Аиро гуфт : овардаанд ки дар марғзорӣ ки саббоғи қамар дар рустаи рангразони раёҳинаши дуконӣ аз нилу бқми ниҳода буду аттори сабо дар миёни буии фурӯашони ёсуману Настаранаши нофаҳои машки хутани кушода , зоғӣ бар сари дарахтӣ ошён карда буд ки дар тасҳеҳи шаҷараи нисбат ба усӯли тӯбои антмоӣӣ ва ба фурӯъи сидра интисобӣ дошт ; чун блндроёни олии ҳиммат ба ҳеҷ мақомӣ аз мъорҷ улувва сар дар наёварда ва чун Карими табъони тоза рӯй пеш ҳар мтноўлии гардан фурӯ надошта ва чун бузургони воломнш аз сояи худ , хастагонро мояҳои осоиш дода .
ایرا گفت: آوردهاند که در مرغزاری که صبّاغِ قمر در رستهٔ رنگرزانِ ریاحینش دکّانی از نیل و بَقَم نهاده بود و عطّارِ صبا در میانِ بویفروشانِ یاسمن و نسترنش نافههایِ مشک ختن گشاده، زاغی بر سر درختی آشیان کرده بود که در تصحیحِ شجرهٔ نسبت به اصولِ طوبی انتمائی و به فروعِ سدره انتسابی داشت؛ چون بلندرایانِ عالیهمّت به هیچ مقامی از معارجِ علوّ سر در نیاورده و چون کریمطبعانِ تازهروی پیشِ هر متناولی گردن فرو نداشته و چون بزرگانِ والامنش از سایهٔ خود، خستگان را مایههای آسایش داده.
Илтзи ҷонӣаи бонъми мқтФ
یَلتَذُّ جَانِیهِ بِاَنعَمِ مَقطَفٍ
Манеҳу сокинаи бокарами мътФ
مِنهُ وَ سَاکِنُهُ بِاَکرمِ مَعطَفِ
Манеҳу сокинаи бокарами мътФ
مِنهُ وَ سَاکِنُهُ بِاَکرمِ مَعطَفِ
Трбоу мунҳати алайҳи мрФрФ
طَرَبا وَ مُنحَطٍّ عَلیهِ مُرَفرَفِ
Рӯзии росуе дар он навоҳӣ бигузашт , чашмаш бар он мақом афтод , аз мутолиаи он хира бимонад ; дилаши ҳамон ҷойгаҳ , хаймаи иқомати бузаду аўтоди рғбот ба замини он мавзеи фурӯи барад ва дар бен дарахти хонае бунёд карду дил бар тўтни ниҳод ва бо худ гуфт :
روزی راسویی در آن نواحی بگذشت، چشمش بر آن مقام افتاد، از مطالعهٔ آن خیره بماند؛ دلش همان جایگه، خیمهٔ اقامت بزد و اوتادِ رغبات به زمینِ آن موضع فروبرد و در بنِ درخت خانهای بنیاد کرد و دل بر توطّن نهاد و با خود گفت:
Поигаҳ ёфтӣ , ба пой мазан
پایگه یافتی، به پای مزن
Дстгаҳ ёфтӣ , зи дасти мада
دستگه یافتی، ز دست مده
Бисёр дар паии орзӯии пароганда рафтану чашми тмнӣ аз ҳар ҷониб андохтан , ихтиёр ақл нест . Дар равзаи ин Наими муқӣм бояд буд , азои аъшбти Фонзл . Охир бинишасту дўоъии талабро аз даруни дили фурӯи нишонд . Зоғро аз нишастан ӯ дил аз ҷой бархесту андешаи музоҳиматаши гирди хотири баромад ва гуфт : акнӯн марои тариқи азъоҷи ин хасму артоҷи абвоби иқомат ӯ аз пиромни ин ватани гоҳ ки маҳсӯламонеу мнҳўли умр ва зиндагонӣ дорам .
بسیار در پیِ آرزوی پراگنده رفتن و چشمِ تمنّی از هر جانب انداختن، اختیارِ عقل نیست. در روضهٔ این نعیم مقیم باید بود، اِذَا اَعشَبتَ فَانزِل. آخر بنشست و دواعیِ طلب را از درونِ دل فرو نشاند. زاغ را از نشستنِ او دل از جای برخاست و اندیشهٔ مزاحمتش گرد خاطر برآمد و گفت: اکنون مرا طریقِ ازعاج این خصم و ارتاجِ ابواب اقامت او از پیرامُنِ این وطنگاه که محصولِ امانی و منحول عمر و زندگانی دارم.
Билоди баҳои нитти алии тмоӣмӣ
بِلَادٌ بِهَا نِیطَت عَلَیَّ تَمَائِمِی
Ва аввали арзи миси ҷилдии туробҳо
وَ اَوَّلُ اَرضٍ مَسَّ جِلدِی تُرَابُهَا
намебояд андешед ва ҳар киро дафъи душманӣ зарурат шавад , аввали қадам дар роҳи инбисот бояд ниҳодану тараддуду омехтагии оғозидну роҳи тأлФу тътФи боз гушӯдан то ба меъёри ахтбору маҳаки эътибор , айёри кор ӯ шинохта гардад ва дониста ояд ки мақоми заъфу қӯт ӯ бо дӯсту душман то куҷосту хашму ризоӣ ӯ дар аҳволи мардуми Фимои ирҷъи إлии алмслҳаҳу алмФсдаҳ чаҳ асар дорад . Бад-ӣни андеша аз дарахт фурӯ парид ва ба наздик росу рафт , салом карду тҳитӣ ба озарм биҷой оварад . Росу андешед ки ин зоғ ба бадгавҳарӣу нопоки маҳзарӣу лӣими табъӣ мавсуфаст ва мо ҳамеша бар якдигари дандони мбоғзт афшурдаему сиблати дшмнонгӣу мноқзт дар пеш омад ҳамаи ағрози супурда ва ба дидори якдигари ибтиҳоҷ нанамудаему улфату издивоҷ дар ҷонибин сӯрат напазируфта , лошк ба азимати қасдӣу сголши кидӣ омада бошад , агар ман аз мноҳзти фурсати ғофили монам , мабодо ки тадбир ӯ бар ман коргар ояду антбоаҳи ман баъд аз он суд надорад ,
میباید اندیشید و هر کهرا دفعِ دشمنی ضرورت شود، اوّل قدم در راهِ انبساط باید نهادن و تردّد و آمیختگی آغازیدن و راهِ تألّف و تعطّف باز گشودن تا به معیارِ اختبار و محکِّ اعتبار، عیارِ کارِ او شناخته گردد و دانسته آید که مقامِ ضعف و قوّت او با دوست و دشمن تا کجاست و خشم و رضایِ او در احوالِ مردم فِیمَا یَرجِعُ إِلَی المَصلَحَهِ وَ المَفسَدَهِ چه اثر دارد. بدین اندیشه از درخت فرو پرید و به نزدیک راسو رفت، سلام کرد و تحیّتی به آزرم بجای آورد. راسو اندیشید که این زاغ به بدگوهری و ناپاکمحضری و لئیمطبعی موصوف است و ما همیشه بر یکدیگر دندانِ مباغضت افشردهایم و سبیلِ دشمنانگی و مناقضت در پیشآمدِ همه اغراض سپرده و به دیدارِ یکدیگر ابتهاج ننمودهایم و الفت و ازدواج در جانبین صورت نپذیرفته، لاشکّ به عزیمتِ قصدی و سگالش کیدی آمده باشد، اگر من از مناهزتِ فرصت غافل مانم، مبادا که تدبیرِ او بر من کارگر آید و انتباهِ من بعد از آن سود ندارد،
АҳФзи мо фӣ алўъоء бишуд алўкоء ; тариқ аввалӣ онаст ки ҳолеро дасту пои қудрат ӯ аз қасди хеши фурӯи бандам ва бингарам то худ чаҳ корро сохта бӯда сет . Пас аз ҷой биҷусту чангол дар пару боли зоғ устувор кард . Зоғ гуфт : ҷўонмрдо , ман аз сари мхолстии тамом ба маҷоласт ту рағбат намудем ва ба эътимоди неки шголӣу хуби хисолии ту ӣнҷои омадам ва гуфтам : ин иҷтиморо ҳеҷ макрӯҳӣ атқбол накунад ва ин муқоринаро инсироф ба ҳеҷ мҳзўрӣ набошад .
اِحفَظ مَا فِی الوَعَاءِ بِشَدِّ الوِکاءِ ؛ طریق اولی آنست که حالی را دست و پای قدرتِ او از قصدِ خویش فرو بندم و بنگرم تا خود چه کار را ساخته بودهست. پس از جای بجست و چنگال در پر و بالِ زاغ استوار کرد. زاغ گفت: جوانمردا، من از سرِ مخالصتی تمام به مجالستِ تو رغبت نمودم و به اعتمادِ نیکشگالی و خوبخصالیِ تو اینجا آمدم و گفتم: این اجتماع را هیچ مکروهی اتقبال نکند و این مقارنه را انصراف به هیچ محذوری نباشد.
Ва канти ҷлиси қъқоғи бен шӯр
وَ کُنتُ جَلِیسَ قَعقَاغِ بنِ شَورٍ
Ва лои ишқии бқъқоғи ҷлис
وَ لَا یَشقَی بِقَعقَاغٍ جَلِیسُ
Чун дар миёнаи сабаби адоватӣ собиқ несту мшръи суҳбат ки ҳануз лқиаҳи аввали сет , ба шоибаҳи зарарии лоҳқи мукаддари не , мӯҷиби ин қасд ва озор чист ? росу гуфт :
چون در میانه سببِ عداوتی سابق نیست و مشرعِ صحبت که هنوز لقیهٔ اوّلست، به شایبهٔ ضرری لاحق مکدّر نی، موجبِ این قصد و آزار چیست؟ راسو گفت:
Чун ҳарч ту мекунӣ маро маълум аст
چون هرچ تو میکنی مرا معلوم است
Худро ба ғалат чигуна донам афканд ?
خود را به غلط چگونه دانم افکند؟
Андешаи замир ҳар касе смири аҳволи дӯст ва душман бошаду хотири ман аз сари даруни ту огоҳаст , чунонк он пиёдаро аз сари дили савор буд . Зоғ гуфт : чун буд он достон ?
اندیشهٔ ضمیر هر کسی سمیرِ احوال دوست و دشمن باشد و خاطرِ من از سرِّ درونِ تو آگاه است، چنانک آن پیاده را از سرِّ دل سوار بود. زاغ گفت: چون بود آن داستان؟