Хирс гуфт : шунидам ки вақте Марӣ аз Қум , болўону ашколи мрқм , дар поёни кӯҳии хуфта буд , уқдаи занб бар раъси афканда то офтоби назарҳоро аз манзари карӣаи хеш пӯшида дорад ; чашм боз кард , мороФсоиро дид наздик ӯ чунон нанги даромада ки маҷол гурехтан худ нмидонст . Андешед ки агар бигурезам , дар ман расад ва агар бсўрохи рӯм , манфаз бигирад ; магари худро мурдаи созам , бошад ки ман дар гузарад хунаки зиндаи дилӣ ки аждаҳои нафаси аммораро бзндгӣ бимиранд , яъне садиқи вори амолти сифоти башарият дар гавҳари хеши падеди орад , пас забони набувват аз он иборат кунад ки ман ?ераади ани инзр ило мет имшии алии ваҷҳи аларзи Флинзри илои абии бикр , то боби ҳаёти саодати зинда абад гардад .
خرس گفت: شنیدم که وقتی ماری از قم، بالوان و اشکالِ مرقّم، در پایانِ کوهی خفته بود، عقدهٔ ذنب بر رأس افکنده تا آفتابِ نظرها را از منظر کریهِ خویش پوشیده دارد؛ چشم باز کرد، مارافسای را دید نزدیکِ او چنان ننگ درآمده که مجالِ گریختن خود نمیدانست. اندیشید که اگر بگریزم، در من رسد و اگر بسوراخ روم، منفذ بگیرد؛ مگر خود را مرده سازم، باشد که من در گذرد خنک زندهدلی که اژدهایِ نفسِ امّاره را بزندگی بمیراند، یعنی صدّیقِوار امالتِ صفاتِ بشریّت در گوهرِ خویش پدید آرد، پس زبانِ نبوّت از آن عبارت کند که مَن اَرَادَ اَن یَنظُرَ اِلَی مَیِّتٍ یَمشِی عَلَی وَجهِ الاَرضِ فَلیَنظُر اِلَی اَبِی بَکرٍ ، تا بآبِ حیات سعادت زندهٔ ابد گردد.
Бимир , эй дӯст , пеш аз марг , агрмии зиндагии хоҳӣ
بمیر، ای دوست، پیش از مرگ، اگرمی زندگی خواهی
Ки Идрӣс аз чунин мурдани биҳиштии гашти пеш аз мо
که ادریس از چنین مردن بهشتی گشت پیش از ما
Алқсаҳи мори аФсои неки бтأмли дарав нигоҳ кард , мурдаи пиндошт . Гуфт : дариғо , агар ин морро зиндаи бёФтмӣ , ҳеҷ млўоҳии доми мхориқи дунёро ба азин мумкин нашудӣ ва бидон касб бисёр кардамӣ , локини азин шаклу ҳиأт истидлол метавон кард ки мшъбзи рӯзгори азин ҳуққаи зумуррадин муҳра барда бошад ва дар қафоӣ ӯ пинҳон карда , онрои беруни гирам ки захира тамомаст . Мор бо худ гуфт : маро яқин шуд ки марг дар қафост , гурехтан суд надорад . Агар бқсди истихроҷи муҳраи сӯй ман ояд , чунонк захмии тавон андохт , аўлитр ки ман муҳраи таслими бози нчинм то кор хеш баронам . Мори аФсои даст фаро оварад то морро баргирад . Захмии коргар бар даст ӯ зад ва бар ҷой ҳалок кард ин фасона аз баҳр он гуфтам ки мард дурандеш набояд ки дар пасу пеши корҳо чандон бингарад ки вақти тадоруки кораш Фоит гардад . Блак дар онч маслиҳат бинад , азмро бе тҳоўни бонФози расонад .
القصّه مار افسای نیک بتأمّل درو نگاه کرد، مرده پنداشت. گفت: دریغا، اگر این مار را زنده بیافتمی، هیچ ملواحی دامِ مخاریقِ دنیا را به ازین ممکن نشدی و بدان کسب بسیار کردمی، لکن ازین شکل و هیأت استدلال میتوان کرد که مشعبذِ روزگار ازین حقّهٔ زمردین مهرهٔ برده باشد و در قفایِ او پنهان کرده، آنرا بیرون گیرم که ذخیرهٔ تمامست. مار با خود گفت: مرا یقین شد که مرگ در قفاست، گریختن سود ندارد. اگر بقصدِ استخراجِ مهره سوی من آید، چنانک زخمی توان انداخت، اولیتر که من مهرهٔ تسلیم باز نچینم تا کارِ خویش برانم. مار افسای دست فرا آورد تا مار را برگیرد. زخمی کارگر بر دستِ او زد و بر جای هلاک کرد این فسانه از بهر آن گفتم که مردِ دوراندیش نباید که در پس و پیشِ کارها چندان بنگرد که وقتِ تدارکِ کارش فایت گردد. بلک در آنچ مصلحت بیند، عزم را بیتهاون بانفاذ رساند.
Азои слти лами атрки мсолои лФотк
اِذَا صُلتُ لَم اَترُک مَصَالاَ لِفَاتِکٍ
Ва ани қиллати лами атрки мқолои лъолм
وَ اِن قُلتُ لَم اَترُک مَقَالاً لِعَالِمِ
Ва алои Фхонтнии алқўоФӣу ъоқнӣ
وَ اِلَّا فَخَانَتنِی القَوافِی وَ عَاقَنِی
Ани ибни Убайдуллоҳи заъфи алъзоим
عَن ابنِ عُبَیدِاللهِ ضُعفُ العَزَایِمِ
Шутур гуфт : марои дўоӣии ноҷъу тадбирии нофеъ дар алоҷи ин доءи муъзали мушкили он май намояд ки худро бФроз омад бахт ва пеш оварад қазо хурсанд гардонам , чунонк он мард барзигар кард бо гургу мор . Хирс гуфт : чун буд он достон ?
شتر گفت: مرا دوائی ناجع و تدبیری نافع در علاجِ این داءِ معضلِ مشکل آن مینماید که خود را بفراز آمدِ بخت و پیش آوردِ قضا خرسند گردانم، چنانک آن مرد برزگر کرد با گرگ و مار. خرس گفت: چون بود آن داستان؟