Рӯбоҳ гуфт ки мардии штрбони шутурӣ боркаш дошт . Ҳар рӯз аз намаки зори харвории намак бар пушт ӯ наҳодӣ ва бшҳр оварадӣ фурӯхтанро . Рӯзӣ бичишам раҳмат бо шутури млоҳзтӣ воҷиб диду ҷиҳати тахфиф , сар ӯ ба саҳро дод то ба ихтиёри хеш дамӣ бароварду лаҳза Эй биёсоед . Иттифоқан харгӯшӣ ки дар собиқи ҳол бо ӯ долтӣ ва ошноӣ дошт , онҷо расед . Ҳар дуро мулоқотӣ ки муддатҳо пеши дидаи орзӯ буд , аз ҳиҷоби интизор берун омад ва ба дидори якдигар аз ҷонибин артёҳии тамом ҳосил шуд ва ба търФи аҳволи тътФ ҳо намуданд . Харгӯш гуфт :

روباه گفت که مردی شتربان شتری بارکش داشت. هر روز از نمک‌زار خرواری نمک بر پشت او نهادی و بشهر آوردی فروختن را. روزی بچشمِ رحمت با شتر ملاحظتی واجب دید و جهتِ تخفیف، سرِ او به صحرا داد تا به اختیارِ خویش دمی برآورد و لحظه‌ای بیاساید. اتّفاقاً خرگوشی که در سابقِ حال با او دالّتی و آشنايی داشت، آنجا رسید. هر دو را ملاقاتی که مدتها پیش دیدهٔ آرزو بود، از حجابِ انتظار بیرون آمد و به دیدارِ یکدیگر از جانبین ارتیاحی تمام حاصل شد و به تعرّفِ احوال تعطّف‌ها نمودند. خرگوش گفت :

Грч ёдам накунӣ ҳеҷ фаромӯш на

گرچ یادم نکنی هیچ فراموش نهٔ

Ки маро бо туу ёди ту фаровон кораст

که مرا با تو و یادِ تو فراوان کارست

Аз онгаҳ ки ҳўоили фироқ дар миён омаду ҷбоили висол ба инқитоъ расед , ба гӯшае аз миёни ҳам нафасони сидқ афтодаам ва дар кунҷӣ аз завоёии инзивоу ваҳшати ҳайси лои мзокру лои анису лои мсомру лои ҷлиси нишемани сохтау пайвастаи ҷозиба ӣ иштиёқи ту муҳаррики силсила хотир будасту доъияи талаби ҳалқаи тақозои лақои мубораку равои азизи ту ҷнбонидаҳ , пас нек дар шутур нигаҳ кард , ӯро сахти зор ва назору заъиф ва наҳиф ёфт . Гуфт : эй бародар , ман туро аз фарбеҳии кӯҳ пайкарӣ дидам ки аз ммхзаҳи кўҳонти ҳама равған чакидӣ ва ба ҳеҷ равған андудани адими ҷилди ту муҳтоҷ набӯдӣ , магар аз баси оради сари алаф ки бтўоҳну нўоҷзт фурӯ мерафт , хамири мнсмро мадад медодӣ ки бағал ба гардаи клкли чунон огндаҳ доштӣ , ба шонаи пушту оинаи зонуи ҳамаи солаи машшотагарӣ шҳм ва лаҳм мекардӣ , злиъӣ будӣ ки аз мқўси азлоъат бар чаҳор қувоем як фараҷаи муфассал аз саман холӣ набӯдӣ , зиндаи пелони занҷири гулро аз арбадаи мастии ту санг дар дандон меомад , ҳдири ҳанҷараи ту зӣири змҷраҳи шер дар гулӯ май шикаст . Имрӯз май бинмти асари қӯту нишот аз зрўаҳи сенаам дар ҳазизи троҷъи омадау муҳраи пушт аз захми зарби ҳаводис дар кушоди афтода ва аз бе тоқатии ҷроб кӯҳон биниҳода , ҷрб бар гирифта , биҷои суфи музайяну шеъри млўн дар шиори сробили Қатарони рафта , рӯзгори он ҳамаи пунбаи тухм дар ғрораҳи шикамати паймӯда , ин ҳамаи пашм берун дода , чаҳ афтодаст ки чун шогирди расани тоби бози пас май шӯй , магари ҳам азин пашмаст ки чанбари гарданати бад-ӣни борикӣ май рейсаду якбора масх гаштае ?у қалами насх дар ҷарида аҳволат кашида , охири мизоҷи шарифу табъи Каримро чаҳ раседаст ки сабаби тбдли ҳолу мӯҷиби заволи он камол омад ? шутур гуфт : аз карам шему ҳасани шамоили ту ҳамин пурсишу тафаққуд чашм дорам . Акнӯн ки пурседӣ ,

از آنگه که حوایلِ فراق در میان آمد و جبایلِ وصال به انقطاع رسید، به گوشه‌ای از میان هم‌نفسانِ صدق افتاده‌ام و در کنجی از زوایایِ انزوا و وحشت حَیثُ لَا مُذَاکِرَ وَ لَا اَنِیسَ وَ لَا مُسَامِرَ وَ لَا جَلِیسَ نشیمن ساخته و پیوسته جاذبه‌ی اشتیاق تو محرّک سلسلهٔ خاطر بودست و داعیهٔ طلب حلقهٔ تقاضایِ لقایِ مبارک و روایِ عزیز تو جنبانیده ، پس نیک در شتر نگه کرد، او را سخت زار و نزار و ضعیف و نحیف یافت. گفت : ای برادر ، من ترا از فربهی کوه‌پیکری دیدم که از ممخضهٔ کوهانت همه روغن چکیدی و به هیچ روغن اندودن ادیمِ جلدِ تو محتاج نبودی ، مگر از بس آرد سر علف که بطواحن و نواجذت فرو می‌رفت، خمیرِ منسم را مدد می‌دادی که بغل به گردهٔ کلکل چنان آگنده داشتی، به شانهٔ پشت و آینهٔ زانو همه ساله مشاطه‌گری شحم و لحم می‌کردی، ضلیعی بودی که از مقوّسِ اضلاعت بر چهار قوایم یک فرجهٔ مفصل از سمن خالی نبودی، زنده پیلانِ زنجیر گل را از عربدهٔ مستی تو سنگ در دندان می‌آمد، هدیرِ حنجرهٔ تو زئیر زمجرهٔ شیر در گلو می‌شکست. امروز می‌بینمت اثرِ قوّت و نشاط از ذروهٔ سنام در حضیض تراجع آمده و مهرهٔ پشت از زخمِ ضربِ حوادث در گشاد افتاده و از بی‌طاقتی جرابِ کوهان بنهاده ، جرب بر گرفته، بجایِ صوفِ مزیّن و شعرِ ملوّن در شعارِ سرابیل قطران رفته ، روزگار آن همه پنبه تخم در غرارهٔ شکمت پیموده، این همه پشم بیرون داده ، چه افتادست که چون شاگردِ رسن‌تاب باز پس می‌شوی، مگر هم ازین پشم است که چنبرِ گردنت بدین باریکی می‌ریسد و یکباره مسخ گشته‌ای؟ و قلمِ نسخ در جریدهٔ احوالت کشیده، آخر مزاجِ شریف و طبعِ کریم را چه رسیدست که سبب تبدّلِ حال و موجبِ زوالِ آن کمال آمد؟ شتر گفت : از کرمِ شیم و حسنِ شمایلِ تو همین پرسش و تفقّد چشم دارم. اکنون که پرسیدی،

Самоъи аҷиби лмни истмъ

سَمَاعٌ عَجِیبٌ لِمَن یَستَمِع

Ҳадиси ҳадис ба интФъ

حَدِیثٌ حَدِیثٌ بِهِ یَنتَفِع

Румонӣ алзмон бأъҷўбаҳ

رَمَانِی الزَّمَانُ بِأُعجُوبَهٍٔ

Ткоди алҷболи лҳои тнсдъ

تَکَادُ الجِبَالُ لَهَا تَنصَدِع

Бъўроءи тъсри фии зайлҳо

بِعَورَاءَ تَعثِرُ فِی ذَیلِهَا

Ва ъзроءи тأбии алии алмФтръ

وَ عَذرَاءَ تَأبَی عَلَی المُفتَرِع

Бўоқъаҳи ҳурати ман ҳузнҳо

بِوَاقَعِهًٔ حِرتُ مِن حُزنِهَا

Комаи ҳори фии алҳзни ъоФи вақъ

کَمَا حَارَ فِی الحَزنِ عَافٍ وَقِع

Бдонки ҷуз бе раҳмии штрбон ки худованд манасту зимоми тасхиру тзлили ман ба даст ӯ додаанд , чизеи дигар чун нузули макрӯҳӣ бар соҳати аҳволу удӯли мизоҷ аз ҷодаи эътидол ки аз мӯҷиботи ин шакл тавонад буд , нест , лекини муддатии дарози сет то ҳар рӯз ба ҳукми таклифу тъниФ аз масофати давр бо ин ҳамаи нҳоФту ҳзол ки май бинӣ , харвории намак беш аз миқдори одат бар пушти ман наад то ба шаҳри кашам . Ҳаргиз бар дил ӯ нагзарад ки порае азин бори азоби азу вазъ кунам , мисқоли заррае азин тангу банди асқоли камтари гардонам . Лоҷарами пушти тоқатами бад-ӣни сифат ки май бинӣ , шикаста шуд . Наздикаст ки ба тамаъи туъмаи хеши зоғ дар камони гарданам ошён кунад ва аз баҳри гӯштӣ ки бар ман ба тир наметавон зад , кргс дар мҳоҷри дидагонами байза наад . Калоғ бар қалъаи қоматами баъд аз чаҳор такбир ки бар саломатам занад , наайб нъии برارد . Ҳеҷ тадбирии дафъи ин доҳиаҳро намешиносам ҷузи онки худро фарои кори даҳум ва бо пеш оварад рӯзгор май созам , даст ба қибла дуо медорам ва анину ҳнин аз ҳноёии сина ба ҳазрати самиъ мҷиб мефиристам ва мегӯям :

بدانک جز بی‌رحمی شتربان که خداوندِ من است و زمامِ تسخیر و تذلیل من به‌دست او داده‌اند، چیزی دیگر چون نزولِ مکروهی بر ساحتِ احوال و عدولِ مزاج از جادّهٔ اعتدال که از موجباتِ این شکل تواند بود ، نیست، لیکن مدتی دراز‌ست تا هر روز به حکمِ تکلیف و تعنیف از مسافتِ دور با این همه نحافت و هزال که می‌بینی، خرواری نمک بیش از مقدارِ عادت بر پشتِ من نهد تا به شهر کشم. هرگز بر دلِ او نگذرد که پاره‌ای ازین بارِ عذاب ازو وضع کنم، مثقال ذرّه‌ای ازین تنگ و بند اثقال کمتر گردانم. لاجرم پشتِ طاقتم بدین صفت که می‌بینی، شکسته شد. نزدیک است که به طمع طعمهٔ خویش زاغ در کمان گردنم آشیان کند و از بهر گوشتی که بر من به تیر نمی‌توان زد، کرگس در محاجرِ دیدگانم بیضه نهد. کلاغ بر قلعهٔ قامتم بعد از چهار تکبیر که بر سلامتم زند، نعیبِ نعی برآرد. هیچ تدبیری دفعِ این داهیه را نمی‌شناسم جز آنک خود را فرا کار دهم و با پیش‌آوردِ روزگار می‌سازم، دست به قبلهٔ دعا می‌دارم و انین‌ و‌ حنین از حنایایِ سینه به حضرتِ‌ سمیع مجیب می‌فرستم و می‌گویم :

эй дил чу кашид ҳиҷр дар занҷири т

ای دل چو کشید هجر در زنجیر‌ت

Дар даст намонад ҷузи яке тадбири т

در دست نماند جز یکی تدبیر‌ت

Тадбири ту ҷузи тир саҳаргоҳӣ нест

تدبیرِ تو جز تیر سحرگاهی نیست

Тадбири ту ҷузи тир саҳаргоҳӣ нест

تدبیرِ تو جز تیر سحرگاهی نیست

Харгӯш гуфт : агрчи худро ба дасти қзоءи маҳтум додан ва бо дода эзади кому нокоми сохтани қазияи ақл ва шаръаст , аммо чун ҳодисаи азияту оризаи билетро дафъии тавон андешидан , бидон розӣ набояд шуд ва ба тқоъсу ткосл бар набояд барад . Туро ба ҳилтӣ иршод кунам ки мнқзӣ бошад азин ғарқоби бало ки дар афтодае , шутурро азин сухани буии роҳат ба машом ҷон расед ва гуфт :

خرگوش گفت‌: اگرچ خود را به دستِ قضاءِ محتوم دادن و با دادهٔ ایزد کام و ناکام ساختن قضیّهٔ عقل و شرع است، اما چون حادثهٔ اذیّت و عارضهٔ بلیّت را دفعی توان اندیشیدن، بدان راضی نباید شد و به تقاعس و تکاسل بر نباید برد. ترا به حیلتی ارشاد کنم که منقذی باشد ازین غرقاب بلا که در افتاده‌ای‌، شتر را ازین سخن بویِ راحت به مشامِّ جان رسید و گفت‌:

эй марҳами сад ҳазор хаста

ای مرهمِ صد هزار خسته

Ваии шодии сад ҳазор ғамгин

وی شادیِ صد هزار غمگین

Вай аз ҳамаи рўбҳои надида

وی از همه روبها ندیده

Рои ту злом рӯй тахмин

رایِ تو ظلامِ روی تخمین

Ҳар илтизом ки ту ба карами аҳд хеш кардае , лозимаи вафои қаринаи он гардонида ва аз ӯҳдаи ҳамаи беруни омада . Акнӯн бифармоӣ то тариқаи тасаллии ман азин меҳнат чист ? харгӯш гуфт : тадбир онаст ки чун бор намак баргирӣ ва ба шаҳри ое . Бар гузаргоҳат равад обасту турои ночор аз онҷо май бояд гузашт . Чун ба миёна равад оби рисӣ , фурӯ нишин , чндонк аз намаки нимӣ бгзозд , пас бархез ва май рӯи осӯдау сабки бор . Ҳргаҳ ки як ду бори барин қоида рафтӣ , штрбонро агрчи намак бар ҷароҳат афшонда бошӣ , Фимои баъди бори намакат ба андозаи вусъ наад . Шутурро аз шунидани ин сухани хаёл овоз равад дар самъ дил нишаст . Хости пеш аз онкии мазраби зону ба равад расонад , сурӯдӣ аз фарти нишоти он ҳолат баркашаду рақсӣ ки ба самоъи ҳдои ҳеҷ ҳодӣ накард , бидон калима ки ҳодии тариқи наҷот ӯ буд , дар гирифт .

هر التزام که تو به کرم عهدِ خویش کرده‌ای‌، لازمهٔ وفا قرینهٔ آن گردانیده و از عهدهٔ همه بیرون آمده. اکنون بفرمای تا طریقهٔ تسلّیِ من ازین محنت چیست‌؟ خرگوش گفت‌: تدبیر آن است که چون بارِ نمک برگیری و به شهر آیی. بر گذرگاهت رودِ آب است و ترا ناچار از آنجا می‌باید گذشت. چون به میانهٔ رودِ آب‌ رسی ، فرو نشین، چندانک از نمک نیمی بگذازد‌، پس برخیز و می‌رو آسوده و سبک‌بار. هرگه که یک دو بار برین قاعده رفتی ، شتربان‌را اگرچ نمک بر جراحت افشانده باشی، فِیما بَعد بارِ نمکت به اندازهٔ وسع نهد . شتر را از شنودنِ این سخن خیال آواز رود در سمعِ دل نشست. خواست پیش از آنکه مضربِ زانو به رود رسانَد، سرودی از فرطِ نشاط آن حالت برکشد و رقصی که به سماعِ حدایِ هیچ حادی نکرد، بدان کلمه که هادیِ طریق نجاتِ او بود، در گرفت.

Ва ҳадисҳо колғиси исмъаҳ

وَ حَدِیثَهَا کَالغَیثِ یَسمَعُهُ

Роъии синӣни ттобъти ҷдбо

رَاعِی سِنِینَ تَتابَعَت جَدبَا

Фисихи мстмъои лдртаҳ

فَیُصِیخُ مُستَمِعا لِدِرَّتِهِ

Фисихи мстмъои лдртаҳ

فَیُصِیخُ مُستَمِعا لِدِرَّتِهِ

Рӯзи дигар ки ҷлоҷли кавокиб аз аътоФу мнокби ин ҳиўни саъб фурӯ гушӯданд , штрбони шутурро ҳўид бар ниҳод ва ба намаки зори бараду ончи муваззаф буд аз бори шутур , бирав рост карду шутур ба оҳанги андеша хеш меомад то ба миёна равад расед ; захмаи тадбирӣ ки сохта буд , бакор оварад ва фурӯ нишаст . Яъне вақтаст ки обӣ ба рӯй кори орму бори ғам аз дил баргирам . Штрбони аштлмии оғози ниҳоду чӯбӣ чанд бар паҳлавӣ шутур молида , пас аз дирангӣ бисёр аз ҷой бархесту навбатӣ чанд ин ҳол мукаррар шуд . Штрбонро мукофотӣ ки эҷоби табиати хезад , дар кор омад . Рӯзии дигар ба ҷои намаки бор ӯ пашм барниҳод ва меронад то ба равад расед , ба қоидаи гузашта фурӯ нишаст . Штрбони хомӯши гашту сабр бакор оварад , чндонкаҳи пашми об дар худ гирифту бор гарон шуд . Чун оҳанг хез кард , натавонист , ба ҷаҳди тамому кӯшиши балиғ аз ҷой бархесту нҳни комаи кно бар хонду зёдтӣ , иловаи бор бар сифти гирифта рӯй ба роҳ оварад . Штрбони биҷои ҳаду нишот ангез шуду тарабомез ин суфта дар бориш май ниҳод ва мегуфт :

روز دیگر که جلاجلِ کواکب از اعطاف و مناکبِ این هیون صعب فرو گشودند‌، شتربان شتر را هوید بر نهاد و به نمک‌زار برد و آنچ موظّف بود از بار شتر‌، برو راست کرد و شتر به آهنگ اندیشهٔ خویش می‌آمد تا به میانهٔ رود رسید؛ زخمهٔ تدبیری که ساخته بود، بکار آورد و فرو نشست. یعنی وقت است که آبی به رویِ کار آرم و بارِ غم از دل برگیرم. شتربان اشتلمی آغاز نهاد و چوبی چند بر پهلویِ شتر مالید، پس از درنگی بسیار از جای برخاست و نوبتی چند این حال مکرّر شد. شتربان را مکافاتی که ایجابِ طبیعت خیزد، در کار آمد. روزی دیگر به جایِ نمک بارِ او پشم برنهاد و می‌راند تا به رود رسید‌، به قاعدهٔ گذشته فرو نشست. شتربان خاموش گشت و صبر بکار آورد، چندانکه پشم آب در خود گرفت و بار گران شد. چون آهنگِ خیز کرد، نتوانست، به جهد تمام و کوششِ بلیغ از جای برخاست و نَحنُ کَمَا کُنَّا بر خواند و زیادتی، علاوهٔ بار بر سفت گرفته روی به راه آورد. شتربان بجایِ حد و نشاط‌انگیز شد وِ طرب‌آمیز این سفته در بارش می‌نهاد و می‌گفت :

Дарахтӣ ки прўрдӣ омад ба бор

درختی که پروردی آمد به بار

Бидидӣ ҳам акнӯн буриш дар канор

بدیدی هم‌اکنون برش در کنار

Агар бор хораст , худ кушта Эй

اگر بار خار است‌، خود کشته‌ای

Вагар парниёни сети худ ришта Эй

وگر پرنیان‌ست خود رشته‌ای

эй дарози аҳмақ вае сияҳи гилӣми нодон , ъ , ҳифзати шиӣأу ғобти ънки ашёъи хостӣ ки ба эъроз аз бор кашӣдан шутур мурғ бошӣ ва ба андешаи он ба равад задӣ ки он захмаи носоз дар парда бимонад , танати дарин андеша чун абрешими борӣк шуда буд ман пашм бирав ниҳодам ки ҳеҷ равад ки аз пашму абрешимсозӣ , созӣ нагирад . Хостӣ ки баъзе аз бор намак биндозӣу ҳуқуқи нону намаки ман зойеъгузорӣ , лекини ту шӯрбахт , ҳамаи солаи шӯраи хӯрдаи а ӣ , завқи деги савдое ки май пухтӣ , нашинохтӣ ва надонистӣ ки он дегро ҳазор харвори азин намаки дарме бояд . Ин фасона аз баҳр он гуфтам то доне ки душман низ аз андешаи мкоидти мо холӣ набошад ва аммо рои сулҳ талабидан ва аз дар тасоҳулу тасомӯҳ даромадану ҳадоёии туҳафу тараф фиристодан ғалат меуфтад . Ҳаркии ибтидо ба сулҳ кунад , урати аҷзи хеш бар душман зоҳир карда бошад ва ӯро бар худ чираи дилу ғолиби дасту қавии рои гардонидаи савоби он май намояди валлоҳи аълам ки расӯлиро ирсол кунем бе инзимоми ҳадяу тӯҳфа ва аз худ шикваи мандӣу ҳайбату анбӯҳии лашкар ва як дилии бандау озод бадв намоем . Чунонк аз ҳарби брондишду дўоъии ҳамият дар бўотни сипоҳ ту биҷунбад то зғинту Ҳафизати душманон дар дарун дил гиранду хӯни асабят дар аъсоби душманон фусурда шаваду нўоири ҳақаду кӣна дар синаҳои эшон мнтФӣ гардаду мроири ғазаб ба анФсоми анҷомаду андешаи офияти талабии ъёФтӣу набувватӣ аз кори ҷанг дар тбоъи эшон падеди ораду расӯл аз мабоонии кори он давлату масолики русуми он қавми неки бррсду қиёси миқдори лашкар боз гираду мувофиқату мунофиқат аз умуми мтҷндаҳи эшон дар роҳи бандагӣу ӣстодагии бакори масолеҳи малик тамом бишносад ва аз шуҷоату ҷбонти дилу ркокту метанати рои ҳамаи моро огоҳ кунад то тадбири мо бар вифқи маслиҳати ҳоли муассир ва мусмир ояд ки худованди ҷангро дар се вақт аз авқоти муҳтоту бедор бояд буд яке вақти пирӯзӣу зафар бар хасм то саҳван ӯ ъмдои ҳаракатӣ ҳодис нашавад ки фоидаи саъйро ботил кунад , дигари вақти сулҳу мусолимат то бأҳсни алўҷўаҳи кори чунон даст дарҳам диҳад ки хасмро мақоми хавфу тамаъ боқӣ монад , сиўми вақти таъаллулу таъаммул кардану рӯзгори бурдан то магари бأлтФи олҳили офати ҳарбу қаттол аз миёна ба кифоят расад .

ای درازِ احمق و ای سیه‌گلیمِ نادان‌، ع ، حَفِظتَ شَیئأ وَ غَابَت عَنکَ اَشیَاءُ خواستی که به اعراض از بار کشیدن شتر‌مرغ باشی و به اندیشهٔ آن به رود زدی که آن زخمهٔ ناساز در پرده بماند، تنت درین اندیشه چون ابریشم باریک شده بود من پشم برو نهادم که هیچ رود که از پشم و ابریشم‌سازی‌، سازی نگیرد. خواستی که بعضی از بار نمک بیندازی و حقوق نان و نمکِ من ضایع گذاری، لیکن تو شوربخت‌، همه ساله شوره خورده‌ا‌ی، ذوقِ دیگ سودایی که می‌پختی، نشناختی و ندانستی که آن دیگ را هزار خروار ازین نمک درمی‌باید. این فسانه از بهرِ آن گفتم تا دانی که دشمن نیز از اندیشهٔ مکایدتِ ما خالی نباشد و اما رایِ صلح طلبیدن و از درِ تساهل و تسامح درآمدن و هدایایِ تحف و طرف فرستادن غلط می‌‌افتد. هرکه ابتدا به صلح کند‌، عورتِ عجز خویش بر دشمن ظاهر کرده باشد و او را بر خود چیره‌دل و غالب‌دست و قوی‌رای گردانیده صواب آن می‌نماید وَاللهُ اَعلَم که رسولی را ارسال کنیم بی‌انضمامِ هدیّه و تحفه و از خود شکوه‌مندی و هیبت و انبوهیِ لشکر و یک‌دلیِ بنده و آزاد بدو نماییم. چنانک از حرب براندیشد و دواعی حمیّت در بواطنِ سپاه تو بجنبد تا ضغینت و حفیظتِ دشمنان در درون دل گیرند و خونِ عصبیّت در اعصابِ دشمنان فسرده شود و نوایرِ حقد و کینه در سینه‌هایِ ایشان منطفی گردد و مرایرِ غضب به انفصام انجامد و اندیشهٔ عافیت‌طلبی عیافتی و نبوتی از کار جنگ در طباعِ ایشان پدید آرد و رسول از مبانیِ کارِ آن دولت و مسالکِ رسومِ آن قوم نیک بررسد و قیاسِ مقدار لشکر باز گیرد و موافقت و منافقت از عموم متجنّدهٔ ایشان در راهِ بندگی و ایستادگی بکار مصالحِ ملک تمام بشناسد و از شجاعت و جبانت دل و رکاکت و متانتِ رای همه ما را آگاه کند تا تدبیر ما بر وفق مصلحت حال مؤثّر و مثمر آید که خداوندِ جنگ را در سه وقت از اوقات محتاط و بیدار باید بود یکی وقتِ پیروزی و ظفر بر خصم تا سهواً او عمداً حرکتی حادث نشود که فایدهٔ سعی را باطل کند‌، دیگر وقتِ صلح و مسالمت تا بأحسَنِ الوُجوه کار چنان دست درهم دهد که خصم را مقامِ خوف و طمع باقی ماند، سیوم وقتِ تعلّل و تأمّل کردن و روزگار بردن تا مگر بألطَفِ الحِیلَ آفتِ حرب و قتال از میانه به کفایت رسد.

Алроӣ қабл шуҷоъаи алшҷъон

اَلرَّایُ قَبلَ شَجَاعَهِٔ الشَّجعَانِ

Ҳўи аввалу ҳаии алмҳли ассонӣ

هُوَ اَوَّلٌ وَ هیَ المَحلُّ الثَّانِی

Пас гургро бгзиднд , ки аз муҷовирони ҳарами муҳаррамяту мушовирони сари тўит буд ва дар ъдоди наздикони мақом эътимод дошт , бад-ӣни сифорати мансӯби гашт ва ин рисолати мсҳўб ӯ гардонид ки шоҳи пелонро бигӯӣ ки пӯшида нест ки имрӯз дар басити ҳафт иқлӣми шаҳаншоҳи дадони манам ва дар ақтору офоқи гетии ҷанги ҷӯёни разми озмо ӣу сафдари ани ҳунари намо ӣ мисли ба зӯри бозуӣ мо зананд ва то тарафи дорӣу марзбонии ин кишвари мо рост , кас аз подшоҳони лашкари шикану хусравони тоҷи бахши андешаи интизоъи ин хона аз даст мо накардааст ва ба назъи аўохии ин давлату қатъи аўосри ин мамлакат машғӯл нагашта ва мо низ домани тамаъ ба гирди остонаи ҳеҷ хонае аз хонаҳои Кариму қадим ки бунёд бар тأсл ва тأсл дорад , нёлўдаҳему дасти татовулу тсоўл аз давр ва наздик кашида дошта ва ба мулотафату мсоъФти бегонаро дар ошноӣ ягона кардау ошноёнро ба равобити улфату завобити ҳуқуқи суҳбат ба мақоми хеши расонидаи лоҷарами баракати ин ойини гузидау русуми писандида аз хештани дорӣу шукргузории офаридагор ки аз мӯҷиботи мазид неъматаст дар мо расида то офтоби давлати мо ҳар рӯз дар иртифоъи дараҷа дигар битоза тараққӣ кард ва бо алии ?мароқии муроди анҷомӣду силки ин аҳвол манзум монаду ғарраи ин иқбол аз чашми захми ҳаводиси маъсӯми гашт ва донам ки ин ҷумларо рои мниршоаҳ аз он равшан тараст ки ба тақрир муҳтоҷ шавад . Имрӯз ба азми музоҳимати мо бархестаеу ҳиммат бар мноҳзт ва пигор гумоштаеу қасди хонае ки мақсади ъФоту мнҷои ҷиноту мҳрби оворагони айёму матлаби саргаштагон беоромаст , раво май дорӣ , алиси мнкми раҷули рашид , дар ҳамаи он давлати хона аз ҷумлаи муширони мушфиқ ва манеҳён содиқ яке набӯд ки аз кайфияти ҳоли огоҳ будӣ ва бар ҷлити умӯри ин ҷониб вуқуф доштӣ то эълом додӣ ки асоси хонаи мо бар адлпарвар ӣу раияти дорӣу лшкророиӣ чигуна ниҳодаанд ва ба рӯзгори дарози ин ақд ба низом ва ин ақд ба ибром чигуна расидау бози гӯйӣ ки лашкару раоёу афроди ҳашами мо аз авому хавоси хадами ҳамаи вафои пешау ҳифозпарвару махдум параст бошанду абои ани ҷади ҷузи роҳу расми фармони барии хешу фармони диҳии мо надида ва надониста , ночор ба вақти онкӣ кор биафтаду душман ба дар хона ояд , ҷузи тариқ ҷон сипор ӣ наспуранду ҷузи сари тоъат дорӣ надоранд ва то рамақӣ аз ҷон боқӣ бошад , рақами тақсир дар базли мҷҳўд бар худ назананд , фии алҷмлаҳ агар кавокиби ин ҳимматро аз назари адовати роҷеъи гирдонеу алрҷўъи ило алҳақ аввалӣ бархонӣу мураккаби азиматро аз роҳи тмодӣ дар ҳамин мақоми Аннани бози кашӣу оташӣ ки аз фаварони ҳавои табиати болои гирифтаи сет , ба оби маслиҳати фурӯи нишоне , корӣ бошад сутӯдау озмудаи ҳикмату фармӯдаи шариъат , онҷо ки гуфт :у ани ҷнҳўои ллслми Фоҷнҳи лҳо , то Фимои баъди роҳи мхолтт кушода ояду бисоти мбостт ммҳд гардаду модаи маваддат аз ҷонибин истеҳком гираду бунёди зоти албин бар салоҳи тأкди пазирад ва бо ин ҳамаи қуръаи ихтиёр ба дасти муроди тест . Ман аз рӯй ъқидти дайни дарин боб ба насиби насиҳати расидаму кор барои мсиби малик боз гузоштам .

پس گرگ را بگزیدند‌، که از مجاورانِ حرم محرمیّت و مشاورانِ سرِّ طویّت بود و در عدادِ نزدیکان مقامِ اعتماد داشت، بدین سفارت منصوب گشت و این رسالت مصحوبِ او گردانید که شاهِ پیلان را بگوی که پوشیده نیست که امروز در بسیطِ هفت اقلیم شهنشاهِ ددان منم و در اقطار و آفاقِ گیتی جنگ‌جویانِ رزم‌آزما‌ی و صفدر‌انِ هنر‌نما‌ی مثل به‌زورِ بازویِ ما زنند و تا طرف‌داری و مرزبانی این کشور ما راست، کس از پادشاهان لشکر‌شکن و خسروانِ تاج‌بخش اندیشهٔ انتزاع این خانه از دست ما نکرده است و به نزعِ اواخیِ این دولت و قطعِ اواصرِ این مملکت مشغول نگشته و ما نیز دامنِ طمع به گَردِ آستانهٔ هیچ خانه‌ای از خانه‌های کریم و قدیم که بنیاد بر تأثّل و تأصّل دارد‌، نیالوده‌ایم و دستِ تطاول و تصاول از دور و نزدیک کشیده داشته و به ملاطفت و مساعفت بیگانه را در آشنایی یگانه کرده و آشنایان را به روابطِ الفت و ضوابطِ حقوقِ صحبت به مقامِ خویش رسانیده لاجرم برکتِ این آیینِ گزیده و رسوم پسندیده از خویشتن‌داری و شکرگزاری آفریدگار که از موجباتِ مزید نعمت است در ما رسیده تا آفتابِ دولت ما هر روز در ارتفاعِ درجهٔ دیگر بتازه ترقی کرد و با علی مراقیِ مراد انجامید و سلکِ این احوال منظوم ماند و غرّهٔ این اقبال از چشم‌زخمِ حوادث معصوم گشت و دانم که این جمله را رایِ منیرشاه از آن روشن‌ترست که به تقریر محتاج شود. امروز به عزمِ مزاحمتِ ما برخاسته‌ای و همّت بر مناهضت و پیگار گماشته‌ای و قصدِ خانه‌ای که مقصدِ عفات و منجایِ جنات و مهربِ آوارگانِ ایّام و مطلبِ سرگشتگانِ بی‌آرام است، روا می‌داری، اَلَیسَ مِنکُم رَجُلٌ رَشِیدٌ ، در همهٔ آن دولت‌خانه از جملهٔ مشیران مشفق و منهیانِ صادق یکی نبود که از کیفیّتِ حال آگاه بودی و بر جلیّتِ امور این جانب وقوف داشتی تا اعلام دادی که اساسِ خانهٔ ما بر عدل‌پرور‌ی و رعیّت‌داری و لشکرآرایی چگونه نهاده‌اند و به روزگارِ دراز این عقد به نظام و این عقد به ابرام چگونه رسیده و باز گویی که لشکر و رعایا و افراد حشم ما از عوام و خواصّ ِ خدم همه وفا پیشه و حفاظ پرور و مخدوم پرست باشند و اَبا عَن جَدٍّ جز راه و رسمِ فرمان‌بری خویش و فرمان‌دهی ما ندیده و ندانسته، ناچار به وقتِ آنکه کار بیفتد و دشمن به‌در خانه آید‌، جز طریق جان‌سپار‌ی نسپرند و جز سرِ طاعت‌داری ندارند و تا رمقی از جان باقی باشد‌، رقم تقصیر در بذلِ مجهود بر خود نزنند‌، فی‌الجمله اگر کواکبِ این همّت را از نظرِ عداوت راجع گردانی و الرُّجُوعُ اِلَی الحَقِّ اَولَی برخوانی و مرکبِ عزیمت را از راهِ تمادی در همین مقام عنان باز کشی و آتشی که از فورانِ هوایِ طبیعت بالا گرفته‌ست، به آبِ مصلحت فرو نشانی، کاری باشد ستوده و آزمودهٔ حکمت و فرمودهٔ شریعت، آنجا که گفت‌: وَ اِن جَنحُوا لِلسَّلمِ فَاجنَح لَهَا ، تا فیما بعد راهِ مخالطت گشاده آید و بساطِ مباسطت ممّهد گردد و مادّهٔ مودّت از جانبین استحکام گیرد و بنیادِ ذات‌البین بر صلاح تأکّد پذیرد و با این همه قرعهٔ اختیار به‌دستِ مرادِ تست. من از روی عقیدتِ دین درین باب به‌نصیبِ نصیحت رسیدم و کار برای مصیبِ ملک باز گذاشتم.

Набояд казин чарби гуфтори ман

نباید کزین چرب گفتارِ من

Гумоне ба сустии баради анҷуман

گمانی به‌سستی برد انجمن

Ки ман ҷуз ба меҳр ин нагӯям ҳаме

که من جز به‌مهر این نگویم همی

Саранҷом некӣ биҷӯем ҳаме

سرانجامِ نیکی بجویم همی

Гург бирафт ва ин рисолат чунонкӣ шунида буд , ба маҳали адои расонид . Шоҳи пелонро аз истимоъи ин сухани далоили алтмоъи ғазаб дар пешонӣ падед омад . Ошуфтау ҷигар аз шуълаи ҳақади тофта , афсори тавсани табиати бигусасту Аннани тмолк аз даст бидод ва дар ҳамон маҷлиси яке аз сФҳоءи суфаро ки вақоҳат ба гиреҳи пешонии бози баста буду сабоҳат аз рӯй озарм давр карда , ба дурушти гӯйӣу зишти хуӣ ва бешармӣ ва кам озармии мавсуфу маърӯф , аз зумраи он шаддоди ғлоз ки гуфтаанд : кломҳми шарару анФосҳми шўоз , ихтиёр кард ; пеш хонд ва гуфт : бирав шерро аз ман пайғом бигзор ва бигӯӣ ки ту дар маҷлиси маъракаи мардон ки соқёни аҷали шароби хӯн ба косаи сар далерон диҳанду мардони кори кабоб аз дили шерон бар оташ шамшер ниҳанд , ҷуръа кашӣ накардае , аз садамаи пои пел чаҳ хабари дорӣ ?

گرگ برفت و این رسالت چنانکه شنیده بود‌، به محلِّ ادا رسانید. شاه پیلان را از استماعِ این سخن دلایلِ التماع غضب در پیشانی پدید آمد. آشفته و جگر از شعلهٔ حقد تافته، افسارِ توسنِ طبیعت بگسست و عنانِ تمالک از دست بداد و در همان مجلس یکی از سفهاءِ سفرا که وقاحت به گره پیشانی باز بسته بود و صباحت از روی آزرم دور کرده‌، به درشت‌گویی و زشت‌خویی و بی‌شرمی و کم‌آزرمی موصوف و معروف، از زمرهٔ آن شدادِ غِلاظ که گفته‌اند‌: کَلَامُهُم شَرَرٌ وَ اَنفَاسُهُم شُوَاظٌ، اختیار کرد‌؛ پیش خواند و گفت: برو شیر را از من پیغام بگذار و بگوی که تو در مجلسِ معرکهٔ مردان که ساقیانِ اجل شرابِ خون به کاسهٔ سرِ دلیران دهند و مردانِ کار کباب از دل شیران بر آتش شمشیر نهند‌، جرعه‌کشی نکرده‌ای‌، از صدمهٔ پایِ پیل چه خبر داری‌؟

Мо ҳоҷ нашӯй ании мсттиби сабо

مَا هَاجَ نَشوِیَ اَنِّی مُستَطِیبُ صَبَاً

Бали ношқи лнсими алъзи мртоҳ

بَل نَاشِقٌ لِنَسِیمِ العِزِّ مُرتَاحُ

Ахотри алҳўли мأнўсои бғмртаҳ

اُخَاطِرُ الهَولَ مَأنُوسَا بِغَمرَتِهِ

Комаи тмозҷи сФўи алмоءу алроҳ

کَمَا تَمَازَجَ صَفوُ المَاءِ وَ الرَّاحُ

Ҳилли шорби алхмри алои кули зии хбл

هَل شَارِبُ الخَمرِ اِلَّا کُلُّ ذِی خَبَلٍ

Хамрии дами алқрну илҳомоти ақдоҳ

خَمرِی دَمُ القِرنِ وَ الهَامَاتُ اَقدَاحُ

Ҳар чанд мастии ҳамоқатро аФоқт нест , ҳушёр бошу ғшоўаҳи ғбоўту худбинӣу шақовату бади ойинӣ аз пеши дида дил баргиру пеш аз Фўоти имкон , тадоруки кори нои афтодаро дарёбу лашгариро ки ҳамаи бёзқи рқъаҳи мтордт моанд , дар пой пел Маяфкан ,у лои иҳтмнкми сулаймону ҷунуда , насби хотири дор ва бидон ки амсоли сӯрати мо аз нигорхонаи фитрат нингихтаҳанду ҷуссаи ҳеҷ ҷонварӣ дар қолаби мисоли офариниш мо нарехта , лекини ҷамъи миёни асбоби рағбат ва рҳбт донем кардану аўонси улфатро бо шўорди ваҳшат дар силки таълӣф ба ҳам овардан ва аз файзи раҳмати всби азоби ҳамаро соҳиби насиби гардонӣдан то гуруҳеро ки аз мҳобти манзари мо рамида бошанд , ба латофати мухбир оромидаҳ дорему ҷамъиро ки тафриқаи салобати мо аз ҳам афканда бошад , ба лини мақолату рФқи истимолат ба муҷтамаъи орем . Абвоби хавфу тамаъ бар мунофиқу мувофиқи кушодау асбоби биму аўмиди мўолӣу маъодиро сохта бошему асоси хонадони шумо , агрч қадимаст , бо ъўосФи ҳамлаи мо пойдорӣ накунаду пушти он давлат агар чанд қавӣ ва қавӣамаст , тоқати осеб мо надорад .

هر چند مستیِ حماقت را افاقت نیست، هشیار باش و غشاوهٔ غباوت و خودبینی و شقاوت و بد آیینی از پیشِ دیدهٔ دل برگیر و پیش از فواتِ امکان‌، تدارکِ کار نا افتاده را دریاب و لشگری را که همه بیاذقِ رقعهٔ مطاردت ما‌اند، در پای پیل میفکن، وَ لَا یَحطِمَنَّکُم سُلَیمَانُ وَ جُنُودُهُ ، نصبِ خاطر دار و بدان‌ که امثالِ صورتِ ما از نگارخانهٔ فطرت نینگیخته‌اند و جثّهٔ هیچ جانوری در قالبِ مثالِ آفرینش ما نریخته، لیکن جمعِ میان اسبابِ رغبت و رهبت دانیم کردن و اوانسِ الفت را با شواردِ وحشت در سلکِ تألیف به‌هم آوردن و از فیضِ رحمت وصبِّ عذاب همه را صاحبِ نصیب گردانیدن تا گروهی را که از مهابتِ منظر ما رمیده باشند‌، به لطافتِ مخبر آرامیده داریم و جمعی را که تفرقهٔ صلابت ما از هم افکنده باشد‌، به لینِ مقالت و رفقِ استمالت به مجتمع آریم. ابوابِ خوف و طمع بر منافق و موافق گشاده و اسبابِ بیم و اومیدِ موالی و معادی را ساخته باشیم و اساسِ خاندان شما، اگرچ قدیم است، با عواصفِ حملهٔ ما پایداری نکند و پشتِ آن دولت اگر چند قوی و قویم است، طاقت آسیب ما ندارد.

Азои илҳоми ҳорбни албзоаҳи лқтът

اِذَا الهَامُ حَارَبنَ البُزَاهَٔ لَقَطَّعَت

Лҳои шрҷи алأстоаҳи ман шудаи алҳмл

لَهَا شَرَجُ الأَستَاهِ مِن شِدَّهِٔ الحَملِ

Арсаи он мамолик , агарчӣ зроъ ва боъ авҳоми нпимоид , ба рӯзи арзи атбоъи мо , танги маҷоли намояд . Даъвии астзҳори шумо , агрчи ҳама аз нотиқ ва сомитаст , ҳангоми ҷавоби мо ҳамаи смўти колҳўт бояд буд

عرصهٔ آن ممالک، اگرچه ذراع و باعِ اوهام نپیماید، به روزِ عرض اتباعِ ما‌، تنگ مجال نماید. دعوی استظهار شما، اگرچ همه از ناطق و صامت است، هنگام جوابِ ما همه صموت کَالحُوت باید بود

Хамӯш бӯдан бар съўаҳи фариза буд

خموش بودن بر صعوهٔ فریضه بود

Ки дар ҳаволӣ ӯ аждаҳо буд ҷӯшон

که در حوالیِ او اژدها بود جوشان

Агар наме хоҳӣ ки ба анФози кутубу изҳори ктоиби рӯзгори барӣу бандаи макотиби мо хоҳӣ ки бошӣ то пас аз китобати рақами таҳрири мо бар рқбаҳи худ кашӣ , ҳарчи зӯдтари рбқаҳи тоъатро гардани буна то мамолики маврӯсро ба иктисоби хизмати мо мусаҷҷали гирдоне ва аз ҳаводиси айём дар змони амони мо мҳмӣ ва ба ҳасани ъотФти мо мнтмӣ , пушт ба девори фароғати бози диҳӣу алои ин лашкари гарону сипоҳ бекаронро бидон ҳудӯди кашем ва ба зилзилаи ҳўоФри кӯҳи пайкари ани гирд аз асоси он малик бар орем ва ба овози куланги сўоъд , дару девораши чунон паст кунем ки дар видоъи соҳати он навҳаи ғроби албини роҳат ба гӯши насрин осмон расад .

اگر نمی‌خواهی که به انفاذِ کتب و اظهارِ کتایب روزگار بری و بندهٔ مکاتب ما خواهی که باشی تا پس از کتابت رقمِ تحریرِ ما بر رقبهٔ خود کشی، هرچ زودتر ربقهٔ طاعت را گردن بنه تا ممالکِ موروث را به اکتسابِ خدمت ما مسجلّ گردانی و از حوادث ایّام در ضمانِ امان ما محمّی و به حسنِ عاطفت ما منتمی، پشت به دیوارِ فراغت باز دهی و الّا این لشکرِ گران و سپاهِ بی‌کران را بدان حدود کشیم و به زلزلهٔ حوافِر کوه‌پیکر‌ان گَرد از اساسِ آن مُلک بر آریم و به آوازِ کلنگ سواعد‌، در و دیوارش چنان پست کنیم که در وداعِ ساحت آن نوحهٔ غراب‌البین راحت به گوش نسرین آسمان رسد.

Чунон бФшрми ман ба кини ту пой

چنان بفشرم من به کینِ تو پای

Ки гардуни гардони даройади зи ҷой

که گردونِ گردان درآید ز جای

Ҳамаи марзу буми ту вайрон кунам

همه مرز و بومِ تو ویران کنم

Кноми палангон ва шерон кунам

کنامِ پلنگان و شیران کنم

Фиристода ба наздики малик шерон омаду таҳмили шер дар ҳамон кисвати таҳдиду тҳўил ки шунида буд , бгзорду ароқми шару зроғми фитнаро дар ҷунбиш оварад . Шерро занҷири сукӯни бҷнбонид , сахти бёшФт . Ҳамон замони рӯбоҳро ҳозир кард ва бо ӯ аз роҳ мушовират гуфт : эй табиби соҳиби тҷрбту ҳнкт ки иллати корҳо шинохтау муъолиҷат ҳар як бар наҳҷ савоб карда ва дар мудовоати муъзалоту ҳали ъқуди мушкилот бар қонӯни амали ман тиби лмни ҳуб бо ҳамаи ихвони сафоу аҳбоءи вафои рафта , ҷавоб пел чист ?у тариқи некӯтар аз мувофиқату мроФқту мҳоднту мдоҳнт ки бар даст бояд гирифт кадом ? рӯбоҳ гуфт : бдонки сухани шоҳи пелони азин нмт ки меронад , далел равшанаст бар тирагии ройу рӯяту хирагии басару басират , чаҳ ҳеҷ оқили такяи эътимод бар ҳавлу қудрат хеш назанад гуфтаанд : се чизаст ки агрч ҳақир бошад , онро астҳқор нишоед кард , беморӣу вому душман . Бемории агрч дар оғози саҳли намояд , чун дар мудовоати он эҳмол равад , музмин шаваду воми агрч андак бошад , чун мутароким гардад , макунат бисёр аз адои он қосир ояду душман агарчӣ кучак буд , чун астсғор ва хор дошт аз андоза бугзарад , муқовимат ӯ ба охир сӯрат набандад . Ту ғам махӯр ки ғайрати илоҳӣ ҳар оина бар андешаи бағии пел тохтани ораду қазияи андохт ӯ маъкӯсу рояти мурод ӯ мнкўс гирданд ъ ,у албғии охири мадаи алқўм ;у бдонки захомати ҳайкалу Фхомти ҷусса чун аз ҳади хеш зиёдат шавад , ҳангом гурехтан ва овихтан аз кор фурӯ монаду сухани касрати лашкару анбӯҳии ҳашар ки бидон мустансир ва бар он мутаваккил май намояд , агар аз Авни эзадии моро мадад расад , он ҳамаи адади эшон дар ъдоди ҳеҷ аъдод наёяд .

فرستاده به نزدیکِ ملکِ شیران آمد و تحمیلِ شیر در همان کسوتِ تهدید و تهویل که شنیده بود، بگزارد و اراقمِ شرّ و ضراغمِ فتنه را در جنبش آورد. شیر را زنجیرِ سکون بجنبانید ، سخت بیاشفت. همان زمان روباه را حاضر کرد و با او از راهِ مشاورت گفت‌: ای طبیب صاحب تجربت و حنکت که علّتِ کارها شناخته و معالجتِ هر یک بر نهجِ صواب کرده و در مداواتِ معضلات و حلِّ عقودِ مشکلات بر قانونِ عَمَلَ مَن طَبَّ لِمَن حَبَّ با همه اخوانِ صفا و احبّاءِ وفا رفته، جوابِ پیل چیست‌؟ و طریقِ نیکوتر از موافقت و مرافقت و مهادنت و مداهنت که بر دست باید گرفت کدام‌؟ روباه گفت‌: بدانک سخنِ شاهِ پیلان ازین نمط که می‌راند، دلیلِ روشن است بر تیرگی رای و رویّت و خیرگیِ بصر و بصیرت، چه هیچ عاقل تکیهٔ اعتماد بر حول و قدرتِ خویش نزند گفته‌اند: سه چیزست که اگرچ حقیر باشد ، آنرا استحقار نشاید کرد، بیماری و وام و دشمن. بیماری اگرچ در آغاز سهل نماید، چون در مداواتِ آن اهمال رود ، مزمن شود و وام اگرچ اندک باشد‌، چون متراکم گردد، مکنت بسیار از ادایِ آن قاصر آید و دشمن اگرچه کوچک بوَد‌، چون استصغار و خوار داشت از اندازه بگذرد، مقاومتِ او به آخر صورت نبندد. تو غم مخور که غیرتِ الهی هر آینه بر اندیشهٔ بغی پیل تاختن آرد و قضیهٔ انداختِ او معکوس و رایتِ مرادِ او منکوس گرداند ع ، وَ البَغیُ آخِرُ مُدَّهِٔ القَومِ ؛ و بدانک ضخامتِ هیکل و فخامتِ جثّه چون از حدّ خویش زیادت شود، هنگامِ گریختن و آویختن از کار فرو ماند و سخنِ کثرتِ لشکر و انبوهیِ حشر که بدان مستنصر و بر آن متوکّل می‌نماید، اگر از عونِ ایزدی ما را مدد رسد، آن همه عددِ ایشان در عدادِ هیچ اعداد نیاید.

Ва молики тънии болأснаҳу алқно

وَ مَالَکَ تَعنَی بِالأَسِنَّهَٔ وَ القَنَا

Ва ҷдки тъони бғири синон

وَ جَدُّکَ طَعَّانٌ بِغَیرِ سِنَانِ

Ва аз бисёре миқдорашон набояд андешед ки далерони кор озмуда гуфтаанд ки аз ҳам пуштии душманони андеш на аз бисёре эшон , ту собит қадам бошу дили қавӣу нияту тўит бар адлу раҳмати мнтўии дор ва ба фарти мҷомлту ҳасани мъомлт бо халқи худои як равия бошу қавонини амри шаръу ойини фармони барии ҳақи перояи аъмол худ кун то аз олами ғайби сроёии нусрату таъӣди номзади вилоят ту гардонанду аФўоҷи фатҳу зафари бспоаҳи ту мтўосл шаваду анзли ҷнўдои лами трўҳо дар шаъни ту манзил ояд ва чун кор бдинҷо расед моро ба азми соқибу рои соиб рӯй бакор май бояд ниҳод ва ба лутфи тадбири дафъ мебояд андешед ки басӣ ҳақирон бӯдаанд ки дар корҳои хатир бо хасмони бузург кӯшидаанд ва зафар ёфтау коми бароварда , чунонк он мӯши хояи дуздро бо кадхудоӣ бдхў афтод . Шер гуфт : чун буд он достон ?

و از بسیاریِ مقدارشان نباید اندیشید که دلیرانِ کار‌آزموده گفته‌اند که از هم‌پشتیِ دشمنان اندیش نه از بسیاریِ ایشان، تو ثابت‌قدم باش و دل‌قوی و نیّت و طویّت بر عدل و رحمت منطوی دار و به فرطِ مجاملت و حسنِ معاملت با خلقِ خدای یک‌رویه باش و قوانینِ امرِ شرع و آیینِ فرمان‌بریِ حق پیرایهٔ اعمالِ خود کن تا از عالمِ غیب سرایایِ نصرت و تأیید نامزد ولایتِ تو گردانند و افواجِ فتح و ظفر بسپاهِ تو متواصل شود و اَنزَلَ جُنُوداً لَم تَرَوهَا در شأنِ تو منزل آید و چون کار بدینجا رسید ما را به عزمِ ثاقب و رایِ صایب روی بکار می‌باید نهاد و به لطفِ تدبیر دفع می‌باید اندیشید که بسی حقیران بوده‌اند که در کارهایِ خطیر با خصمانِ بزرگ کوشیده‌اند و ظفر یافته و کام برآورده، چنانک آن موشِ خایه دزد را با کدخدایِ بدخو افتاد. شیر گفت‌: چون بود آن داستان‌؟