اگر از ضوابط و روابطِ این کار چیزی باقیست بگوی و ناگفته مگذار که هر آنچ گوئی از قبولِ آن چاره نیست.

Ва ании луи тъонднии шимолӣ

وَ اِنّی لَو تَعَانِدُنِی شِمَالِی

Ънодки мо васлати баҳои яминӣ

عِنَادَکَ مَا وَصَلتُ بِهَا یَمِینِی

Зрўӣ гуфт : бдонк чун ман камари чокарии ту бар миёни бастам ва ту кулоҳи меҳтарӣ барсар наҳодӣ , ман ҳар суханӣ агрч донам , бо ту натавонам гуфт , чунонк он мардро бо дарахти мардум параст афтод . Зирак пурсед ки чун буд он достон ?

زروی گفت: بدانک چون من کمرِ چاکری تو بر میان بستم و تو کلاهِ مهتری برسر نهادی، من هر سخنی اگرچ دانم، با تو نتوانم گفت، چنانک آن مرد را با درختِ مردم‌پرست افتاد. زیرک پرسید که چون بود آن داستان ؟